सरगुजा
जनजातीय समाज ने भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया- शिरीष
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 27 अक्टूबर। के.आर. टेक्निकल महाविद्यालय में ‘जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत: ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जनजातीय समाज के योगदान को समझना, उसकी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजना, और छात्रों को इसके महान आदर्शों से प्रेरित करना था।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरगुजा संभाग के आयुक्त गोविंदराम चुरेंद्र उपस्थित थे। उनके साथ, विशिष्ट अतिथि के रूप में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुल सचिव, डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी, और मुख्य वक्ता के रूप में शिरीष कोरेन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शासी निकाय के अध्यक्ष श्री कांत दुबे, डायरेक्टर रीनू जैन, प्राचार्य डॉ. रितेश वर्मा, आईक्यूएसी समन्वयक अफरोज अंसारी, जनजातीय समिति की संयोजक सुश्री रेणु सिंह, सह संयोजक श्रीमती जया सिरदार, प्राध्यापक गण और छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ जनजातीय विभूतियों के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसके बाद राजकीय गीत का गायन किया गया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का पारंपरिक स्वागत जनजातीय परंपराओं के अनुसार साल और श्रीफल से किया गया। इसके साथ ही महाविद्यालय परिवार की ओर से महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रितेश वर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोडऩे का अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय समाज का ऐतिहासिक योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत है और छात्रों को इनसे सीखने की आवश्यकता है।
मुख्य वक्ता शिरीष कोरेन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आदिवासी समाज के महान व्यक्तित्वों की वीरता, देशभक्ति, त्याग और बलिदान की कहानियों को साझा किया।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लें।
इसके बाद, विद्यार्थियों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई।
बिरसा मुंडा के संघर्ष और योगदान को इस नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों के बीच बिरसा मुंडा के गौरवमयी जीवन के प्रति जागरूकता बढ़ी। विद्यार्थियों ने इस नाटिका के माध्यम से बिरसा मुंडा के आदर्शों और उनके समाज के प्रति त्याग को दिखाया, जिससे दर्शक बेहद प्रभावित हुए।
मुख्य अतिथि गोविंदराम चुरेंद्र ने अपने संबोधन में जनजातीय समाज के वीर नायकों की बात करते हुए छात्रों को उनके आदर्शों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जनजातीय समाज के देश की स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि आदिवासी समाज की वीरता और संघर्ष की गाथाएं हमें अपने देश के प्रति निष्ठा और समर्पण की सीख देती हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने भी जनजातीय समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने छात्रों को बताया कि आदिवासी समाज का गौरवमयी इतिहास हमें साहस, धैर्य और समर्पण की शिक्षा देता है, जिसे आत्मसात करने से हम अपने समाज को बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय समाज के मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनके आदर्शों से सीख लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है।


