सरगुजा
विशेष संरक्षित जनजाति की 6 माह की बच्ची की मौत
लखनपुर/सरगुजा, 5 जनवरी। सरगुजा जिले के लुंड्रा विधानसभा क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुन्नी में विशेष संरक्षित जनजाति की छह माह की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का कहना है कि समय पर उपचार और एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने के कारण बच्ची को बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद सीएचसी में उपलब्ध चिकित्सकीय सेवाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम लब्जी, कुर्मेनपारा निवासी संत राम श्रोता मझवार की छह माह की पुत्री अमीषा मझवार दो दिनों से बीमार थी और दूध नहीं पी रही थी। परिजन 27 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 10 बजे बच्ची को उपचार के लिए सीएचसी कुन्नी लेकर पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि उस समय ड्यूटी डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि लगभग दो घंटे तक इंतजार के बावजूद इलाज शुरू नहीं हो सका और एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाई।
परिजनों के अनुसार इसके बाद वे बच्ची को एक निजी क्लीनिक लेकर गए, जहां से उसे अंबिकापुर रेफर किया गया। बाद में सीएचसी कुन्नी से एंबुलेंस के माध्यम से बच्ची को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सीएचसी कुन्नी में पदस्थ डॉ. देव कुमार साहू ने बताया कि निजी कारणों से वे उस दिन अस्पताल नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने फोन पर स्टाफ को आवश्यक निर्देश दिए थे और अकेले डॉक्टर होने के कारण कार्य संचालन में कठिनाइयां आती हैं।
सीएचसी प्रभारी भी थे छुट्टी पर
सीएचसी प्रभारी आरएमए विनोद भार्गव ने कहा कि वे उस दिन अवकाश पर थे और उन्हें घटना की तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।
एक डॉक्टर और तीन नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल
स्थानीय स्तर पर यह बताया जा रहा है कि कुछ माह पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया है। वर्तमान में यहां एक डॉक्टर और तीन स्टाफ नर्स के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण कई मरीजों को अन्य केंद्रों में रेफर किया जाता है।
अधिकारियों को दी गई सूचना
स्थानीय मीडिया कर्मियों द्वारा उसी दिन लखनपुर बीएमओ डॉ. ओ.पी. प्रसाद को सीएचसी कुन्नी में डॉक्टर और एंबुलेंस की उपलब्धता को लेकर जानकारी दी गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता का असर क्षेत्र के गरीब और आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई जांच के बाद स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।


