विचार / लेख
डॉ. आर.के. पालीवाल
रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सिलेंडर के साथ प्राइवेट रेल कोच में यात्रा कर रहे तीर्थयात्रियों की किसी ने चैकिंग नहीं की। स्टेशन पर रेलवे के टी टी के अलावा आर पी एफ और जी आर पी के सशस्त्र गार्ड भी रहते हैं।संभव है कि इन्हे रामेश्वरम तीर्थाटन के लिए जाने वाले तीर्थ यात्री होने के कारण रेलवे कर्मचारियों ने नहीं रोका हो क्योंकि आजकल सरकार हिंदू धर्म के तीर्थस्थलों पर बहुत मेहरबान है। जहां जहां भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार हैं वहां खुद प्रधान मंत्री की अगुवाई में धार्मिक लोक बन रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने तो बुजुर्गों के लिए विशेष धार्मिक यात्राओं का आयोजन किया है और हवाई यात्रा से भी तीर्थाटन कराया जा रहा है। यही हालात रहे तो किसी दिन एयरपोर्ट पर भी इस तरह के तीर्थयात्री सिलेंडर ले जाने की कोशिश करेंगे।चाहे सार्वजनिक परिवहन की बसे हों या ट्रेन अथवा हवाई जहाज़, भीड़भाड़ वाली सब जगहों पर एक भी यात्री की लापरवाही से बहुत बड़ा हादसा घट सकता है। ऐसे लापरवाह और क़ानून का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इसी के साथ रेलवे के उच्च अधिकारियों को संबंधित रेलवे स्टेशन और ट्रेन की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए जिनकी लापरवाही से इतनी जान गई हैं और रेलवे की संपत्ति को नुक्सान हुआ है।
रेलवे सुरक्षा को लेकर हाल ही में उड़ीसा में हुए भयंकर रेल हादसे के समय चारों तरफ खूब हायतौबा हुआ था और सी बी आई जांच के आदेश दिए गए थे। हर रेल हादसे के बाद जांच की खानापूर्ति होती है और एक जांच रिर्पोट आने से पहले और पहले की रिपोर्टों पर कार्यवाही होने के पहले नया हादसा सामने आ जाता है। ऐसी स्थिती से बचने के लिए हादसों में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ की गई कार्यवाही का ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि जनता को पता चल सके कि रेलवे प्रशासन उनकी जान और माल के प्रति कितना चिंतित है। इस मामले में यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि यात्रियों का जो दल उत्तर प्रदेश से दक्षिण भारत के कई पर्यटक स्थल पर यात्रा के लिए निकला था उसने किन किन ट्रेनों और स्टेशनों पर उस गैस सिलेंडर के साथ यात्रा की थी जिसकी वज़ह से मदुरई में यह हादसा हुआ है। यदि यह यात्रा दल कई दिनों से इस तरह की लापरवाही बरत रहा था तब उन तमाम स्टेशनों और ट्रेनों के सुरक्षाकर्मी भी भयंकर लापरवाही के दोषी हैं। हम कल्पना कर सकते हैं कि इस यात्री दल ने रेलवे से यात्रा करने वाले न जाने कितने यात्रियों के लिए बड़ा जोखिम पैदा किया था।
इस हादसे से एक और प्रश्न रेलवे की सेवाओं के प्राइवेटाइजेशन से संबंधित भी खड़ा होता है। लखनऊ के पर्यटकों का हादसाग्रस्त दल किसी ट्रेवल एजेंसी के माध्यम से रेलवे का प्राइवेट कोच बुक कर यात्रा के लिए निकला था। हादसे की वजह बना गैस सिलेंडर ट्रैवल एजेंसी का स्टाफ ही अवैध रूप से इस्तेमाल के लिए लिए डिब्बे में लाया था। इसकी पूरी संभावना है कि वह पिछ्ले कई दिनों से इसका इस्तेमाल कर रहा होगा। इसमें यात्रियों की भी मिलीभगत रही होगी क्योंकि उन्हीं के लिए सुबह की चाय की व्यवस्था की जा रही थी,इसीलिए किसी यात्री ने इस पर ऐतराज नहीं किया। जब ट्रैवल एजेंसी के लोग चोरी छिपे या किसी रेलवे कर्मचारी की मिलीभगत और लापरवाही के चलते डिब्बे में सिलेंडर जैसी बडी और ज्वलनशील वस्तु आसानी से ले जा सकते हैं तब कोई आतंकी समूह और स्मगलर आदि भी रेल में किसी बडी दुर्घटना को अंजाम दे सकते हैं। रेलवे जन सामान्य की यात्रा का सबसे बड़ा साधन है इसलिए उसकी सुरक्षा सरकार की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उम्मीद है रेल मंत्री और प्रधानमन्त्री तडक़ भडक़ के साथ वंदे भारत ट्रेनों के उदघाटन समारोह आयोजित करने के साथ साथ रेलवे सुरक्षा पर भी वैसा ही ध्यान देंगे।


