विचार / लेख
प्रकाश दुबे
1990 में इंजीनियरिंग कालेजों में सौ विद्यार्थियों में बमुश्किल दस छात्राएं होती थीं। 2023 आधा बीतने से पहले प्रीति भारतीय प्रौद्योगकी संस्थान मद्रास की निदेशक बन चुकी हैं। मुंबई आइआइटी में काम कर चुकीं प्रीति अघायलम चेन्नई में रसायन विभाग की अधिष्ठाता (डीन) हैँ। अफ्रीकी महाद्वीप के जंजीबार में बनने जा रहे आइआइटी की जिम्मेदारी उन पर है। दूसरा उदाहरण-भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने रवानगी से पहले इंदौर के पत्रकारों पर मीडिया विमर्श का सहेजकर रखने वाला अंक तैयार कराया। पूर्णकालिक महानिदेशक आने तक अनुपमा भटनागर संस्थान संभालेंगी। भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई इन दोनों में एक समानता है। तीनों संस्थाओं में सर्वोच्च पद पहली मर्तबा किसी महिला को सौंपा गया है। लाखों में नहीं, अरबों में एक। (अरब का मतलब यहां देश नहीं, सौ करोड़)। ऊंची-ऊंची हांकने भर से 143 करोड़ के देश में महिलाओं को रगेदती, चीरहरण करती भीड़ की क्रूरता और हमारी चुप्पी का पाप कम नहीं होता।
आधा रहे सो पेंशन पावै
मंदिर-मढ़ी में पूजा पाठ करने वाले सब लोग ज्योतिषी तो होते नहीं। औरों का भविष्य बांचने वालों में अनेक अपने और यजमान को गच्चा खाने से नहीं बचा पाते। चुनाव तैयारी में राम रहीम की पेरोल रिहाई का पुण्य कमाने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आजू बाजू नजऱ डाली। मंथन किया। ज्ञान प्राप्त हुआ। अविवाहित व्यक्तियों को मासिक वृत्ति देने का ऐलान कर दिया। हरियाणा में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का अनुपात बहुत कम है। दिमाग पर जोर देने पर मुख्यमंत्री को कुछ देर बाद लगा कि योजना में विधुरों को शामिल करना चाहिए। पत्नी विहीन व्यक्तियों ने कोई अपराध नहीं किया है, जो उन्हें ऐसे संबोधन से नवाजा जाए, जो यहां लिखना ठीक नहीं होगा। हर एक हरियाणवी विधुर के खाते में महीने में दो हजार सात सौ पचास रुपए पेंशन जमा होगी। सावन के मौसम में पिया को तलाशती सुंदरियां नजऱ न आएं, कोई बात नहीं। प्रधानमंत्री हरियाणा सरकार की कई बार पीठ थपथपा चुके हैं। पेंशन की व्यवस्था के भरोसे जीवन बिता लेंगे। हजारों नौजवान बेरोजगार हैं। माना। 70 हजार से अधिक हरियाणवी एक अदद जीवन संगिनी की कमी का रोना रोते हैं।
अच्छे दिन की उम्मीद
जनता दल-एस के महत्वाकांक्षी देवगौड़ा पिता पुत्र से किस्मत के साथ ही कांग्रेस और भाजपा ने दूरी बना ली। दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर बनने चले देवेगौड़ा ने समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव को खास तौर पर प्रचार के लिए बुलाया था। उनकी रणनीति कर्नाटक विधानसभा चुनाव में फुस्स हो गई। विपक्ष नेताओं की बैठक में कुमारस्वामी को बुलाने का अखिलेश ने आग्रह नहीं किया। भाजपा नेता जनता दल एस को अपनी हार का कारण मानते हैं। दोनों मिलकर लड़ते तो कर्नाटक सरकार बच सकती थी। मायावती बुआजी की तरह देवेगौड़ा काका भी हित साधने के लिए लुढक़ना जानते हैं। नीतीश कुमार और राहुल गांधी पर वार कर कुमारस्वामी दांव चल चुके हैं। भाजपा का एक वर्ग जनता दल एस नेता कुमारस्वामी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद देने की सलाह दे रहा है। दांतों तले अंगुली काहे दबाते हैं? एक भूतपूर्व नेता प्रतिपक्ष महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री है। दो दो उपमुख्यमंत्री बन बैठे। बेंगलूरु से उडक़र पाला बदलने वालों को देश-मध्यप्रदेश की सत्ता मिली। कुमारस्वामी की राह में अड़ंगा बाकी है। पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा मानें, तब न बात बने।
कौन बनेगा
वो दिन याद करो। जब कोर कमेटी में सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी दहाड़ते थे। कभी-कभार वेंकैया नायडू मुंह खोलते थे। राजनाथ सिंह मौन व्रत कम ही तोड़ते थे परंतु अरुण जेटली की वकालत से बात सध जाती थी। जीवन के अंतिम दिनों में जेटली की तबीयत और दिल दोनों दुखी थे। तय यह होना है कि मिसिर जी के कारण बेहद चर्चित हो चुके ईडी के आसन पर कौन विराजमान हो? सत्ता और विपक्ष दोनों में जेटली के परम भरोसेमंद सीमांचल दास दौड़ में शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय में जिम्मेदारी निबाह चुके हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने सीमांचल सहित तीन बांकुरों की सिफारिश भेजी है। मुकाबला बहुत कड़ा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मुखिया नितिन गुप्ता सेवानिवृत्त होने वाले हैं। नागपुर में रह चुके हैं। ईडी की कुर्सी मिलने पर दो साल और काम करने का अवसर मिलेगा। सीबी डीटी के सदस्य प्रवीण कुमार होड़ में शामिल हैं। राजस्व सेवा और कारोबारियों में खुसुरपुसर जारी है कि मिसिर जी के जाने के बाद नए मिसिर जी आ सकते हैं। बहरहाल मंत्री की सूची से मिश्र गायब हैं।
(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


