विचार / लेख
डॉ. आर.के. पालीवाल
नई संसद के पहले विशेष सत्र को केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक बनाने के लिए महिला आरक्षण बिल को तुरुप के इक्के की तरह इस्तेमाल कर आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अच्छा माहौल बनाने की पूरी कोशिश की थी क्योंकि आधी आबादी से जुड़ा यह मामला पिछले सत्ताईस साल से अटका हुआ था।
विपक्ष के सहयोग और लोकसभा में भाजपा के बहुमत के चलते यह बिल अभूतपूर्व बहुमत से पारित भी हो गया लेकिन भाजपा के दिल्ली से आने वाले वरिष्ठ नेता रमेश बिधूड़ी के अभद्रता की तमाम सीमाओं का अतिक्रमण करने वाले संसद में दिए भाषण की काली छाया का नई संसद, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आदि पर ऐसा ग्रहण लगा है जिसकी भरपाई होना मुश्किल है। हेट स्पीच की इस दुर्घटना के संसद में होने के कारण दिल्ली पुलिस इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। वैसे भी जैसे भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश से आने वाले माननीय सांसद श्री बृजभूषण शरण सिंह के मामले में अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों द्वारा दायर गंभीर शिकायत के बाद भी दिल्ली पुलिस सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बगैर कुछ नहीं कर सकी थी, यहां तो मामला उसके अपने इलाके के माननीय सांसद श्री रमेश बिधूड़ी जी का है जो दिल्ली के सबसे पॉश इलाके दक्षिण दिल्ली के सम्माननीय जन प्रतिनिधि हैं।
शायद सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी रमेश बिधूड़ी की संसद में अपने समकक्ष बहुजन समाज पार्टी के सासंद दानिश अली पर अपशब्दों की बौछार करते हुए दी गई हेट स्पीच पर लागू नहीं होगा क्योंकि संसद में दी गई स्पीच माननीय सांसदों का कानून से ऊपर रहने वाला अभिव्यक्ति की आज़ादी का विशेषाधिकार माना जाता है जिस पर अदालत में आपराधिक कानूनों के अंतर्गत कार्यवाही नहीं की जा सकती।
कानून के विशेषज्ञ इस पर ज्यादा प्रकाश डाल सकते हैं कि क्या अपने साथी सांसद के अशोभनीय दुर्व्यवहार से आहत सांसद आम नागरिक के रुप में मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं या उनके पास लोकसभा अध्यक्ष की अदालत से ही न्याय की उम्मीद करने का सीमित विकल्प है। रमेश बिधूड़ी ने उन्हें संसद से बाहर देखने की धमकी भी दी है जिसके चलते धमकी प्राप्त सांसद को एक्स, वाई या जेड श्रेणी की विशेष सुरक्षा अवश्य मिल सकती है, हालांकि इसकी संभावना भी वर्तमान दौर में कम ही है क्योंकि वे सत्ता धारी दल के विरोधी दल के सांसद हैं।
नई संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड से भले ही रमेश बिधूड़ी के कमल मुख से निकले निहायत घटिया अपशब्दों को हटा दिया गया है लेकिन आम भारतीय जन मानस में उनके अपशब्दों को नई संसद के पहले ऐतिहासिक सत्र के साथ चिपकाकर हमेशा याद रखा जाएगा। निश्चित रुप से इस अप्रत्याशित घटना का खामियाजा भारतीय जनता पार्टी को भी भुगतना पड़ेगा क्योंकि यह मामला बेहद गंभीर है। यदि रमेश विधूड़ी की जगह पहली बार संसद की सीढ़ी चढ़ा कोई अनुभवहीन युवा नेता रहा होता तो उसे इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता।
रमेश बिधूड़ी लगभग तीन दशक से सक्रिय राजनीति में हैं और तीन बार विधायक और दो बार सांसद चुने गए हैं। उनका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से बहुत पुराना नाता है। ऐसे अनुभवी नेता को संसद जैसे सर्वोच्च मंच में इतनी भद्दी गालियां देते हुए देखना और सुनना न केवल उनके दल के लिए बड़ा कलंक है बल्कि हर संवेदनशील भारतीय नागरिक, भारतीय गंगा जमुनी संस्कृति और देश की एक सौ चालीस करोड़ जनता के लिए बेहद शर्मसार करने वाला है। रमेश विधूड़ी ने संसद में जिन शब्दों का प्रयोग किया है उनका प्रयोग कोई हद दर्जे का गुंडा मवाली भी सार्वजनिक रूप से नहीं करता। यहां तक कि यथार्थ दिखाने का दावा करने वाली बॉलीवुड की फिल्मों के संवाद में भी इतने भद्दे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता।
शायद यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर किंकर्तव्यमूढ़ नजर आ रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खेद के अलावा प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की तरफ से कोई ऐसी कड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई जो इस मुद्दे पर देश में उपजे आक्रोश पर मरहम लगाने का काम कर सके।


