विचार / लेख
डॉ. लखन चौधरी
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने देश की शीर्षस्थ एवं बेहद लोकप्रिय कोचिंग संस्थाओं के प्रचार एवं कामकाज के तरीके पर सवाल खड़ा करते हुए एक बेहद जरूरी और समसामयिक विमर्श खड़ा किया है कि देश की दशा-दिशा तय करने वाली नौकरशाही के सर्वोच्च पदों पर चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को प्रभावित करने के लिए किस-किस तरह के भ्रामक विज्ञापनों का सहारा लिया जा रहा है। सरकार के नाक के नीचे हो रहे इस तरह के कारनामे युवाओं को कितना प्रभावित करते हैं, यह तो वक्त तय करेगा लेकिन इस मसले पर स्वत: संज्ञान लेकर सीसीपीए ने जो कार्रवाई की है; वह सराहनीय है। यदि देश की तमाम सरकारी संस्थाएं इसी तरह स्वत: संज्ञान लेकर सचेत होकर काम करती रहें तो लोकतंत्र की लगातार गिरती साख के बीच सुकून का अहसास होता है।
सीसीपीए यानि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने विशेषकर संघ लोक सेवा आयोग की आईएए, आईपीएस, आईआरएस, आईएफएस जैसी देश की सर्वोच्च पदो ंके लिए परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को प्रभावित करने के लिए टॉपर और सफल उम्मीदवारों के नाम तथा तस्वीरों का उपयोग करने के भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित कारोबारी प्रथाओं के लिए 20 आईएएस कोचिंग सेंटरों के खिलाफ जांच चल रही है। यूपीएससी 2022 के अंतिम परिणाम में 933 उम्मीदवारों का चयन हुआ लेकिन 20 कोचिंग संस्थानों ने 3,500 से अधिक पूर्व छात्रों के चयनित होने का दावा किया है। यही वजह है कि इन कोचिंग संस्थाओं को पिछले डेढ़ साल में सफल छात्रों के बारे में जानबूझकर अहम जानकारी छिपाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। सीसीपीए का कहना है कि भविष्य में नीट, जेईई परीक्षाओं की तैयारियां करा रहे संस्थानों पर भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है।
सीसीपीए ने भ्रामक दावे करने वाले वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट, चहल अकादमी, खान स्टडी ग्रुप आईएएस, एपीटीआई प्लस, एनालॉग आईएएस, शंकर आईएएस, श्रीराम आईएएस, बायजूस आईएएस, अनअकैडमी, नेक्स्ट आईएएस, दृष्टि आईएएस, इकरा आईएएस, विजन आईएएस, आईएएस बाबा, योजना आईएएस, प्लूटस आईएएस, एएलएस आईएएस, राव आईएएस स्टडी सर्किल आदि 20 कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किया है। जबकि भ्रामक दावों और अनुचित कारोबारी प्रथाओं के लिए पांच सेंटरों राव आईएएस, स्टडी सर्किल, इकरा आईएएस, चहल अकादमी और आईएएस बाबा पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
सीसीपीए अध्यक्ष का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग के परिणाम घोषित होते ही कोचिंग संस्थान विज्ञापनों की होड़ में लग जाते हैं। कई संस्थान अहम जानकारी छिपाकर अपने कोचिंग संस्थान के छात्रों के समान रैंक धारक होने का दावा करते हैं। वे यह नहीं बताते हैं कि सफल अभ्यर्थी ने उनके यहां किस विषय में दाखिला लिया था। सीसीपीए के अनुसार इस समय देश में कोचिंग संस्थाएं उद्योग के तौर पर काम कर रही हैं। कोचिंग सस्थाओं का एक फलता-फूलता कारोबार है, जिसका मौजूदा बाजार राजस्व करीब 58-60 हजार करोड़ रुपये है। कोचिंग के लिए 2 लाख छात्र सालाना राजस्थान के कोटा जाते हैं। वहीं, दिल्ली यूपीएससी-सीएसई कोचिंग का गढ़ मानी जाती है।
भारत में अब ऐसे आईएएस कोचिंग सेंटर चलाने वाले की खैर नहीं है जो बेईमानी से कामयाबी दर का झूठा दावा कर लोगों को लुभाकर कोचिंग संस्थान चला रहे हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण इनके खिलाफ हरकत में आ चुका है। बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से गलत तरीके से अधिकतर आईएएस कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में उन छात्रों को दिखाकर यूपीएससी परीक्षा में अपनी ‘सफलता दर’ का दावा करते हैं, जिन्होंने उनके केंद्रों पर केवल मॉक इंटरव्यू दिए थे न कि पूरा सिलेबस पढ़ा था।
कोचिंग सेंटर के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों का पैमाना इस कदर बड़ा है कि कोचिंग संस्थाएं, यूपीएससी को ही झूठे साबित करते नजर आते हैं। हालांकि दो संस्थानों ने सीसीपीए की कार्रवाई को चुनौती दी है। जुर्माने के आदेश के खिलाफ राउज आईएएस स्टडी सर्किल ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग में अपील दायर की है, तो वहीं ‘आईएएस बाबा’ ने इसके खिलाफ स्टे ले लिया है। सीसीपीए के मुताबिक भ्रामक विज्ञापन आईएएस बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के फैसले पर असर डालते हैं। उसने कोचिंग सेंटर्स से अपने दावों को साबित करने के लिए कहा है और उन पाठ्यक्रमों या विषयों के बारे में ईमानदार खुलासा भी करने को कहा है जिनके लिए सफल छात्रों ने उनसे कोचिंग ली है।
सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे के मुताबिक ’पिछले डेढ़ साल में कोचिंग सेंटर्स को अपने सफल छात्रों के बारे में जानबूझकर अहम जानकारी छिपाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। हम उनके विज्ञापनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सभी जानकारी ईमानदारी से देनी चाहिए। यदि सही खुलासे होंगे तो धोखा कम होगा। उन्होंने आगे कहा कि सीसीपीए ने ऐसे विज्ञापनों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए इन सेंटर्स के खिलाफ नोटिस जारी किया है।’ उनके अनुसार सीसीपीए के कोचिंग सेंटर्स को उनके दावों का विवरण मांगने के लिए जारी स्वत: संज्ञान नोटिस के जवाब में अधिकांश ने जवाब दिया हैं। इसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि उनके विज्ञापनों में दिखाए गए यूपीएससी के कामयाब उम्मीदवारों केवल मॉक इंटरव्यू और इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल हुए थे।
सीसीपीए ने पाया कि कोचिंग सेंटर्स यह सब मुफ्त में करते हैं क्योंकि यह उनके (सेंटर्स) फायदे में है। खरे ने आगे बताया किसी भी विज्ञापन में यह जिक्र नहीं है कि सफल उम्मीदवारों ने केवल मॉक इंटरव्यू दिए। इससे ऐसी धारणा बनती है जैसे कि परीक्षा पास करने वाले सभी लोगों ने इन सेंटर्स में पूरा कोर्स किया है, जो भ्रामक है। सीसीपीएके अधिकारियों ने कहा कि आईएएस कोचिंग सेंटर प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को मुफ्त मॉक इंटरव्यू सत्र के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि उनके सफल होने के वो उनके सेंटर के पूर्व छात्र होने का दावा कर सकें। कई मामलों में ये मॉक इंटरव्यू मुश्किल से कुछ घंटों के लिए होते हैं। ऐसे में कोचिंग संस्थाओं की साख और विश्वसनीयता पर सवाल उठना-उठाना लाजिमी है।


