विचार / लेख
-जेके कर
आज 1 फरवरी 2022 को साल 2022-2023 के लिये पेश केन्द्रीय बज़ट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिये महज 80 करोड़ रुपयों की बढ़ोतरी की गई है. इससे स्पष्ट हो जाता है कि जन-स्वास्थ्य सरकारी एजेंडे में बहुत नीचे की ओर है. हां, कोरोनाकाल में पिछले साल 82920.65 करोड़ रुपये खर्च किये गये जो उसके पिछले साल के 71268.77 करोड़ रुपयों से 11651.88 करोड़ रुपये ज्यादा था. इस बार उम्मीद की जा रही थी कि स्वास्थ्य क्षेत्र के केन्द्रीय बजट को और बढ़ाया जायेगा लेकिन वैसा नहीं हुआ.
यदि इसके थोड़े विस्तार में जायेंगे तो पता चलता है कि Revised Estimates 2021-2022 की तुलना में Budget Estimates 2022-2023 में Central Sector Schemes/Projects में पिछले साल 14223.31 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे जिसे बढ़ाकर 15163.22 करोड़ रुपये कर दिया गया है. वहीं Centrally Sponsored Schemes में पिछले साल 50591.14 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे जिसे घटाकर 47634.07 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसी तरह से Establishment Expenditure of the Centre को 6000.47 करोड़ रुपयों से बढ़ाकर 6856.73 करोड़ रुपये का कर दिया गया है. Other Central Sector Expenditure में भी 12105.73 करोड़ रुपये को बढ़ाकर 13345.98 करोड़ रुपये का कर दिया गया है.
कुलमिलाकर आज पेश केन्द्रीय बज़ट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिये महज 80 करोड़ रुपयों की बढ़ोतरी की गई है.
अब Department of Health Research पर भी एक नज़र डाल लेते हैं. इसमें कोरोना जैसी महामारी के बावजूद केवल 120.65 करोड़ रुपयों की बढ़ोतरी की गई है.
हालांकि, कल पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि केन्द्र और राज्य सरकारों का स्वास्थ्य क्षेत्र पर बजटीय व्यय 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद का 2.1 प्रतिशत हो गया, जोकि 2019-20 में 1.3 प्रतिशत था.
यहां पर इस बात का उल्लेख करना गलत न होगा कि ‘कोविड-19 महामारी का प्रकोप और इसका प्रबंधन' पर संसदीय समिति की पहली रिपोर्ट है में कहा गया था कि 2 साल के भीतर जीडीपी के 2.5 % तक के खर्च के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये निरंतर प्रयास करें. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में 2025 तक जीडीपी का 2.5% स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च का लक्ष्य रखा गया है.
अब सवाल किया जाना चाहिये कि केन्द्रीय बज़ट में मात्र 80 करोड़ रुपयों की बढ़ोतरी करके स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद का 2.1फीसदी से 2.5 फीसदी तक पहुंचा जा सकता है? वैसे भारत जैसे देश में लोक कल्याणकारी सरकारों (केन्द्र + राज्य) को 6 फीसदी तक अपने सकल घरेलू उत्पादन का खर्च करना चाहिये. तभी माना जायेगा कि जन-स्वास्थ्य के लिये कुछ किया जा रहा है वर्ना कोरोनाकाल में खर्च बढ़ाना तो मजबूरी है.
Department of Health and Family Welfare Department of Health Research
Actuals 2020-2021- 77569.33......................3124.59
Budget Estimates 2021-2022 - 71268.77......................2663.00
Revised Estimates 2021-2022- 82920.65......................3080.00
Budget Estimates 2022-2023- 83000.00......................3200.65
(SOURCE- Expenditure Profile 2022-2023)


