सरगुजा

युक्तियुक्तिकरण से पड़ेगा शिक्षा गुणवत्ता पर प्रभाव, अव्यवहारिक निर्णय शासन वापस ले
24-Aug-2024 4:19 PM
युक्तियुक्तिकरण से पड़ेगा शिक्षा गुणवत्ता पर प्रभाव, अव्यवहारिक निर्णय शासन वापस ले

शिक्षक संघर्ष मोर्चा सरगुजा ने ज्ञापन सौंप आक्रोश जताया

अम्बिकापुर,24 अगस्त। युक्तियुक्तकरण सहित दो सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षक संघर्ष मोर्चा सरगुजा ने ज्ञापन सौंपकर आक्रोश जताया।  

छग टीचर्स एसोसिएशन, सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, शालेय शिक्षक संघ, नवीन शिक्षक संघ ने संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एकजुटता के साथ जिला मुख्यालय में प्रदर्शन कर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। संघर्ष मोर्चा ने दो टूक कहा कि युक्तियुक्तकरण के जारी निर्देश अव्यवहारिक और शिक्षकों को परेशान करने वाला है। सरकार को तुरंत ही इसे वापस लेना चाहिये। 

मोर्चा के प्रांतीय सह संचालक हरेंद्र सिंह  ने  कहा कि  युक्तियुक्तकरण नियम अव्यवहारिक हैं। इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए । साथ ही उन्होंने ऑनलाइन उपस्थिति पर भी आपत्ति दर्ज करायी। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा सरगुजा के जिला संचालक मनोज वर्मा ने चरणबद्ध आंदोलन की जानकारी देते हुए कहा है कि हमने प्रदेश व्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। आज पहला चरण खत्म हुआ है, जल्द ही आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा। जिसके तहत मंत्री, विधायक व सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा ।

संघर्ष मोर्चा के जिला संचालक संदीप कुमार पांडे ने बताया कि वर्तमान में सेटअप 2008 के आधार पर पदोन्नति वह नई नियुक्ति की गई है, युक्तियुक्त करण की वर्तमान प्रक्रिया सेटअप 2008 के विपरीत एवं अव्यवहारिक है इसके आधार पर कार्यरत शिक्षकों के साथ अन्याय है यदि ऐसा युक्तियुक्त करण  किया गया तो पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा,संघर्ष मोर्चा के ब्लॉक संचालक सुशील मिश्रा ने ऑनलाइन अवकाश स्वीकृत पर सवाल उठाते हुए बताया कि यदि शिक्षकों को अचानक कोई अवकाश पड़ जाए या कोई दुर्घटना हो जाए तो ऐसी स्थिति में वह शिक्षक ऑनलाइन आवेदन कैसे करें और न करने की स्थिति में वह अनुपस्थित हो जाए तो यह शिक्षकों के साथ अन्याय है साथ ही उन्होंने  पूर्व सेवा गणना कर प्रथम नियुक्ति तिथि से सही वेतन का निर्धारण कर सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति  दूर करने एवं पुरानी पेंशन प्रदान किए जाने की मांग की।

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि युक्तियुक्तकरण की दोषपूर्ण नीति से शिक्षा विभाग में शिक्षा की गुणवत्ता गिरेगी, अतिशेष शिक्षकों के समायोजन की सोच शिक्षा विभाग की सही है लेकिन शिक्षा विभाग इस बात का जवाब दें कि शाला के सेटअप हेतु निर्धारित पद के अतिरिक्त पोस्टिंग करने वाले अधिकारी कौन है,? अधिकारियों ने गलती क्यों किया,? क्या ऐसे अधिकारियों को चिन्हांकित कर कार्यवाही किया जाएगा,? 

जिन्होंने शाला विशेष में पद रिक्त नहीं होने के बाद भी पदोन्नति या ट्रांसफर में ज्यादा संख्या में शिक्षकों को पदस्थ किया।
किसी भी शाला में सेवारत शिक्षकों का कोई दोष नहीं है क्योंकि उनकी पदस्थापना शिक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा ही किया गया है सेटअप के विपरीत युक्तियुक्तकरण का नियम शिक्षकों को स्वीकार नहीं है, सेटअप शिक्षा विभाग के शालाओं में पद का मूल आधार है अत: 2008 को जारी सेटअप का समुचित क्रियान्वयन हो, युक्तियुक्तकरण के दोषपूर्ण व विसंगतिपूर्ण बिंदुओं को शिक्षा विभाग अलग करें, इसके बाद शिक्षकों की व्यवस्थापन के विषय में सोंचे,,और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिर किन अधिकारियों के द्वारा अतिरिक्त संख्या में शिक्षकों की पद स्थापना शालाओं में की गई ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किया जावे।
मोर्चा ने मुख्यमंत्री जी से अपील की कि दोषपूर्ण युक्तियुकरण नीति पर पुनर्विचार करें।
 


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