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बंगाल में दुर्गा पूजा की राजनीति और पूजा के आयोजन से पीछे हटती बीजेपी
15-Oct-2023 6:47 PM
बंगाल में दुर्गा पूजा की राजनीति और पूजा  के आयोजन से पीछे हटती बीजेपी

-प्रभाकर मणि तिवारी
भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 में से 18 सीटें जीती थीं। इस जीत के साथ ही उसने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती पेश की थी। भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के मकसद से 2020 में धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया था। यह राज्य में किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर तले आयोजित होने वाली पहली पूजा थी।

उस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल तरीके से उद्घाटन समारोह को संबोधित किया था।

हालांकि विधानसभा चुनाव में उसे इसका कोई फायदा नहीं मिल सका। वह लोकसभा के प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। उसे महज़ 77 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।
उसके बाद 2021 और 2022 में पार्टी की पूजा पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। लेकिन अब आर्थिक दिक्कत की दलील देकर वह इस साल पूजा का आयोजन नहीं कर रही है।

हालांकि इस बार भी ईस्टर्न ज़ोनल कल्चरल सेंटर में पूजा का आयोजन हो रहा है। लेकिन अबकी बार भाजपा इसमें शामिल नहीं है। उसकी बजाय पार्टी के कुछ कार्यकर्ता इसका आयोजन कर रहे हैं। भाजपा ने अपनी पूजा वहीं से शुरू की थी।

इस साल कौन कर रहा है पूजा का आयोजन
इस साल इसे भारतीय संस्कृति मंच के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है। सीधे पूजा आयोजित करने की बजाय अगले साल के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को राज्य भर में कम से कम सौ आयोजन समितियों के साथ सक्रियता से जुडऩे का निर्देश दिया है।

दुर्गा पूजा बंगाल में सियासी दलों के लिए जनसंपर्क का सबसे बड़ा मंच रहा है। इस मौके पर तमाम पार्टियां प्रमुख पूजा पंडालों के आसपास अपने स्टॉल लगा कर अपनी नीतियों और उपलब्धियों का प्रचार करती रही हैं।

राज्य में छोटी-बड़ी करीब तीस हज़ार पूजा आयोजित की जाती है। इनमें से तीन हज़ार से कुछ ज्यादा तो कोलकाता और आसपास के इलाकों में ही होती हैं।

पहले दुर्गा पूजा षष्ठी से लेकर नवमी यानी चार दिनों तक ही मनाई जाती थी। लेकिन अब यह दस दिनों तक चलती है। राज्य के इस सबसे बड़े त्योहार पर सियासत का रंग लगातार चटख होता जा रहा है।

वाममोर्चा के दौर में भी कई नेता विभिन्न पूजा समितियों के साथ जुड़े थे। लेकिन 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सियासत का रंग और गहरा हो गया।

भाजपा की कोशिश क्या थी?
विश्लेषकों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की तजऱ् पर भाजपा ने भी इस त्योहार का सियासी फायदा उठाने की कोशिश के तहत ही पूजा का आयोजन शुरू किया था। 

बीते कुछ वर्षों से पार्टी के केंद्रीय नेता कोलकाता में कई पूजा पंडालों का उद्घाटन करते रहे हैं। इस साल भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में राम मंदिर की थीम पर बनने वाली एक पूजा का आयोजन करेंगे। इस आयोजन समिति के प्रमुख भाजपा नेता सजल घोष हैं।

वर्ष 2020 में भाजपा के बैनर तले दुर्गा पूजा की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस से आने वाले नेता मुकुल रॉय और सब्यसाची दत्त ने की थी। लेकिन बाद में दोनों तृणमूल में लौट गए। बीते दो साल किसी तरह खींचतान कर पूजा के आयोजन के बाद भाजपा ने इस बार उससे हाथ खींचने का फैसला किया। अब पूजा छोटे स्तर पर आयोजित की जाएगी।

भाजपा इस बार पूजा का आयोजन क्यों नहीं कर रही है? इस सवाल पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार कहते हैं, ‘आर्थिक दिक्कतों के कारण हमने इसे जारी नहीं रखने का फैसला किया। कोई भी पूजा शुरू करने पर उसे कम से कम तीन साल तक करना होता है। इसलिए तीन साल तक इसके आयोजन के बाद हमने पार्टी के बैनर तले पूजा नहीं करने का फैसला किया। अब उसकी जगह पार्टी के कुछ कार्यकर्ता पूजा का आयोजन कर रहे हैं।’

मजूमदार का कहना था कि पूजा आयोजित नहीं करने का फैसला पिछले साल ही कर लिया गया था।

तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की राजनीति
वहीं तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि दुर्गा पूजा से कोई सियासी फायदा नहीं मिलते देख कर ही भाजपा ने इसके आयोजन से नाता तोडऩे का फैसला किया है।

पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, ‘भाजपा के फैसले से साफ हो गया है कि उसने 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी फायदे के लिए ही पूजा की शुरुआत की थी। लेकिन जब उसका कोई फायदा नहीं मिला तो किरकिरी होने के डर से और दो साल करने के बाद उसे बंद कर दिया गया। इससे साफ है कि पार्टी बंगाल और बंगालियों की मानसिकता भांपने में नाकाम रही है।’

घोष कहते हैं, ‘हमारे लिए दुर्गा पूजा बांग्ला संस्कृति, विरासत और इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। पार्टी इसे उत्सव के तौर पर मनाती है। वह दुर्गा पूजा के नाम पर राजनीति नहीं करती। लेकिन भाजपा ने अब धर्म और दुर्गा पूजा के नाम पर सियासत शुरू कर दी है।’

दूसरी ओर भाजपा ने उल्टे तृणमूल पर पूजा को सियासी रंग में रंगने का आरोप लगाया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, ‘तृणमूल कांग्रेस ने ही इस उत्सव को अपनी पार्टी के कार्यक्रम में बदल दिया है।’

उनका कहना है कि ममता बनर्जी के सत्ता में आने से पहले तक दुर्गा पूजा महज़ एक धार्मिक और सामाजिक उत्सव था। लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे एक राजनीतिक मंच में बदल दिया है।

विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के समय से ही भाजपा को बाहरी बताते हुए उस पर हमले शुरू किए थे। इस तमगे से निजात पाने के लिए ही पार्टी ने बंगाल के सबसे बड़े त्योहार में सक्रिय हिस्सेदारी करने और एक पूजा के आयोजन का फैसला किया था।

राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर मईदुल इस्लाम कहते हैं, ‘दरअसल, भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव की कामयाबी के बाद 2021 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बंगाल में अपनी जड़ें मज़बूती से जमाने के लिए ही पूजा के आयोजन का फैसला किया था। वर्ष 2021 के चुनाव से पहले यानी 2020 की पूजा तो भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक युद्धक्षेत्र में बदल गई थी।’ (bbc.com/hindi)


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