सरगुजा

स्कूलों में बाल क्रूरता व यौन शोषण के मामलों पर आज़ाद सेवा संघ गंभीर
01-Dec-2025 10:34 PM
स्कूलों में बाल क्रूरता व यौन शोषण के मामलों पर आज़ाद सेवा संघ गंभीर

सीएम से ‘शून्य सहनशीलता नीति’ लागू करने की मांग

अंबिकापुर, 1 दिसंबर। आज़ाद सेवा संघ छत्तीसगढ़ ने राज्य के कुछ शिक्षण संस्थानों में सामने आ रहे शारीरिक दंड, बच्चों के साथ क्रूरता और यौन शोषण के आरोपों पर चिंता व्यक्त की है। संघ ने इन घटनाओं को बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शून्य सहनशीलता नीति लागू करने की मांग की है।

आज़ाद सेवा संघ, छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा कि हाल में सामने आए कुछ मामलों ने बच्चों की शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएँ यदि सत्य साबित होती हैं, तो ये शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 17 (शारीरिक दंड व मानसिक उत्पीडऩ पर प्रतिबंध) और पॉक्सो अधिनियम की मूल भावना से मेल नहीं खातीं।

मिश्रा ने लिखा है कि आरोपित घटनाओं से बच्चों में भय और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है, जिसका दीर्घकालिक असर उनके आत्मविश्वास, व्यवहार और शैक्षिक प्रगति पर पड़ सकता है।

संघ ने कुछ हालिया मामलों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ऐसी घटनाएँ जब भी सामने आती हैं—चाहे वे किसी छात्र को बांधने जैसी क्रूरता के आरोप हों या किसी शिक्षण कर्मी पर यौन शोषण के आरोप—तो ये पूरे समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ाती हैं।

संघ का कहना है कि इससे माता-पिता और बच्चों दोनों के मन में स्कूल के प्रति डर पैदा होता है, जो शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

संघ ने कहा है कि राज्य का भविष्य बच्चों में निहित है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। संघ को उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाकर स्कूलों को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएगी।


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