विचार / लेख
राघवेन्द्र राव
मणिपुर में पिछले तीन महीने से ज़्यादा समय से चल रही जातीय हिंसा के बीच राज्य में तैनात सुरक्षा बलों के बीच जमीनी स्तर पर हो रहे टकराव अब खुलकर सामने आ गए हैं।
ताजा घटनाक्रम में मणिपुर पुलिस ने असम राइफल्स के सैनिकों के खिलाफ काम में बाधा डालने, चोट पहुँचाने की धमकी देने और गलत तरीके से रोकने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
असम राइफल्स की 9वीं बटालियन के सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ ये एफआईआर विष्णुपुर जिले के फोउगाकचाओ इखाई पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है।
एफआईआर में कहा गया है कि नौ असम राइफल्स के सैनिकों ने मणिपुर पुलिस के कर्मियों को अपना काम करने से रोका और कथित कुकी उग्रवादियों को सुरक्षित क्षेत्र में भागने का मौका दिया।
असम राइफल्स एक केंद्रीय अर्धसैनिक बल है, जो मुख्य रूप से भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात है। असम राइफल्स भारतीय सेना के ऑपरेशनल नियंत्रण के तहत काम करता है।
असम राइफल्स की भूमिका पर उठते सवालों का भारतीय सेना ने खंडन किया है। भारतीय सेना का कहना है कि ‘ज़मीनी हालात की जटिल प्रकृति की वजह से विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच सामरिक स्तर पर कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं’ जिनका निपटारा सयुंक्त तंत्र के जरिये तुरंत कर लिया जाता है।
इस मामले को लेकर सेना का कहना है कि असम राइफल्स हिंसा रोकने के लिए कुकी और मैतेई क्षेत्रों के बीच बनाये गए बफर जोन को सुनिश्चित करने के लिए कमांड मुख्यालय द्वारा दिए गए कार्य को अंजाम दे रही थी।
क्या है मामला?
असम राइफ़ल्स के खिलाफ दर्ज एफआईआर में मणिपुर पुलिस ने कहा है कि पाँच अगस्त को सुबह साढ़े छह बजे राज्य पुलिस की टीमें क्वाक्ता वॉर्ड नंबर आठ के पास फोल्जांग रोड के इलाके में अभियुक्त कुकी विद्रोहियों का पता लगाने पहुँची।
कुछ ही घंटे पहले दिन में कऱीब साढ़े तीन बजे क्वाक्ता में हथियारबंद अपराधियों ने सो रहे तीन मैतेई लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में दो लोग पिता-पुत्र थे। मणिपुर पुलिस को ये शक था कि इस हत्याकांड में कुकी विद्रोहियों का हाथ है और शायद वो अब भी उसी इलाके में शरण लिए हुए हैं।
मणिपुर पुलिस के मुताबिक जब उनकी टीमें इलाके में कुतुब वाली मस्जिद पहुंचीं तो असम राइफल की 9वीं बटालियन के कर्मियों ने क्वाक्ता फोल्जांग रोड के बीच अपनी बख्तरबंद कैस्पर गाडिय़ां लगाकर उन्हें आगे जाने से रोका और इसी वजह से कुकी आतंकियों को किसी सुरक्षित जगह भाग जाने का मौका मिला।
इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में मणिपुर पुलिस और असम राइफ़ल्स के जवानों के बीच तीखी बहस होते देखी जा सकती है। साथ ही मणिपुर पुलिस के एक जवान को असम राइफल्स पर हथियारबंद अपराधियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए देखा जा सकता है।
यह पहला टकराव नहीं
ये हालिया घटना पहला ऐसा मामला नहीं है, जब मणिपुर पुलिस और असम राइफ़ल्स के बीच होती तकरार साफ़ तौर पर देखी गई।
दो जून को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें देखा जा सकता था कि असम राइफल्स की 37वीं बटालियन के कर्मियों ने सुगनु पुलिस स्टेशन के मेन गेट पर एक बख्तरबंद कैस्पर गाड़ी लगा कर उसका रास्ता रोक दिया था। साथ ही वीडियो में ये भी दिखा कि सुगनु पुलिस स्टेशन के सामने की सडक़ पर दोनों तरफ कैस्पर गाडिय़ां लगाकर पुलिस स्टेशन तक पहुँचने के रास्ता रोक दिया गया था।
इस घटना के वीडियो में भी मणिपुर पुलिस के जवानों को असम राइफल्स के सुरक्षाकर्मियों से तीखी बहस करते देखा जा सकता है।
जुलाई के महीने में जब बीबीसी सुगनु पुलिस स्टेशन पहुँचा तो वहाँ तैनात मणिपुर पुलिस के कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होनें असम राइफल्स की 37वीं बटालियन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
एफ़आईआर दिखाते हुए एक अधिकारी ने बताया कि असम पुलिस पर कर्तव्य में बाधा डालने, चोट पहुँचाने की धमकी देने और ग़लत तरीक़े से रोकने की धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है।
एफ़आईआर में ये साफ तौर पर लिखा गया था कि असम राइफल्स का इरादा पुलिस स्टेशन पर हमला करने का था।
हमने सुगनु पुलिस स्टेशन पर तैनात जवानों से जानना चाहा कि ये घटना क्यों हुई? उनमें से एक ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि उनकी असली मंशा क्या थी। पर ये बहुत चौंकाने वाला था।’
भारतीय सेना असम राइफल्स के बचाव में
असम राइफल्स पर लग रहे आरोपों का भारतीय सेना ने खंडन किया है। ट्विटर पर जारी किए गए एक बयान में भारतीय सेना ने कहा कि कुछ विरोधी तत्वों ने तीन मई से मणिपुर में लोगों की जान बचाने और शांति बहाल करने की दिशा में लगातार काम कर रहे केंद्रीय सुरक्षा बलों विशेष रूप से असम राइफ़ल्स की भूमिका, इरादे और अखंडता पर सवाल उठाने के हताश और असफल प्रयास बार-बार किए हैं।
भारतीय सेना ने कहा, ‘यह समझने की जरूरत है कि मणिपुर में जमीनी हालात की जटिल प्रकृति के कारण विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच सामरिक स्तर पर कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। हालाँकि कार्यात्मक स्तर पर ऐसी सभी गलतफहमियों को मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के प्रयासों में तालमेल बिठाने के लिए संयुक्त तंत्र के माध्यम से तुरंत संबोधित किया जाता है।’
भारतीय सेना ने कहा कि ‘असम राइफल्स को बदनाम करने के उद्देश्य से पिछले 24 घंटों में दो मामले सामने आए हैं।’
‘पहले मामले में असम राइफल्स बटालियन ने दो समुदायों के बीच हिंसा को रोकने के उद्देश्य से बफर जोन दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने के एकीकृत मुख्यालय के आदेश के अनुसार सख़्ती से काम किया है। दूसरा मामला असम राइफ़ल्स को एक ऐसे क्षेत्र से बाहर ले जाने का है, जिससे उनका कोई संबंध भी नहीं है।’
जिस दूसरे मामले की बात यहाँ की गई है, वो भी एक वीडियो से जुड़ा हुआ है, जिसमें महिलाएं एक फौजी वर्दी पहने अधिकारी के पैरों पर गिरकर रोती-बिलखती नजर आ रही हैं।
इस वीडियो के जरिये ये दावा किया गया था कि ये महिलाएं कुकी-जो समुदायों से हैं जो अपने इलाके से असम राइफल्स को हटाकर किसी अन्य सुरक्षाबल को तैनात करने की योजना का विरोध कर रही हैं और रो-रोकर असम राइफल्स से वहाँ रुकने की गुहार लगा रही है।
भारतीय सेना ने अब कहा है कि मई में मणिपुर में संकट पैदा होने के बाद से सेना की एक इन्फैंट्री बटालियन उस क्षेत्र में तैनात है, जहाँ से असम राइफल्स को हटाने की कहानी बनाई गई है।
भारतीय सेना ने ये भी कहा है कि वो और असम राइफल्स मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करते हैं कि वो पहले से ही अस्थिर माहौल में हिंसा को बढ़ावा देने वाले किसी भी प्रयास को रोकने के लिए अपने कार्यों में दृढ़ बने रहेंगे।
असम राइफल्स के खिलाफ बढ़ती नाराजगी
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच चल रही जातीय हिंसा में अब तक 152 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 60,000 लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं। इनमें से कुछ राज्य छोडकर चले गए हैं और हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
हज़ारों की संख्या में भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों को मणिपुर में तैनात किया गया है। लेकिन असम राइफल्स एक ऐसा बल है जो पिछले कई वर्षों से मणिपुर के कई इलाकों, खासकर पहाड़ी और म्यांमार से लगती सीमा के इलाकों पर तैनात है। पहाड़ी और सीमा से लगते इलाक़े कुकी बाहुल्य वाले हैं और इसी बात को आधार बना कर बार-बार ये इल्जाम लगाया जाता रहा है कि असम राइफल्स और कुकी समुदाय में घनिष्ठता है।
11 जुलाई को मणिपुर के 31 विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर कहा कि असम राइफल्स की 9वीं, 22वीं और 37वीं को राज्य से हटा दिया जाए और ऐसे दूसरे केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए जो राज्य की एकता को बढ़ावा देने की ओर ज़्यादा इच्छुक हैं।
इन विधायकों का ये भी कहना था कि असम राइफल्स की कुछ इकाइयों द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को लेकर चिंताएं हैं जो वर्तमान में राज्य के भीतर एकता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
सात अगस्त को मणिपुर की भारतीय जनता पार्टी इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे एक ज्ञापन में कहा कि राज्य में शांति बनाए रखने में असम राइफल्स की भूमिका की काफी आलोचना हो रही है और सार्वजनिक आक्रोश देखने को मिल रहा है।
इस ज्ञापन में कहा गया कि असम राइफल्स निष्पक्षता बनाये रखने में असफल रही और जनता ये आरोप लगा रही है कि उनकी भूमिका पक्षपातपूर्ण है जिसमें वो एक समुदाय का समर्थन कर रहे हैं।
मणिपुर भाजपा ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है कि जनहित में असम राइफल्स को हटाकर किसी अन्य अर्धसैनिक बल को स्थाई रूप से मणिपुर में तैनात किया जाए। (bbc.com/hindi/)


