विचार / लेख

सबसे सुंदर फूल कौन सा?
02-Sep-2023 2:55 PM
सबसे सुंदर फूल कौन सा?

 विष्णु नागर

दुनिया का सबसे सुंदर फूल कौन सा है? कोई भी हो सकता है,वह भी जिसे हम रोज देखते-बटोरते हैं। जिसकी सुगंध हमारे दिल दिमाग में बसी हुई है।कायदे से तो वही फूल मेरे लिए सबसे खूबसूरत होना चाहिए मगर समस्या यह है कि उसी फूल को सबसे सुंदर मानना हमें आता नहीं! हम सोचते हैं, जो सर्वसुलभ है, जिसकी गंध हमारे अंदर बसी हुई है, वह खूबसूरत कैसे हो सकता है?

फिर दूसरी मुश्किल यह है कि आज तक देखे-सूँघे-बरते किसने सारे फूल? इसलिए हमें जो सबसे सुंदर लगे, वही सबसे सुंदर हुआ। जो आपके लिए सुंदर है, जरूरी नहीं, वही मेरे लिए सुंदर हो!

किसी के लिए उसकी सुंदरता का मतलब केवल दिखने की सुंदरता हो सकता है। किसी के लिए जब तक वह सुंदरता, सुवासित भी न हो, सुंदरता नहीं हो सकती ! इनमें से किसे गलत माना जाए? क्या उसे, जो केवल सुंदरता पर रीझा है या उसे, जिसके लिए सुंदर वह है,जो सुगंधित भी है या उसे जो मानता है कि सौंदर्य ही अपने आप में सुगंध है?

कौन बताएगा कि किसी को कि क्या सुंदर है? केवल वे बताएँगे, जिन्हें फूलों या किसी भी प्रकार की सुंदरता से साधारणतया प्रेम है और जो किसी फूल या किसी और की सुंदरता के बारे में अपना मत बदलने का साहस रखते हैं। सबमें यह साहस भी नहीं होता।

किसी सुंदर फूल ने दुनिया के किसी आदमी को कभी मना नहीं किया कि तुम मुझे देख नहीं सकते, तोड़ नहीं सकते। जब भी मना किया, मैंने मना किया, आपने मना किया।

सुंदर से सुंदर तितली ने कभी अपनी सुंदरता पर अभिमान नहीं किया। उसने यह सीखा ही नहीं। हममें से कोई उसे सिखाए-बताए,यह हमारी हैसियत नहीं।

यही फलों के साथ है।हमने कोई फल यह समझ कर तोड़ा या खरीदा कि यह काफी मीठा होगा पर मान लो, वह उतना मीठा नहीं निकला। कुछ फीका निकला मगर फल इस कारण कभी शर्मिंदा हुआ? सड़ गया हमारी उपेक्षा के कारण उसने हमें दोष दिया?या मीठा निकलने का अभिमान किया?

जिस पेड़ के पास जितनी छाया थी, उसने सबकी सब हमें दी। अपने पास किसी कल के लिए बचा कर नहीं रखी। न इसे उसने अपनी उदारता माना, न कोई कभी उससे यह मनवा पाया। न यह उसने कभी माना कि वह दाता है और हम भिखारी!

तो क्या सारी गड़बड़ हमारे साथ है?और क्या यह सच नहीं कि हममें से बहुत थोड़े लोग किसी तितली, किसी फूल, किसी छायादार पेड़ की तरह होते हैं? ऐसे लोग अपवाद होते हैं मगर कोई फूल, कोई तितली, कोई पेड़ अपवाद नहीं होता!

 


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