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के.आर. टेक्निकल कॉलेज में श्री रामकृष्ण-विवेकानंद-वेदांत साहित्य की प्रदर्शनी
17-Oct-2024 10:17 PM
   के.आर. टेक्निकल कॉलेज में श्री रामकृष्ण-विवेकानंद-वेदांत साहित्य की प्रदर्शनी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अम्बिकापुर,17 अक्टूबर। के.आर. टेक्निकल कॉलेज, अंबिकापुर में श्री रामकृष्ण-विवेकानंद-वेदांत साहित्य की प्रदर्शनी एवं बिक्री का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित कर उनका समग्र व्यक्तित्व विकास करना था। कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन अंबिकापुर से स्वामी तन्मयानंद जी, महाविद्यालय की डायरेक्टर रीनू जैन, प्राचार्य डॉ.रितेश वर्मा, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी विनितेश गुप्ता, सभी सहायक प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

प्राचार्य डॉ. रितेश वर्मा ने स्वागत उद्बोधन में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं न केवल जीवन को सही दिशा देती हैं बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे ध्यान, योग, तनाव प्रबंधन, और जीवन कौशल पर आधारित इन पुस्तकों को खरीदें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण स्वामी तन्मयानंद जी का प्रेरणादायक व्याख्यान रहा। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं हमें आत्मबल, एकाग्रता और सेवा भाव का पाठ पढ़ाती हैं। आज के युवा यदि इन शिक्षाओं को अपनाएँ, तो वे न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफल होंगे, बल्कि समाज और देश के विकास में भी योगदान दे सकेंगे।

 प्रदर्शनी में स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित मेडिटेशन, कॉन्सन्ट्रेशन, योग, उनकी जीवनी, प्रेरक व्याख्यान और अन्य प्रेरणादायक साहित्य की पुस्तकें उपलब्ध थीं। बच्चों के लिए चित्रकथाएं, भारत की महान महिलाओं पर आधारित पुस्तकें और आध्यात्मिक ग्रंथ जैसे गीता, उपनिषद भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

कार्यक्रम के समापन पर कॉलेज की डायरेक्टर रीनू जैन ने सभी अतिथियों, विशेष रूप से स्वामी चिन्मयानंद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, स्वामी विवेकानंद के विचार न केवल छात्रों को प्रेरित करेंगे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाएंगे।

 डायरेक्टर महोदया ने श्री रामकृष्ण विवेकानंद सेवा आश्रम, अंबिकापुर और रामकृष्ण मठ, पुणे का भी धन्यवाद करते हुए इस आयोजन को 125वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने सभी छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे इन प्रेरक पुस्तकों को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर अपना भविष्य उज्ज्वल करें।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया और पुस्तकों की खरीदारी की। अंत में, यह प्रदर्शनी छात्रों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का अद्भुत अवसर साबित हुई।


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