सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिश्रामपुर, 13 मई। संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) के नेतृत्व में लंबे समय से चल रही कानूनी एवं संगठनात्मक लड़ाई आखिरकार सफल रही। रेहर भूमिगत खदान के सेवानिवृत्त कर्मचारी सुबरन राम की वर्ष 2012 से बंद पड़ी पेंशन 14 साल बाद बहाल कर दी गई है। साथ ही विभाग द्वारा उनके खाते में 7 लाख 34 हजार 784 रुपए की एरियर्स राशि भी जमा कराई गई है।
जानकारी के अनुसार सुबरन राम 30 सितंबर 2011 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद मार्च 2012 तक उन्हें पेंशन मिली, लेकिन इसके बाद उनकी पेंशन अचानक बंद कर दी गई थी। लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं होने पर संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) ने इस मामले को गंभीरता से उठाया और लगातार संघर्ष किया।
बताया गया कि पीडि़त कर्मचारी द्वारा 14 मई से महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दिए जाने के बाद विभाग और प्रबंधन हरकत में आया। इसके बाद सीएमपीएफ जबलपुर द्वारा 12 मई को पेंशन डेटा का माइग्रेशन और सेटलमेंट पूरा करते हुए पेंशन बहाली की प्रक्रिया पूर्ण की गई।
विभाग ने सुबरन राम के खाते में 7,34,784 रुपए की एरियर राशि जमा कर दी है, वहीं उनकी मासिक पेंशन 5,696 रुपए भी तत्काल प्रभाव से पुन: शुरू कर दी गई है।
विभाग और एसईसीएल प्रबंधन की सकारात्मक पहल के बाद सुबरन राम ने प्रस्तावित आमरण अनशन स्थगित कर दिया है। उन्होंने इस संबंध में एसडीएम सूरजपुर को लिखित आभार पत्र भी सौंपा है।
संघ के क्षेत्रीय सचिव पंकज कुमार गर्ग ने इसे मजदूर एकता और निरंतर संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि एसकेएमएस (एटक) भविष्य में भी श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहेगा।


