विचार / लेख

महिलाओं के कपड़ों पर चर्चा, और पितृसत्ता सोच
03-Sep-2023 2:42 PM
महिलाओं के कपड़ों पर चर्चा, और पितृसत्ता सोच

 शिखा वसु वैरागी

अभी मैं गूगल पर कुछ सर्च कर रही थी तभी मुझे एक बहुत इंटरेस्टिंग खबर पढऩे को मिली। वो ये कि हृ्रस््र की एक महिला वैज्ञानिक हैं क्रद्बह्लड्ड छ्व. ्यद्बठ्ठद्द, जिन्होंने 2011 में अमेरिका के वर्जीनिया राज्य के हैम्पटन में आयोजित हुए हृ्रस््र के एक कार्यक्रम ञ्जद्गस्रङ्गङ्घशह्वह्लद्धञ्चहृ्रस््र में एक चमकदार गोल्डन ड्रेस पहनी थी। जिसकी फोटो उन्होंने 2019 में लगभग 8 साल बाद अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया और शेयर करते हुए लिखा कि क्यों उन्होंने उस कार्यक्रम में इतनी चमकदार ड्रेस पहनी थी। उन्होंने लिखा, ‘अपनी अलमारी की सफाई करते हुए मैंने इस गाउन को देखा और उन लड़कियों को याद किया जिन्होंने मुझे एक पत्र भेजा था, जिसमें लिखा था कि मुझे नासा में बातचीत के दौरान कुछ चमकदार पहनना चाहिए, ताकि वे यकीन कर सकें कि वैज्ञानिक भी कुछ चमकदार पहन सकते हैं।’

रीटा जे किंग के इस ट्वीट को यूजर्स का जबरदस्त समर्थन मिला। कई यूजर्स ने उन्हें इसके लिए धन्यवाद दिया कि विज्ञान सभी के लिए होता है, उन लड़कियों के लिए भी जो चमकीले कपड़े पहनना पसंद करती हैं। इसके साथ ही कुछ लोगों ने उनकी इस बात के लिए भी तारीफ की कि उन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। अब चूंकि वैज्ञानिकों को हमेशा उनकी सादगी और समाज से अलग हटकर रहने और सोचने के लिए जाना जाता है, उस पर ऐसा होना आश्चर्य और हर्ष दोनों का विषय था। और वहां के लोगों ने इसको खुशी से स्वीकार करने के साथ ही ऐसे पहनावे की प्रशंसा भी की।

एक हमारे यहां देख लो... इसरो की महिला वैज्ञानिकों की साड़ी, बिंदी, चूड़ी, मंगलसूत्र पहने वाली फोटो को वायरल कर अप्रत्यक्ष रूप से सभी महिलाओं को बताया समझाया जा रहा कि देखो, महिला वैज्ञानिक लोग अगर ऐसे रह सकती हैं, तो तुम लोग भी रहो।

मतलब इतनी बड़ी उपलब्धि पर चर्चा छोडक़र महिला वैज्ञानिकों के पहनावे पर चर्चा हो रही। इसरो वैज्ञानिकों ने चांद पर चंद्रयान भेज दिया खोज करने के लिए और यहां के धर्म, संस्कृति के ठेकेदार महिलाओं वैज्ञानिकों की चूड़ी,बिंदी, मंगलसूत्र खोज लाये।

मने हद्द है बलात्कार से लेकर वैज्ञानिक खोज तक कुछ भी हो जाए चर्चा सिर्फ महिलाओं के कपड़े की ही होगी। मतलब अगर ये वैज्ञानिक साड़ी, चूड़ी, बिंदी, मंगलसूत्र पहनकर काम नहीं करतीं तो चंद्रयान चांद पर नहीं पहुंचता क्या..!!

अच्छा ये हिंदू संस्कृति परंपरा का ठेका महिलाओं पर ही रहेगा कि पुरुष भी पहनावे में परिवर्तन कर कुछ ठेका लेंगे..!!

वैसे इसरो की अधिकतर महिला वैज्ञानिक दक्षिण भारत से हैं। जहां ऐसा ही पहनावा पहना जाता है। इसलिए वो सभी अपने कार्यस्थल पर भी वैसे ही रहती हैं, जैसे वो रहती आईं हैं।

पहनावे का बुद्धि या सोच से कोई संबंध नहीं है। वो महिला वैज्ञानिक भले साड़ी, बिंदी, चूड़ी, मंगलसूत्र पहनी हों, लेकिन उनकी सोच संकीर्ण, विक्षिप्त नहीं होगी तुम ठेकेदारों की तरह। और इसे परखने के लिए कहीं उनके पास चले ना जाना, वरना मुंहतोड़ जवाब भी दे देंगी तुम सबको वो।

तो... महिलाओं के कपड़े पर चर्चा महिलाओं को ही करने दो, तुम सब अपना थोड़ा वाला दिमाग का ज्यादा खर्चा करके अपनी पितृसत्ता सोच को दुरुस्त करने पर चर्चा कर लो। ठीक है..!!


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