सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 23 मार्च। विभिन्न जनहित मुद्दों को लेकर सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति ने सोमवार को नगर पालिका निगम का घेराव किया। समिति के सदस्य डॉ. अमृत मरावी और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता निगम कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था और निगम के दोनों ओर की सडक़ों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान समिति ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत सुभाषनगर में बनाए गए 493 आवासों के कथित अनियमित आवंटन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। समिति का कहना है कि योजना के मोर मकान-मोर चिन्हारी घटक के तहत आवासों का आवंटन पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया और बाहरी राज्यों के लोगों को नियमों के विरुद्ध लाभ पहुंचाया जा रहा है।
समिति ने आरोप लगाया कि 7 जनवरी 2026 को बिना किसी पूर्व सूचना और प्रचार-प्रसार के 67 हितग्राहियों को कथित रूप से लॉटरी पद्धति से आवास आवंटित किए गए। जबकि वास्तविकता में किसी प्रकार की पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और न ही इसका कोई फोटो या वीडियो सार्वजनिक किया गया। इससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत होती है। साथ ही यह भी आरोप है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अवैध रूप से धन लेकर आवंटन में अनियमितताएं की गईं।
समिति ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा कि यहां बाहरी व्यक्तियों को बसाना संविधान की भावना के विपरीत है और इससे स्थानीय आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने मांग की कि आवंटन प्रक्रिया को निरस्त कर पुन: पारदर्शी तरीके से केवल स्थानीय मूलनिवासियों को प्राथमिकता दी जाए।
इसके अलावा, प्रतिक्षा बस स्टैंड परिसर में निर्मित दुकानों के आवंटन में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। समिति का कहना है कि पात्र स्थानीय निवासियों को दरकिनार कर अपात्र व्यक्तियों को लाभ दिया गया, जो प्रशासनिक पारदर्शिता के विपरीत है। इस मामले में स्वतंत्र जांच समिति गठित कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
इसी क्रम में समिति के इंजीनियर अमित कुमार मिंज ने निगम के एक सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मचारी और उसके परिवार के सदस्यों ने विभिन्न आवास योजनाओं का नियमों के विरुद्ध लाभ उठाया है। साथ ही आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आम नागरिकों से आवंटन के नाम पर अवैध धन की मांग और वसूली की जा रही है।
समिति ने यह भी बताया कि पूर्व में 3 नवंबर 2025 को राज्य शहरी विकास विभाग को शिकायत पत्र सौंपा गया था, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और निम्न गुणवत्ता के कार्यों की जांच की मांग की गई थी। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसे प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए समिति ने आरोप लगाया कि इससे भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है।
समिति ने निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच शुरू कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो व्यापक जनआंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
ये रही प्रमुख मांगें
7 जनवरी 2026 को किए गए आवास आवंटन को तत्काल निरस्त किया जाए.पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए.दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो.केवल स्थानीय मूलनिवासियों को पारदर्शी प्रक्रिया से आवास दिए जाएं।


