सरगुजा
अपर कलेक्टर ने कहा जनसुनवाई का निर्णय गुण-दोष के आधार पर होता है
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 1 दिसंबर। सरगुजा जिला के मैनपाट में कंडराजा में बाक्साइट उत्खनन के लिए 135 हेक्टेयर भूमि लीज पर दिए जाने को लेकर जनसुनवाई भारी विरोध और हंगामे के बीच संपन्न हुई। 95 फीसदी लोगों ने बाक्साइट खदान को लेकर असहमति जताई है।
जनसुनवाई की अध्यक्षता कर रहे अपर कलेक्टर सुनील नायक ने कहा कि जनसुनवाई में 112 लोगों ने अभिमत दिया है। जनसुनवाई का निर्णय गुण-दोष के आधार पर होता है। यह बहुमत वाली कार्रवाई नहीं है। सभी औपचारिकता पूर्ण करने के बाद सुनवाई की गई है।
गौरतलब है कि मैनपाट के कंडराजा में बाक्साइट उत्खनन के लिए 135 हेक्टेयर भूमि की लीज मां कुदरगढ़ी एलुमिना लिमिटेड कंपनी को दी गई है। 30 नवंबर को नर्मदापुर में जनसुनवाई आयोजित हुई थी, जिसमें स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया था।
ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप टेंट पंडाल भी उखाड़ दिए थे,हंगामे को देखते हुए पुलिस बल को तैनात किया गया था। जनसुनवाई में कुल 112 लोगों ने अपना अभिमत रखा। इनमें से 102 लोगों ने मौखिक और 12 लोगों ने लिखित में अपना पक्ष रखा। मौखिक में अभिमत देने वालों में 95 प्रतिशत लोगों ने खदान के विरोध में अभिमत दिया।
जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कंडराजा हाथी प्रभावित क्षेत्र है। इसके साथ ही कंडराजा से छोटे नालों-नदियों का उद्गम होता है, जिनका अस्तित्व बाक्साइट खनन से खतरे में है। हाथी प्रभावित क्षेत्र में नए खदान से हाथी ज्यादा आक्रामक हो जाएंगे।
पूर्व मंत्री अमरजीत ने कहा खदानों से सिर्फ विनाश
जनसुनवाई में पहुंचे पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि मैनपाट में खदानों के खुलने से सिर्फ विनाश हुआ है। मैनपाट की पहचान पर्यटन से है। मैनपाट में पर्यटन की गतिविधियां बढ़ी हैं। पूर्व में बाल्को ने मैनपाट में बाक्साइट का वर्षों तक दोहन किया, लेकिन मैनपाट को गड्ढों के अलावे कुछ भी हासिल नहीं हुआ। बाक्साइट के उत्खनन से सिर्फ नुकसान हुआ है, फायदा कुछ भी नहीं हुआ,लोगों का भी सिर्फ शोषण ही हुआ है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को खनन कंपनियों पर भरोसा नहीं है। अब तक मैनपाट में बाक्साइट खदानें संचालित हैं जो निजी कंपनियों द्वारा चलाई जा रही हैं।मैनपाट में अब निजी कंपनियां मनमाने तरीके से उत्खनन करती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनसे कम मजदूरी देकर काम कराया जाता है। कंपनियां उनका शोषण कर रही हैं।
वाटर लेवल नीचे जा रहा है।
जमीन अधिग्रहण नहीं, फसल क्षति का मुआवजा
बाक्साइट खदान खोलने के नए प्रावधानों के तहत लोगों की जमीनों का अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें फसल क्षति का मुआवजा देकर जमीनें निर्धारित अवधि के लिए लीज पर ली गई हैं। बाक्साइट का उत्खनन के बाद कंपनियां जमीनों को खेती योग्य बनाकर वापस करेंगी। जमीन का स्वामित्व भू-स्वामियों के पास ही रहेगा। फसल क्षतिपूर्ति की रकम मैनपाट में करीब 80 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष है।श्री भगत ने कहा कि यहां के लोगों में जब तक यह सहमति नहीं बनेगी तब तक खदान नहीं खुलना चाहिए।


