विचार / लेख
-प्रकाश दुबे
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय की मुक्केबाजी के लिए टोक्यो जाने या टीवी खोलने की तकलीफ न करें। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार को खास अंदाज में आड़े हाथों लिया था-दीदी ओ दीदी, किसानों तक सम्मान निधि का पैसा भी नहीं बंटने देतीं। सरकार बनने के बाद शोभनदेव का जवाबी पंच-44 लाख 48 हजार नाम भेजे थे। उनमें से साढ़े नौ लाख नाम अटका दिए। केन्द्र सरकार का अगला पंच-सूची में शामिल किसान सुपात्र हैं या नहीं? हमने इस बात की पड़ताल करने का आदेश जारी किया है। कृषि मंत्रियों की मुक्केबाजी है, सो जबड़ा मंत्री का मार खाएगा। प्रधानमंत्री के भक्तजन और मुख्यमंत्री और बाउल गायक अपने अपने आराध्य के गाल सहलाएंगे। विशेष सूचना- टोक्यो ओलम्पिक के बाद भी खेल जारी रहेगा।
सेल्फ गोल
खेल की दुनिया में अपने पर गोल करने जैसा अपराध कोई दूसरा नहीं। इस पाप को धोने के तरीके पर चक दे इंडिया फिल्म बनी। शिक्षा मंत्रालय के नए खिलाड़ी ने न ओलम्पिक से सबक लिया और न फिल्म से। इतना बड़ा महकमा संभाल रहे हैं। इसके बावजूद केन्द्रीय विद्यालय में ग्यारहवें विद्यार्थी को दाखिला नहीं दिला सकते। दस दाखिलों का अधिकार भी सांसद होने के कारण मिला है। प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के खाते से कानूनन एक भी बच्चे का प्रवेश संभव नहीं। मंत्री, विधायक आदि तरह तरह का कोटा समाप्त करने के आदेश जारी हो चुके हैं। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद अर्जुन सिंह ने सांसदों सहित कई लोगों को दाखिले का विशेषाधिकार देकर लुभाने का प्रयास किया था। अर्जुन सिंह सांसदों का प्रधानमंत्री बनने लायक बहुमत नहीं जुटा सके। सच यह भी है कि समर्थ की तुलना में गरीब बच्चे दाखिला-कोटा का क्वचित फायदा उठा पाए। कुछ पाठशालाएं खुलीं। कुछ खुलने वाली हैं। कहोगे-स्कूल चले तुम? मंत्री कहेंगे-दाखिला न दे सकेंगे।
देश की धरती सोना उगले
भारत के कई खिलाड़ी कंगाली और दुश्वारी के बावजूद कमाल करने में कामयाब रहे। उन्हें बधाई देते हुए बता दें कि भारत में भगवान के घर भी कडक़ी आती है। तिरुपति के बालाजी बरस में एक बार पत्नी महालक्ष्मी कोल्हापुरे (कोल्हापुरवासिनी) का कर्ज चुकाते हैं। सबरीमाला में विराजमान अयप्पा स्वामी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। विष्णु के मोहिनी रूप से मोहित शिव के पुत्र हरिहर यानी अयप्पा बचपन में राजपाट छोडक़र वन चले गए। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पंडालम राजमहल से अय्यप्पा के आभूषणों को संदूकों में रखकर एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। नब्बे किलोमीटर की यात्रा तय करके तीन दिन में सबरीमाला पहुंचती है। मकर संक्रांति दूर है। महामारी के कारण अयप्पा देवस्थान छह अरब रुपए के घाटे में है। देवस्थान वालों ने भगवान के बजाय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन, पेट्रोलियम, रेल आदि महकमों के मंत्रियों वाला शार्ट कट अपनाया। इसे श्रद्धालु जनता पर भाला फेंक दांव का प्रयोग कह सकते हैं। देवस्थानम ने प्रसादम का दाम बढ़ाने का फैसला कर लिया।
मैत्री-मेडल की सेनाबांट
ओलम्पिक खेलों के दौरान कई मार्मिक कहानियां बेपरत हुईं। स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी ने निर्णायक से पूछा-घायल पराजित प्रतिद्वंद्वी और मैं दोनों स्वर्ण पदक में हिस्सेदारी कर सकते हैं? उसने हामी भरी। खेल की अलग अंदाज़ वाली दिलचस्प कहानी की परतें हम खोले देते हैं। चीन ने कब्जा कितनी जमीन पर छोड़ा, कहां डटा है, सरकार जाने। एक अगस्त को सिक्किम में चीन सीमा पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने जन्मदिन का जश्न मनाया। चीन के कब्जे से पहले यह तिब्बत-भारत सीमा कहलाती थी। भारत-चीन के कमांडरों ने मिलकर उत्सव मनाया। उपहार के तौर पर दोनों देशों के बीच हाटलाइन शुरु हुई। अनोखी ओलंपिक भावना से गलवान घाटी की शहादत याद करने वाले प्रफुल्लित होंगे। जीत-हार चलती रहती है। बीस लाख सैनिक वाली चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के 94 वें जन्मदिन समारोह की जानकारी भारत की सेनाओं के सभापति (चीफ आफ डिफेंस स्टाफ) जनरल बिपिन रावत को रही होगी।
(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


