विचार / लेख

गांधी हिंदू विरोधी थे तब क्यों अंग्रेजों को गीता की व्यख्या कर समझाते थे
28-Dec-2021 1:42 PM
गांधी हिंदू विरोधी थे तब क्यों अंग्रेजों को गीता की व्यख्या कर समझाते थे

-संजीव गुप्ता


क्या आपने कालीचरण महाराज के नए वीडियो को देखा है। इस वीडियो में उन्होंने अपने बयान के पक्षों में जो दलील दी है उन दलीलों को फेसबुक और वाट्सअप यूनिवर्सिटी के माध्यम से हम हजारों बार देख, पढ़ और सुन चुके होंगे। यह वही दलील है जो कुछ दिनों में रह-रहकर हमारे सामने आ जाते हैं कि ज्यादा वोट मिलने के बावजूद सरदार पटेल की जगह नेहरू को प्रधानमंत्री बना दिया गया। बंटवारे के लिए गांधी दोषी हैं (जिन्ना को तो जैसे क्लीनचिट दे दी गई है)। भगत सिंह की फांसी के लिए गांधी दोषी हैं। गांधी हिंदुओं के साथ सौतेला व्यवहार करते थे। और न जाने क्या-क्या।

क्या आपने कभी वाट्सअप यूनिवर्सिटी के इन दलीलों की जांच करने की कोशिश की है। क्या आपने कभी उस समय की मौजूदा परिस्थितियों के बारे में सोचने के लिए कुछ पल भी लिया है। हममें से कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने ऐसे मैसेज को बिना सोचे फारवर्ड कर दिया होगा।
यह करोड़ों का वर्ष का भारत है और उतना ही पुराना सनातन धर्म है। इस देश पर कई आक्रांताओं ने हमला किया। सैकड़ों आए और चले गए। क्या हमारा धर्म नष्ट हुआ। क्या प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर निरंतर चलता हुआ सनातन धर्म इतनी आसानी से नष्ट हो सकता है।
यदि गांधी हिंदू धर्म के विरोधी थे तब क्यों लंदन में एक चिकित्सक के कहने पर भी उन्होंने बीफ-टी (गौमांस मिश्रित चाय) पीने से मना कर दिया। चिकित्सक ने कहा था कि  ‘तुम बीफ टी पियो या मर जाओ।’ तब गांधी का जवाब था ‘अगर यह ईश्वर की इच्छा है कि मंै मर जाऊँ तब मुझे मरना ही पड़ेगा, लेकिन मंै इस बात के प्रति निश्चित हूं कि ये कतई ईश्वर की इच्छा नहीं होगी कि जो वादे मैंने मां के सामने भारत छोडऩे से पहले किए थे, उन्हें तोड़ दूं।’

यदि गांधी हिंदू विरोधी थे तब क्यों वह अपने अंग्रेज मित्रों को गीता की व्यख्या कर समझाते थे।

क्यों इतनी कटुता से भर रहे हैं हम लोग। क्यों जो कुछ भी कोई लिख देता है या कह देता है, हम उसके पीछे भागने लगते हैं। क्यों हम उस विवेक का इस्तेमाल नहीं करते, जो ईश्वर ने सिर्फ मनुष्यों को दिया है।
सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और अपने धर्म की रक्षा करने का भी अधिकार है। लेकिन इससे पहले धर्म क्या है वह तो समझ जाएं।
और हां, सबसे पहले अपने धर्म ग्रंथ में क्या लिखा है वह अच्छे से पढ़ लें और समझ लें।
 इससे आप कोई कम पढ़े-लिखे लोगों के चक्कर में फंसकर अपना समय नष्ट नहीं करेंगे।

 


अन्य पोस्ट