विचार / लेख

मणिपुर की इन महिलाओं से सीखो...
02-Aug-2023 10:23 PM
मणिपुर की इन महिलाओं से सीखो...

-कृष्ण कांत

 
मणिपुर का एक कुकी बहुल इलाका. जिला चूराचांदपुर. पूरे राज्य में हिंसा का दौर चल रहा था. एक कुकी बहुल इलाके में कुछ मैतेई लोग फंस गए. भीड़ उन पर हमला कर रही थी. तभी कुकी समुदाय की महिलाएं एकत्र होकर सामने आईं. उन्होंने ह्यूमन चेन बनाकर अपने ही समुदाय के लोगों को हमला करने से रोका और फंसे हुए मैतेइयों की जान बचाई.

इसी तरह की एक घटना मणिपुर यूनिवर्सिटी में सामने आई. भीड़ यूनिवर्सिटी में घुसकर यहां पढ़ने वाली कुकी लड़कियों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही थी. उन्हें बचाने के लिए मैतेई लड़कियां सामने आईं. उन्होंने इकट्ठा होकर भीड़ का विरोध किया, उन्हें समझाया. उन्हें ऐसा करते देखकर स्थानीय लोगों ने भी उनका साथ दिया और कुकी लड़कियों की जान बच गई.

दंगे कभी खुद से नहीं होते. कराए जाते हैं. मसलन, हथियारबंद भीड़ को रैली की इजाजत दी जाती है ताकि वे इंसानियत का कत्ल कर सकें. हत्या के आरोपियों को, लिंच मॉब को, नफरत के सौदागरों को और भाड़े के जॉम्बियों को उतारा जाता है. पुलिस, कानून और पूरे तंत्र को पंगु बना दिया जाता है. कानून का शासन खत्म कर दिया जाता है. ताकि समाज को बांटा जा सके. समाज बंटेगा तो आधा उनकी तरफ होगा. उनकी सत्ता बची रहेगी.

लेकिन एक बात याद रखिए. जब-जब दंगा-फसाद करवाकर खून की होलियां खेली जाती हैं, इंसानियत कहीं तड़प रही होती है. सत्ता बहुत ताकतवर चीज है. दुखद है कि वह इंसानियत के साथ नहीं, कातिलों के साथ होती है इसलिए इंसानियत हार जाती है. अगर सरकार बचाने वालों के साथ होती तो मणिपुर में अमन होता.

मणिपुर हो या हरियाणा, हर जगह हमारा समाज सत्तालोभी और क्रूर हुक्मरानों की “बांटो और राज करो” नीति का भुक्तभोगी है. जागो! संगठित बनो! मणिपुर की इन महिलाओं से सीखो. मानवता को बचाओ! वरना ये खून के प्यासे लोग आपके बच्चों का भविष्य नष्ट कर देंगे.


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