विचार / लेख
26 मार्च को बस्तर गोलीकांड की खबर पूरे देश भर में आग की तरह फैल चुकी थी। पूरा देश इस खबर को सुनकर स्तब्ध था। किसी को इस पर विश्वास नहीं हो रहा था कि बस्तर के संत की तरह महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव को मार डाला गया है।
देश भर में केवल एक ही चर्चा हो रही थी बस्तर के लोकप्रिय महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव पुलिस की गोलियों के शिकार हुए हैं।
बस्तर महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की क्रूर हत्या को लेकर 27 मार्च को पूरा जगदलपुर शहर जैसे शोक में डूब गया था।
शहर की एक भी दुकान उस दिन नहीं खुली थी। सड़कें वीरान थी, चौक-चौराहे सूने थे। यहां तक की रिक्शे वालों ने भी उस दिन अपना रिक्शा चलाना बंद रखा था।
बद्री विशाल पित्ती के कुशल संपादन में हैदराबाद से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ' कल्पना ’ में एक विशेष टिप्पणी के साथ दुष्यंत कुमार की एक कविता ' ईश्वर को सूली '
(बस्तर गोलीकांड पर एक प्रतिक्रिया) प्रकाशित की गई जिसकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार है :
"ईश्वर उस आदिवासी ईश्वर पर रहम करें
सत्ता के लंबे नाखूनों ने जिसका जिस्म नोच लिया
घुटनों पर झुका हुआ भक्त
अब क्या
उस निरंकुशता को माथा टेकेगा
जिसने
भक्तों के साथ प्रभु को सूली पर चढ़ा दिया ”
बस्तर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार
लाला जगदलपुरी की एक कविता 'दंडकारण्य समाचार ' में प्रकाशित हुई। जिसका शीर्षक था 'प्रशासक बन गए ऐसे कसाई, अहिंसा तिलमिलाई छटपटाई’। इसकी प्रारंभिक पंक्तियां इस तरह हैं :

"दुखी मनुष्यत्व के वे पहरुवे थे
प्रताड़ित स्वत्व के वे पहरूवे थे
अनाहत सत्य के वे पहरुवे थे
अकल्पित तथ्य के वे पहरुवे थे
हृदय की दृष्टि के आदर्श थे वे
प्रकृति की सृष्टि के आदर्श थे वे..
प्रशासक बन गए ऐसे कसाई
अहिंसा तिमिलाई छटपटाई
विगत शासक प्रवीर उदार दानी
बहादुर कष्ट दर्शी स्वाभिमानी
कि जो थे नयनतारे आदिमों के
कि जो थे प्राण प्यारे आदिमो के
रुधिर उनका बहाया गोलियों से
उन्हें छलनी बनाया गोलियों से
फकत अन्याय पर था रोष उनका
नहीं था और कोई दोष उनका...
उन्हें बागी कहा लांछन लगाया
उन्हें दागी कहा लांछन लगाया
बहुत विश्वास था परमात्मा पर
करारी चोट बैठी आत्मा पर
उन्हें खोकर बहुत व्याकुल चमन है
उन्हें श्रद्धा सहित मेरा नमन है ”
31 मार्च को महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव के अनुज विजय चंद्र भंजदेव ने एक लिखित बयान जारी किया जिसमें उन्होंने अपने भाई की मृत्यु की न्यायिक जांच करवाए जाने की मांग करते हुए कहा :
" मेरे पूज्य बड़े भाई श्रद्धेय श्री प्रवीर चंद्र भंजदेव भूतपूर्व महाराजा बस्तर की गोलीकांड में हुई दुखद मृत्यु के समाचार से मुझे ममित्व पीड़ा हुई। जानकारी मिलते ही हम लोग अपने पुराने राजमहल पहुंचे और वहां भूतपूर्व महाराजा प्रवीर चंद्र के अंतिम दर्शन किए। अंत्येष्टि क्रिया के लिए उनकी लाश मुझे अधिकारियों द्वारा दी गई और मैंने अपने परिवार की परंपरा के अनुसार स्वर्गीय बड़े भाई की अंत्येष्टि क्रिया का भी प्रबंध किया। मैं तथा मेरे परिवार के लोग शोकाकुल थे। यह कहना कि मैंने यह प्रतिज्ञा की है कि मैं अपने भाई की मृत्यु का बदला लूंगा। एकदम गलत है। मैंने यह अवश्य कहा था कि मेरे स्वर्गीय बड़े भाई की मृत्यु के कारणों की न्यायालीन जांच करवाई जाए। ”
अगर महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के अनुज विजय चंद्र भंजदेव बस्तर गोली कांड की न्यायालीन जांच की मांग नहीं करते तब भी शासन खानापूर्ति के नाम पर यह सब जरूर करती।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के.एल.पांडेय की सिंगल इंक्वारी कमीशन को बस्तर गोलीकांड की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
न्यायविद कन्हैया लाल पांडेय की सिंगल इंक्वारी कमीशन की जांच के दौरान अनेक तथ्यों का खुलासा हुआ। रहस्य के अनेक आवरणों से पर्दा भी उठा।
शेष अगले सप्ताह...


