सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,18 अप्रैल। अंबिकापुर नगर के राजीव भवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने कहा कि महिला आरक्षण जो 2023 में सभी के सहमति से जो पारित हुआ है, उसे केंद्र सरकार तत्काल लागू करें।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बाल कृष्ण पाठक, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष सफी अहमद, अजय अग्रवाल, सीमा सोनी, अनूप मेहता, सहित अन्य मौजूद थे। श्री सिंह देव ने कहा कि महिला विरोधी कौन है, देश की जनता जानती है। कांग्रेस के सहयोग से 2023 में महिला आरक्षण बिल को सरकार ने पारित किया, लेकिन इसको लागू करने में जनगणना का शर्त लगा दिया और 2026 के जनगणना के बाद इसे लागू करने को कहा। लेकिन अब बिना जनगणना के महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन का खेल खेलने लग गए।
इस बिल को लेकर सिंह देव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को जहां जहां सूट करता है, वहां इस बिल के माध्यम से सीट बढ़ाना चाहती थी और जो नुकसान के क्षेत्र थे, वहां सीट काम करना चाहती थी। उनका इरादा 92 लोकसभा सीटों में खेला करने का था, जिसे राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने विफल कर दिया। श्री सिंहदेव ने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के आंचल के पीछे छिपकर कुचक्र को थोपना चाह रहे थे, जो कामयाब नहीं हुआ।
टी.एस. सिंहदेव ने आगे महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण की हमेशा से समर्थक रही है, अगर भाजपा महिला आरक्षण बिल की समर्थक है तो तत्काल 2023 में पारित बिल को लोकसभा के 543 सीटों के संदर्भ में लागू कर 179 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम 2023 के समर्थन में है, सरकार इसे तत्काल लागू करे।
सिंहदेव ने कहा कि हालिया घटनाक्रम लोकतंत्र की बड़ी जीत है और विपक्षी एकता की सफलता सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविक मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल का मुख्य विषय परिसीमन से जुड़ा हुआ है। वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा सीटों पर ही लागू किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ शीघ्र महिलाओं को मिल सके। सिंहदेव ने दोहराया कि कांग्रेस वर्ष 2023 के पुराने प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए तैयार है।
सिंहदेव ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बिल का मसौदा एक दिन पहले सार्वजनिक किया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्टता और पारदर्शिता के साथ आगे बढऩा चाहिए, ताकि महिला आरक्षण का लाभ जल्द से जल्द लागू हो सके।


