विचार / लेख

राहुल गांधी की सजा पर रोक
05-Aug-2023 2:36 PM
राहुल गांधी की सजा पर रोक

डॉ. आर.के. पालीवाल

राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने जो टिप्पणियां की हैं वे न केवल देश के सभी न्यायालयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं बल्कि लोकतंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मानहानि के मुकदमे में अधिकतम सजा सुनाते हुए न्यायालय को यह बताना चाहिए था कि वे इस मामले में अधिकतम सजा क्यों दे रहे हैं? निचली अदालत ने इस मामले में यह नहीं बताया है इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने इसे उचित नहीं माना है। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी का यह भी अर्थ निकलता है कि यदि किसी भी मामले में कोई न्यायालय किसी अभियुक्त को अधिकतम सजा देता है तो उसकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उन कारणों का भी खुलासा करे जिनकी वजह से अमुक मामले में अधिकतम सजा देना उचित है।

अक्सर यह देखने में आता है कि जब किसी संगीन अपराध में कोई न्यायालय अधिकतम सजा फांसी सुनाता है तो वह उन कारणों पर भी प्रकाश डालता है जिनकी वजह से अधिकतम सजा दी जाती है। इसी तरह टैक्स चोरी आदि के मामलो मे भी संबंधित अधिकारी जब अधिकतम जुर्माना लगाते हैं तब अपने आदेश में उन कारणों को इंगित करते हैं जिनकी वजह से उन्हें अधिकतम जुर्माना लगाने के लिए उपयुक्त समझा जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह भी बताया है कि राहुल गांधी लोकसभा के सासंद हैं, इस नाते उनकी सजा व्यक्तिगत होने के साथ साथ उस लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं से भी जुड़ी है जिनका वह संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा संभवत: सर्वोच्च न्यायालय ने इसलिए भी कहा है क्योंकि किसी सांसद की अयोग्यता घोषित होने का परिणाम उनके क्षेत्र के मतदाताओं पर भी पड़ता है इसलिए निचली अदालत को अधिकतम सजा सुनाते समय इस बात पर भी गौर करना चाहिए था। इस बात से कुछ लोग असहमत भी हो सकते हैं क्योंकि भविष्य में यह तर्क आपराधिक पृष्ठभूमि के सासंद अपने खिलाफ चल रहे हर अपराध के मामले में ले सकते हैं कि उन्हें अधिकतम सजा मिलने से उनके मतदाताओं को दिक्कत होगी।

सर्वोच्च न्यायालय के इस इस निर्णय पर राहुल गांधी के विरोधी अवश्य दुखी होंगे लेकिन कांग्रेस के नेताओं के लिए यह निर्णय जश्न की तरह है। प्रियंका वाड्रा से लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के उत्साह से भरे ट्वीट सोसल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।अधिकांश निष्पक्ष लोगों की भी इस निर्णय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया आ रही हैं क्योंकि जनता को देश के तमाम बड़े नेताओं की एक से एक हल्की बयानबाजी आए दिन सुनने को मिलती है फिर भी अव्वल तो भारतीय न्यायालयों के निर्णय में लम्बे विलंब के कारण कोई कोई ही मानहानि का मुकदमा दायर करता है, उसमें भी निर्णय आने में लम्बा समय लगता है। दूसरी तरफ राहुल गांधी पर जिस व्यक्ति ने मुकदमा दायर किया उसके खिलाफ राहुल गांधी ने कुछ आपत्तिजनक नहीं कहा था। ऐसे में निचली अदालत द्वारा बहुत जल्दी अधिकतम सजा सुनाए जाने पर लोगों को आश्चर्य हुआ था।

सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें यह नसीहत भी दी है कि सार्वजनिक प्लेटफार्म पर बोलते हुए उन्हें भी अपने भाषण में संयम रखना चाहिए। एक तरह से सर्वोच्च न्यायालय की यह सलाह राहुल गांधी के साथ साथ सरकार, सत्ताधारी दल और विपक्षी दलों के तमाम नेताओं पर भी लागू होती है जिनकी जुबान कैंची की तरह बेलगाम दौड़ती है।

अभी यह कहना मुश्किल है कि ज्यादातर नेता सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी से अपनी भाषा और शब्दावली पर नियंत्रण रखेंगे या नहीं। जिस तरह से आगामी लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी दल और विपक्षी दल दो बड़े गठबंधनों के माध्यम से आरपार की लड़ाई लडऩे पर आमादा हैं उसमें भाषाई संयम के बांध टूटने की काफी संभावना है। बहरहाल इंडिया गठबंधन और उससे अधिक कांग्रेस के लिए यह निर्णय काफी राहत लेकर आया है।


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