विचार / लेख

चंद्रयान की सफलता का राष्ट्रीय उत्साह
25-Aug-2023 4:11 PM
चंद्रयान की सफलता का राष्ट्रीय उत्साह

 डॉ. आर.के. पालीवाल

चंद्रयान 3 की चांद के दक्षिण ध्रुव पर सफल लैंडिंग बहुत दिनों के बाद देश में  घटी ऐसी विलक्षण घटना है जिस पर पूरे देश में असीम उत्साह की लहर है। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है कि देश से जुड़ी किसी सम्मान दायक घटना पर चाहे वह अंतरिक्ष में बडी सफलता हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी खिलाड़ी द्वारा विश्व चैंपियन बनना हो, हम सब भारत के तमाम नागरिक एक स्वर में मिले सुर मेरा तुम्हारा गीत की तर्ज पर खुशी मनाते हैं। चंद्रयान तीन की सफल लैंडिग इस मामले में भी खास है क्योंकि इसके पहले हमारा यह अभियान फेल हो गया था और अभी हाल ही में रूस का ऐसा ही अभियान विफल हो गया है। हमारे चंद्रयान अभियान की सफलता से भारत चंद्रमा पर सफलतापूर्वक यान भेजने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया और दक्षिण ध्रुव पर चंद्रयान भेजने वाला पहला देश बना है। आजादी के अमृतलाल में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की यह राष्ट्र को भेंट की गई अमूल्य धरोहर है।

चंद्रयान 3 की सफलता का सबसे ज्यादा श्रेय निश्चित रुप से उन वैज्ञानिकों की टीम को जाता है जिन्होंने मीडिया के ग्लैमर से दूर रहकर लंबी तपस्या सरीखी दिन रात कड़ी मेहनत के साथ इस सफलता को देशवासियों को समर्पित किया है। इसी के साथ नरेंद्र मोदी सरकार को भी श्रेय दिया जाएगा कि इस मिशन को मिशनरी मोड़ में संपन्न करने के लिए केन्द्र सरकार ने चंद्रयान अभियान से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम को सब सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ अब्दुल कलाम ने 2004 में इस अभियान की परिकल्पना की थी। पंडित जवाहरलाल नेहरु की दूरदर्शिता को भी सलाम जिन्होंने इसरो की स्थापना कर अपने बाद की पीढ़ी के प्रधानमंत्रियों को इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया है। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि अपने समकालीन नेताओं में पंडित नेहरू की वैज्ञानिक सोच और प्रगतिशील दूरगामी दृष्टि अतुलनीय थी।

उनके बाद इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सोच भी वैसी ही थी। इस मामले में अटल बिहारी वाजपेई और मनमोहन सिंह के कार्यकाल को भी याद किया जाना चाहिए जिन्होने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को निरंतर आगे बढ़ाने की हर संभव कोशिश की थी। इसी तरह इसरो के सूत्रधार क्रिम अंबालाल साराभाई को भी अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए मजबूत नीव रखने का श्रेय जाता है। एक कृतज्ञ राष्ट्र और प्रगतिशील समाज वही होता है जो अपनी ऐतिहासिक विभूतियों को याद करते हुए उनके द्वारा प्रारंभ किए रचनात्मक कार्यों को तीव्र गति प्रदान कर निरंतर आगे बढ़ाता है।

पिछले तीन-चार महीने से देश में कई निराशाजनक घटनाओं के कारण हताशा का माहौल था, जिनमें महिला पहलवानों के यौन शोषण का मामला, मणिपुर की जघन्य हिंसा और मेवात के सांप्रदायिक दंगों की काली छाया प्रमुख थी। चंद्रयान अभियान की सफलता ने ऐसे अंधियारे समय में राष्ट्र को ऐसी ही खुशी दी है जैसे कृष्ण पक्ष के बाद शुक्ल पक्ष में मिलती है। इस अभियान की सफलता के लिए जहां एक तरफ धार्मिक लोग अपने अपने धर्म की प्रार्थनाएं कर सफलता की कामना कर रहे थे, वहीं वैज्ञानिक सोच वाले लोग वैज्ञानिकों की मेहनत पर भरोसा कर रहे थे कि पिछली गलती से सीखकर इस बार अवश्य सफलता प्राप्त होगी। दुर्भाग्य से कुछ लोग धार्मिक लोगों की पूजा-अर्चना पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं और कुछ लोग इसे सिर्फ मोदी सरकार या पंडित नेहरू की दूरदृष्टि का प्रतिफल बताकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं। ऐतिहासिक सफलता के अवसर पर इस तरह की हल्की सोच से बाहर निकल कर हम सब भारतीय नागरिकों को उत्साह के साथ इस सफलता का सामूहिक आनंदोत्सव मनाना चाहिए।


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