सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 25 फरवरी। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र संस्कृति विभाग भारत सरकार के सौजन्य से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित किंतु लुप्तप्राय जनजाति लोक नृत्य के संग्रहण शोध व संवर्धन विषय पर लोक मंजरी का 6 सदस्यीय दल इन दिनों सरगुजा में है।
फेलोशिप अवार्डी रामेश्वरी के नेतृत्व में अंबिकापुर व रामपुर, सरई टिकरा तथा जशपुर के विभिन्न सुदूर गांव में दल जाकर वहां प्रमुख रूप से प्रचलित शैला डंडा कर्मा बायर व सरहुल आदि लोकनृत्यों का ग्रामवासियों के बीच जाकर सूक्ष्मतापूर्ण अध्ययन किये। लोकनृत्य संबंधी मान्यताओं परंपराओं व रीति-रिवाजों के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त की।
उनके साथ प्रमुख रूप से संग्रहण दल में पुन्नू यादव, तरुण निषाद, राकेश देशमुख, रिंकेश्वर ठाकुर, शियाक्षिक वर्मा व मुकेश साहू शामिल थे उनके इस कार्य में सरगुजा अंचल के लोककला मर्मज्ञ, साहित्यकार व वरिष्ठ कलाकार सर्वश्री रंजीत सारथी, रामेश्वरी यादव लोकमंजरी भिलाई,शिव व्रत पावले, विजय सिंह दामाली, अर्चना पाठक, माधुरी जायसवाल व रामनारायण का विशेष सहयोग तथा उमेश अग्रवाल, संतोष गुप्ता, डॉ. सरिता साहू व जयंत श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


