सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
लखनपुर, 24 अक्टूबर। सरगुजा संभाग में लगातार 32 वर्षों से सामाजिक कार्य कर रही संस्था छत्तीसगढ़ शबरी सेवा संस्थान के प्रदेश सचिव सुरेन्द्र साहू ने बताया कि बाल विवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने से निश्चित ही बाल विवाह में कमी आएगी। बाल विवाह करने से अपने मर्जी से जीवन साथी चुनने के अधिकार का हनन होता है।
प्रदेश सचिव सुरेन्द्र साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ शबरी सेवा संस्थान लगातार सरगुजा संभाग में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर बाल अधिकार, मानव व्यापार और बाल विवाह के खिलाफ लगातार जन-जागरूकता अभियान चला रही है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बाल विवाह को रोकने के लिए केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन को निश्चित रणनीति बना कर बाल विवाह करने वालों के उपर कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी।
सुरेन्द्र साहू ने कहा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद निश्चित ही बाल विवाह में कमी आयेगी। छत्तीसगढ़ शबरी सेवा संस्थान फिर से बाल विवाह के खिलाफ जनजागरूपा अभियानो संचालन पूरे छत्तीसगढ़ में करेगी जिससे कि बाल विवाह में कमी आएगी। अधिकांश बाल विवाह ग्रामीण क्षेत्रों में ही होता है। वहां जाकर शादी करने वाले सभी जनप्रतिनिधियों और पंडित, टेंट, भोजन बनाने वालों को समझाइश दी जाएगी और उन्हें बताया जाएगा कि बाल विवाह अपराध है और बाल विवाह करने से क्या क्या परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


