सरगुजा
अंबिकापुर, 30 मार्च। जैन धर्म का प्रमुख पर्व महावीर जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिवस भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के रूप में विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना, अभिषेक और शोभायात्राओं का आयोजन किया जाता है तथा दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं।
डॉ. अलका जैन ने बताया कि भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व कुंडलपुर में हुआ था। युवावस्था में उन्होंने राजसी जीवन त्यागकर तप और साधना का मार्ग अपनाया तथा कठोर साधना के बाद कैवल्य ज्ञान प्राप्त कर मानवता को अहिंसा, सत्य और आत्मसंयम का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि महावीर स्वामी के उपदेश—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—आज भी प्रासंगिक हैं। वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा और स्वार्थ के बीच उनका संदेश समाज को शांति, प्रेम और सद्भाव की दिशा देता है।
महावीर जयंती केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता को सही मार्ग दिखाने वाला प्रेरणादायक दिवस है, जो सभी को दया, करुणा और नैतिक मूल्यों को अपनाने की सीख देता है।


