सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
लखनपुर, 18 अगस्त। लखनपुर पुलिस ने मृत व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षर एवं कूटरचित दस्तावेजों के जरिए केसीसी लोन निकालकर गबन के मामले में 2 फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
पुलिस के अनुसार प्रार्थी रामअवतार खुटिया थाना उदयपुर द्वारा थाना लखनपुर आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि वह ग्राम खुटिया का स्थाई निवासी है, जहां प्रार्थी की पैतृक सम्पत्ति स्थित है जिस पर कृषि कार्य करता है। आवेदक को वर्ष 2019-20 में जमीन सम्बन्धी दस्तावेज बी-01 निकालने के दौरान अपने पैतृक जमीन में पिता रामचरण के नाम से 2 लाख 18 हजार रुपये का केसीसी लोन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा लखनपुर से होना एवं उक्त जमीन दिनांक 20/12/14 से बैंक में बंधक होने की जानकारी प्राप्त हुई।
प्रार्थी के पिता के वर्ष 2008 में ही मृत होने उपरांत 2014 में बैंक ऋण लेने की जानकारी प्राप्त कर ऋण प्राप्त करने हेतु लगे दस्तावेज में बलराम मुटकी उदयपुर का होना पाया गया जो बैंक में अपना नाम रामचरण आत्मज दखल साकिन मुटकी लखनपुर बताकर बैंक से प्रार्थी के पिता के नाम से जमीन पर ऋण/लोन प्राप्त किया है।
आरोपी बलराम बसोंर द्वारा आरोपी दरोगा दास एवं सीताराम कवर की सहायता से फर्जी रूप से प्रार्थी के मृतक पिता के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अपना फोटो लगाकर 2 लाख 18 हजार रुपये का केसीसी बैंक लोन प्रार्थी के जमीन पर निकाल कर गबन किया गया है। मामले में प्रार्थी की रिपोर्ट पर अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया।
पुलिस टीम द्वारा पूर्व में कार्रवाई करते हुए आरोपी बलराम बसोर साकिन मुटकी थाना उदयपुर फोकटपारा थाना जयनगर कों गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था।
इसी दौरान विवेचना पुलिस टीम द्वारा मामले के आरोपी बलराम बसोर का मेमोरंडम कथन लेने पर मामले में शामिल आरोपी दरोगा दास एवं सीताराम कवर द्वारा ही आरोपी बलराम बसोर को प्रार्थी के पिता के नाम पर फर्जी रूप से लोन निकालने में सहयोग करने पर 50000/- रुपये देने की बात बोलकर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन स्वीकृत कराया जाना पाया गया है।
पुलिस टीम के सतत प्रयास से फरार आरोपियों की घेराबंदी कर पकडक़र पूछताछ की। आरोपियों द्वारा दरोगा दास साकिन मंहगई सूरजपुर , सीताराम कवर मुटकी सरगुजा का होना बताया।
आरोपियों से घटना के सम्बन्ध में पूछताछ किये जाने पर कमीशन के लालच में बलराम बसोंर को प्रार्थी के पिता रामचरण के जगह खड़ा कर फर्जी रूप से खाता खुलवाकर केसीसी लोन निकलवाना स्वीकार किया गया।
अपराध घटित करने से प्राप्त हुआ कमीशन में से 20000/- दरोगा दास को प्राप्त हुआ था एवं आरोपी सीताराम को 5000/- का कमीशन प्राप्त हुआ था। दोनों आरोपियों से कमीशन के रूप में मिले रकम के बारे में पूछताछ करने पर रकम खाने-पीने में खर्च हो जाना बताया गया।
आरोपियों द्वारा अपराध घटित किया जाना स्वीकार किये जाने पर आरोपियों के विरुद्ध अपराध सबूत पाये जाने से गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।


