सरगुजा

सनातन पद्धति से शिक्षा के साथ अपने संस्कार को संरक्षित कर सकते हैं-शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती
29-Sep-2024 9:58 PM
सनातन पद्धति से शिक्षा के साथ अपने संस्कार को संरक्षित कर सकते हैं-शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अम्बिकापुर, 29 सितंबर। अपने तीन दिवसीय अंबिकापुर प्रवास पर पधारे जगतगुरु शंकराचार्य  निश्चलानंद सरस्वती  ने कार्यक्रम के द्वितीय दिवस को प्रात: 11 बजे एवं सायं 6 बजे संगोष्ठी में धर्म और आध्यात्म संबंधी चर्चाएं की और इससे जुड़ी लोगों की शंकाओं का समाधान किया।  बड़ी संख्या में नगर एवं क्षेत्र से श्रद्धालु कार्यक्रम में पधार रहे हैं तथा लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम में सरगुजा क्षेत्र में हो रहे धर्मांतरण से जुड़े हुए एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि शासन तंत्र इस कृत्य को रोकने में सक्षम होते हुए भी अक्षम है, राजनेता अपने हितों के चलते इस कार्य में अपनी रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था शिक्षा के साथ बच्चों एवम युवाओं में मानवीय मूल्यों, संस्कार का संवर्धन करने में सक्षम नहीं है, इसके लिए सनातन पद्धति से हम शिक्षा के साथ अपने संस्कार को संरक्षित कर सकते हैं।

वर्तमान में पितृपक्ष पखवाड़ा चल रहा है, इस संबंध में भी श्रद्धालुओं के मन में पितृ तर्पण संबंधी काफी जिज्ञासाएं थी, जिनके सवालों के जवाब में उन्होंने शंका समाधान किया, तथा कहा कि हर सनातनी को पितृ तर्पण अवश्य करना चाहिए। वर्तमान में सभी त्योहार दो-दो दिन मनाये जा रहे हैं इस संबंध में उन्होंने कहा कि वर्तमान पंचांग निर्माता पाश्चात्य पद्धति से प्रभावित हैं, इस संबंध में गहन अध्ययन उपरांत प्रकाशन की आवश्यकता है।

जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने आज दोपहर दीक्षा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को विधिवत दीक्षा दी। तथा विधिवत शास्त्रोक्त विधि से धर्म का पालन करने का संकल्प दिलाया।


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