सरगुजा
एसडीएम ने बिस्कुट-पानी पिलाकर समाप्त कराया अनशन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
उदयपुर,10 नवम्बर। विकासखंड उदयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत घाटबर्रा के जंगल में हुई पेड़ों की कटाई को लेकर चल रहे विवाद के बीच कल अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त किया।
जानकारी के अनुसार भानु प्रताप सिंह शनिवार से घाटबर्रा जंगल किनारे भूख हड़ताल पर बैठे थे। आज शाम 4.51 बजे अधिकारियों द्वारा उनका अनशन तुड़वाया गया। इस दौरान उदयपुर अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) बन सिंह नेताम एवं तहसीलदार विकास जिंदल घटनास्थल पर पहुंचे और उनसे चर्चा की। अधिकारियों द्वारा उनकी बातों को गंभीरता से सुनने और कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद एसडीएम बन सिंह नेताम ने बिस्कुट और पानी पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
भानु प्रताप सिंह ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि घाटबर्रा क्षेत्र में लगभग 850 हेक्टेयर शासकीय भूमि, जिस पर ग्रामीण किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं, उसे प्रशासन द्वारा ‘जीरो ’ कर दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि इस भूमि को पुन: दुरुस्त कर घाटबर्रा ग्राम पंचायत को उचित मुआवजा राशि दिलाई जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के भीतर इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उदयपुर तहसील कार्यालय के सामने पुन: भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
भानु प्रताप सिंह ने एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्राम लक्ष्मणगढ़ निवासी कमलेश सिरदार की पेड़ कटाई के दौरान हुई मृत्यु की सत्य जांच की जाए। उन्होंने बताया कि कमलेश सिरदार की पत्नी को 15 लाख रुपये की राशि फर्जी तरीके से खाते में ट्रांसफर की गई है — यह राशि किस खाते से आई, इसकी जांच आवश्यक है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि कमलेश सिरदार वनकर्मी या अदानी कंपनी का कर्मचारी नहीं था, फिर वह जंगल में कटर मशीन लेकर क्यों गया, इस पर भी जांच होनी चाहिए।
तीसरी मांग के रूप में उन्होंने कहा कि 7 नवम्बर 2025 को घाटबर्रा जंगल में हुई पेड़ कटाई किसके आदेश पर की गई, इसकी जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।
इस मौके पर आलोक शुक्ला मुनेश्वर रामलाल सहित ग्रामीणों की काफी उपस्थिति रही, जिन्होंने भानु प्रताप सिंह की मांगों का समर्थन किया और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की।


