विचार / लेख
प्रिय नरेन्द्र,
शुभाशीष ,
मैं आपकी सब क्रियाकलापों पर ऊपर से नजर रखता आया हूँ और मैं भी अधिकांश देशवासियों की तरह आपका कायल हो गया हूँ। आपने देश की नई संसद भवन का उद्घाटन कर तो नहीं चौंकाया क्योंकि उद्घाटन करना और चौंकाना आपकी आदत है। आपने सेन्गोल (राजदण्ड ), अखंड भारत का नक्शा और सरदार व भीमराव की फोटो लगाकर जरूर चौंका दिया। 28 मई का चुनाव भी चौंकाने वाला था कारण आप बेहतर जानते हैं। आप 2014 के बाद से ही लगातार केवल चौंका ही रहे हैं। मुझे आशंका है कि जनता भी आपको चौंका न दे।
मुझमें और आपमें काफी समानताएं हैं। हम दोनों ही वणिक बुद्धि रखते हैं। आप भी मेरी तरह जिद्दी हैं और एक बार जो कमिटमेंट कर लिया तो हम अपने आप की भी नहीं सुनते हैं। हम दोनों को ही काफी संघर्ष करना पड़ा और हमें अनगिनत गालियां भी सुननी पड़ती है। मैं आज भी आप से अधिक गालियां सुनता हूँ। भले ही आप राजघाट पर मत्था टेकते हैं पर आपके भक्त ही मुझे सबसे अधिक गालियां देते हैं। मैं भी कांग्रेस को खत्म करना चाहता था और आप तो इसके लिए कटिबद्ध हैं ही। वैसे अन्य दलों का भी कांग्रेसीकरण हो चुका है। लोकतंत्र में नेता तंत्र को ऊपर समझने लगता है परंतु लोकतंत्र में लोक, लोग यानी जनता सर्वोपरि है और वह किसी को भी बना सकती है और किसी को भी मिटा सकती है। मेरी बात सबको माननी पड़ती थी और आपकी बात भी । मेरी तरह आपको भी स्वच्छता और स्वच्छ छवि से प्रेम है।
मुझमें और आपमें कुछ असमानताएं भी हैं आपने बचपन में मगरमच्छ पकड़ लिया था पर मैं अपने पूरे जीवन काल में एक चूहा भी पकड़ नहीं सका । मैं सत्य के साथ प्रयोग करता हूं पर। मैं सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखता हूं पर। मैं केवल धोती पहनता हूं पर।
28 मई 2023 को आपने कई मुकाम हासिल किए जैसे सेन्गोल यानी राजदण्ड की स्थापना। दण्ड जरूरी है जहां दंड है वही प्रेम है- ‘भय बिन होए न प्रीति’ । लोकशाही में राजदण्ड की स्थापना एक अभिनव प्रयोग है। यह राजदण्ड भारतवर्ष के एकमात्र साम्राज्यवादी चोल वंश राज्य का राजदण्ड है। चोल राजा ने जावा सुमात्रा द्वीपों पर भी कब्जा जमाया था परंतु अखंड भारत के नक्शे से मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया गायब है। नए संसद भवन में अखंड भारत का नक्शा बताता है कि हमारे शासकों को यकीन है कि वे जनता को अनंत काल तक भरमा सकते हैं।
राजा या शासक को राजधर्म निभाना चाहिए, यह सीख आपको पूर्व में आपके सीनियर ने दी थी। आपको उस सीख का ध्यान रखना चाहिए। आपने अब राजदण्ड भी धारण कर लिया है।
आप जननायक से दंडनायक बनने की राह पर अग्रसर हैं। आपके साथियों ने दंगल में पदक जीतने वाली बेटियों को परास्त कर दंड दे दिया है। लगता है इस बार आपकी तपस्या में कमी नहीं रही और जंतर-मंतर का पंडाल छूमंतर हो गया है। अब ये पदक विजेता खिलाड़ी अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान देंगे और पदक जीतने पर आप इनसे मिल ही लेंगे। यही उम्मीद रखता हूँ कि भविष्य में संविधान की भावनाओं के अनुरूप शासन होगा। शेष फिर कभी।
आपका
बापू


