विचार / लेख

एम्स से भी चिकित्सा विशेषज्ञों का प्राइवेट अस्पतालों में पलायन...
20-Jan-2022 11:39 AM
एम्स से भी चिकित्सा विशेषज्ञों का प्राइवेट अस्पतालों में पलायन...

-पुरनेन्दु शुक्ला

सरकार को तदर्थ रवैया छोड़ गंभीरता से विचार करना होगा...

जिन कारणों से बीएमएचआरसी (Govt. Bhopal Memorial Hospital & Research Center) में चिकित्सा विशेषज्ञों का टोटा पड़ गया कमोवेश वहीं स्थितियां भोपाल के अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थान में भी बन रहीं है। कल की खबर के मुताबिक दिल का दौरा पडऩे के बाद जब उसे एम्स ले जाया गया तो उसे इसलिए वहां से लौटा दिया गया चूंकि वहां कोई कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं था।

सच में यह बड़े शर्म की बात है कि सरकार ढाई-तीन हजार करोड़ का अस्पताल पर खर्च करने के बाद भी आम लोगों को ऐसी जरूरी चिकित्सा सेवा तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहीं है और मरीजों को प्रायवेट अस्पताल की ओर धकेल रहीं है। ऐसे में उन मरीजों के लिए जीवन मरण का बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है जो महंगे प्रायवेट अस्पतालों में उपचार कराने में समर्थ नहीं है।

सरकार और जिम्मेदार चिकित्सा अधिकारियों को सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अस्पताल छोड़ कर जाने से पैदा हुई स्थिति पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। अभी तो एक कार्डियोलॉजिस्ट और एक न्यूरोलॉजिस्ट ने इस्तीफा दिया है और जल्दी ही कुछ और विशेषज्ञों के भी जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ऐसी स्थितियां न बने इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को अपने यहाँ कार्य का माहौल सुधारने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

यह समझ में नहीं आता कि सरकार पूर्णकालिक डायरेक्टर की नियुक्ति में इतनी देर क्यों लगाती है? उसके अलावा सुपरस्पेशलिटी की डीएम,एमसीएच आदि डिग्रीधारी चिकित्सकों को रिटेन करने के लिए विशेष इन्सेंटिव देना ही पड़ेगा अन्यथा शहर के ही कई बड़े अस्पताल ज्यादा सेलरी और लुभावने पैकेज के साथ इनका स्वागत करने के लिए तैयार ही बैठे हैं। यदि क्चरू॥क्रष्ट और एम्स से चिकित्सकों का पलायन होगा तो सबसे ज्यादा खामियाजा आम मरीजों को ही भुगतना पड़ता है।

जिम्मेदार अधिकारी तो पल्ला झाड़ लेते हैं उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।


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