विचार / लेख

अपने अपने राम और अपने अपने राम राज्य
01-Aug-2023 4:33 PM
अपने अपने राम और अपने अपने राम राज्य

  डॉ. आर.के. पालीवाल

अपने-अपने राम हिंदी के लेखक भगवान सिंह की प्रसिद्ध किताब है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का व्यक्तित्व इतना विराट था कि उसे देश के विभिन्न क्षेत्रों और वर्तमान में एशिया के अलग हुए देशों के लोगों ने अपनी अपनी समझ के अनुसार आत्मसात किया है। डॉ. राम मनोहर लोहिया द्वारा संकलित किए राम के विविध चरित्रों को चित्रकूट में स्थापित एक प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है जहां एक साथ भगवान राम से संबंधित राम लीलाओं की अद्भुत जानकारी मिलती है। जैसे लोक में राम के अलग अलग स्वरूप विद्यमान हैं वैसे ही साहित्य में भी है। बाल्मीकि रामायण के राम तुलसीदास की रामचरित मानस के राम से वैसे ही अलग हैं, जैसे महात्मा गांधी के राम बाल्मीकि और तुलसीदास के राम से अलग हैं।

अब हमारे यहां अलग अलग लोगों राम ही अलग अलग नहीं रहे बल्कि राम राज्य भी अलग अलग हो गए हैं। बाल्मीकि और तुलसीदास ने जिस राम राज्य का जिक्र किया है महात्मा गांधी के राम राज्य की परिकल्पना भी लगभग वैसी ही थी जिसमें शासकों की निर्भीकता, सत्य, ईमानदारी, दया, करुणा और अंत्योदय समाज की सेवा राज्य के प्रमुख तत्व थे। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तरह से राम राज्य की परिकल्पना की है। उसमें राम का भव्य मंदिर सबसे ऊपर है और राम के आदर्श और मर्यादा उसके बाद आते हैं। भाजपा के राम राज्य में जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम् का नारा अनिवार्य है। इसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ राष्ट्र का सबसे अहम सामाजिक सांस्कृतिक संगठन माना जाता है। बजरंग दल को राम के सेवक हनुमान उर्फ बजरंग बली का अधिकृत प्रतिनिधि मानते हैं और सभी नागरिकों को हिंदू कहा जाता है।

इसे भगवान राम की महिमा कहें या भारतीय जनता पार्टी की नकल हाल ही में कांग्रेस ने भी अपने राम राज्य की परिकल्पना कर ली है। उनके राम राज्य की कमान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संभाली है। उन्होंने कांग्रेस और छत्तीसगढ़ के राम राज्य के एक पेज के विज्ञापन भी जारी कर दिए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल बताया है इसलिए चंद्रखुरी में माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर का भव्य विकास करने की घोषणा की है। भारतीय जनता पार्टी यदि भगवान राम के भव्य मंदिर का श्रेय लेगी तो कांग्रेस भगवान राम की माताश्री के भव्य मंदिर निर्माण का श्रेय लेगी। यही नहीं छत्तीसगढ़ सरकार 138 करोड़ रूपए खर्च कर राम वन गमन पथ का विकास कर रही है। सरकार के विज्ञापन में जुटाई गई जानकारी के मुताबिक भगवान राम ने अपने चौदह साल के वनवास के दस साल छत्तीसगढ़ में बिताए थे। सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में राम की नौ मूर्तियों की स्थापना की जानी है। श्री राम के नाम पर जितना काम छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार कर रही है उसका एक अंश भी रमन सिंह की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने नहीं किया था। भूपेश बघेल का मानना है कि राम के साथ छत्तीसगढ़ का मामा भांजे का नाता है और भांजे के साथ छत्तीसगढ़ में विशेष रिश्ता होता है। इस लिहाज से पड़ोसी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो आम जन के मामा हैं, छत्तीसगढ़ के नागरिक भगवान राम के मामा हुए।

कांग्रेस ने भी शायद तय कर लिया है कि भगवान राम और राम राज्य पर भारतीय जनता पार्टी का एकाधिकार नहीं होने देंगे। इसी कड़ी में उन्होंने भाजपा के सहायक संगठन बजरंग दल को भगवान राम के प्रधान सेवक बजरंग बली का इकलौता प्रतिनिधि मानने पर एतराज किया था। मध्य प्रदेश के कांग्रेस के आदिवासी विधायक ने हनुमान को वनों का निवासी आदिवासी बताया है और बजरंग दल और उसके समर्थकों को चेतावनी दी है कि वे आदिवासियों के इष्ट बजरंग बली के स्वयंभू प्रतिनिधि बनने की कोशिश न करें। अब देखना यह है कि अगले लोकसभा चुनाव में देश की जनता किसे भगवान राम का भक्त मानेगी और को किसके रामराज्य को बेहतर मानेगी !


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