विचार / लेख

बंद तिजोरी, राजभवन में कुंजी जब्त
04-Apr-2023 3:41 PM
बंद तिजोरी, राजभवन में कुंजी जब्त

प्रकाश दुबे

साल 1948 में जिस दिन गांधी जी की हत्या हुई थी, उस दिन 2023 में हैदराबाद के राजभवन में तेलंगाना के विधानकार्य मंत्री चुनिंदा अधिकारियों के साथ राजभवन पहुंचे। राज्यपाल तमिलसई सुंदरराजन से बजट प्रस्तावों को मंजूरी देने में अब और विलम्ब न करने का आग्रह किया। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा था-हम कहां आड़े आते हैं? सरकार और राज्यपाल के वकीलों ने आपस में निबटारा करने का आश्वासन दिया था। दो महीने बाद राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दस्तक दी। बजट 14 सितम्बर 2022 को पारित हुआ। तेलंगाना सरकार के वकील दुष्यंत दवे ने अदालत को बताया कि राजभवन में धूल खाती फाइलों पर राज्यपाल ने फैसला नहीं किया। तेलंगाना में राज्य सरकार विरुद्ध राज्यपाल मैच में तुषार मेहता राज्यपाल की चुप्पी की वकालत कर रहे हैं। 10 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ के सामने हाजिर होकर राज्यपाल का पक्ष बताएंगे। एक अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाने और नया वित्त वर्ष शुरु करने का रिवाज रहा है।

 फटकार में छुपा कारोबार

किसी की फजीहत होते देखकर दिल बाग बाग हो जाता है। अगर पता लगे कि संसद की रेलवे से संबंधित स्थायी समिति ने फटकार लगाते हुए कहा कि रेलवे ने साल 2021-22 में 15 हजार करोड़ कम कमाए। कोरोना महामारी का जिक्र करने वालों को कमेटी ने लताडऩे में नहीं बख्शा। साल 2014-15 का अपवाद छोडक़र यही हाल है। वित्तमंत्री की वाहवाही। उन्होंने बजट में भारी रकम दी। रेल महकमे की गाड़ी पता नहीं कहां अटक गई? समिति ने भरपाई के सुझाव दिए-गाडिय़ों में विज्ञापन लगाकर कमाई करें। एटीएम लगाएं। रेलवे की खाली जगह को ठिकाने लगा दिया जाए। इस मासूम सिफारिश पर खुशी जतलाने में आप यात्री और हम हमसफर हैं। हवाई अड्?डों को सुधारने के लिए बोली लगती है तो रेलवे की खाली जगह की क्यों नहीं? जमीन बिक्री की पहल रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने नहीं की। रेलवे की स्थायी समिति में सभी दलों के संसद सदस्य शामिल हैं। केन्द्रीय कृषि मंत्री रह चुके अध्यक्ष राधा मोहन सिंह खाली जगह पर फसल उगाना जानते होंगे। फसल काटने में खरीदार माहिर हैं। रेलवे की जमीन पर खरीदारों की नजऱ है।

हरा भरा यह देस

देश के सबसे उपेक्षित इलाकों की सूची में निकोबार द्वीप को ऊंचाई पर रखने वाले सावधान। देश की सरकार ने भारत का अपना सिंगापुर उभारने की सौगंध खा ली है। काम शुरु कर दिया। हरी धरती के पैरोकार लाल पीले हो रहे हैं। 24 बरस पहले 1989 में द्वीप को जैवविविधता के लिए आरक्षित कर दिया गया था। नौ सौ वर्ग किलोमीटर में फैले द्वीप के पेड़-पौधों-जीवों को नुकसान के प्रभाव का आकलन करने वाली समिति ने तुरंत ध्यान दिया। निकोबार का सर्वांगीण विकास कर नया सिंगापुर रचने के लिए सत्तर हजार करोड़ की योजना पर पर्यावरण मंत्रालय मुहर लगा चुका है। जी-20 में पर्यावरण को प्राथमिकता मिलने से मुदित मंत्री भूपेन्द्र यादव रपट से खुश हैं। रिपोर्ट में भरोसा दिलाया गया है कि पौधों की संख्या कम नहीं होने दी जाएगी। सिंगापुर संवारने में जितने पौधे कुचले जाएंगे, उतने अन्यत्र लगाएंगे। अन्यत्र मतलब मध्यप्रदेश या हरियाणा में। हरे भरे मध्यप्रदेश को वन बहुल होने का बहुत फायदा है। निकोबार के सर्वांगीण विकास के लिए रकम और धरती को हरा भरा रखने के लिए मध्य प्रदेश को अनमोल पौधे।

मां तुझे प्रणाम

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष प्राध्यापक शीतला प्रसाद दुबे पर पुरानी कहावत कुछ बदलाव के साथ चरितार्थ हुई। अच्छा शिक्षक और लेखक बनने में जिस मां का अमोल योगदान रहा, वे असार संसार को छोडक़र चली गईं। दुखों का पहाड़ टूटा। शीतला जी मां के अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए। अकादमी के पुरस्कार समारोह में उनकी और भारतीय भाषाओं का महकमा संभालने वाले कुछ मान्यवरों की गैरमौजूदगी की चर्चा जारी रही। एक ही दिन लगभग एक ही समय दूबे जी की तीन स्थानों पर मौजूदगी के निमंत्रण छपे। निमंत्रितों की अनुपस्थिति की जानकारी देना या न देना आयोजकों का निर्णय है। कार्याघ्यक्ष की मां के निधन की अकादमी के समारोह में श्रद्धांजलि और सूचना देने में हिचक रही। मां भारती के प्रति आदर और हिंदी सेवी की मां के प्रति श्रद्धा के दो शब्द-सुमन चढ़ाने में भास्करवारी में कोताही नहीं बरती जा सकती।

  (लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


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