सरगुजा

जयंती पर भारतेंदु को किया याद, सरगुजिहा बोली की पहली पत्रिका का विमोचन
11-Sep-2022 9:03 PM
 जयंती पर भारतेंदु को किया याद, सरगुजिहा बोली की पहली पत्रिका का विमोचन

अम्बिकापुर, 11 सितंबर। भारतेंदु साहित्य कला समिति सरगुजा के द्वारा भारतेन्दु जयंती स्थानीय भारतेंदु भवन में मनाई गई । कार्यक्रम के अध्यक्ष द्वितेन्द्र मिश्र ने अपने उद्बोधन में भारतेंदु जी के द्वारा अल्पकाल में 175 कृतियों की रचना के साथ ही इस संस्था से भावनात्मक लगाव पर प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथि जे.पी. श्रीवास्तव ने जीवन्त साहित्य एवं साहित्यकारों की भूमिका पर ओजपूर्ण वक्तव्य दिया। विशिष्ट अतिथि संध्या सिंह जो समिति की वरिष्ट सदस्य भी हैं, उन्होंने साहित्य एवं कला के क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत इस संस्था के निरन्तर प्रगति की कामना करते हुए अपनी एक रचना का वाचन किया । प्रथम वक्ता के रूप में राजेश मिश्र ने भारतेंदु जी की साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतेंदु जी द्वारा किए गए पुराण एवं कुरान का हिन्दी में अनुवाद के साथ ही कश्मीर , राजस्थान , मेवाड़ , महाराष्ट्र एवं दिल्ली दरबार का इतिहास लेखन के महती कार्य का उल्लेख किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ . सुदामा मिश्र ने कहा कि भारतेंदु जी ने अपने बाल्यकाल में काव्य रचना करना प्रारंभ कर दिया था। उन्होंने कहा कि भारतेंदु जी ने बच्चों , प्रौढ़ तथा महिलाओं के लिए अलग - अलग पत्रिका का प्रकाशन किया तथा जो कार्य काव्य के माध्यम से नहीं कर सके उसे नाटकों के माध्यम से जन - जन तक पहुंचाया। अंधेरनगरी चौपट राजा की प्रासंगिकता सर्वकालिक रही है । अतिथियों द्वारा सरगुजिहा बोली की पहली पत्रिका गागर के 14-15वें संयुक्तांक का विमोचन किया गया ।

प्रारंभ में समिति के सचिव डॉ . सुधीर पाठक ने संस्था के प्रमुख कार्यकलापों का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । इस अवसर पर भारतेंदु भवन की परिकल्पना को साकार करने वाले समिति के संस्थापक एवं पूर्व अध्यक्ष स्व.जे.एन. मिश्र का स्मरण किया गया । आयोजन के द्वितीय सत्र में स्थानीय एवं संभाग के अन्य जिलों से पधारे कवियों द्वारा सरस काव्य पाठ किया गया । काव्य सत्र की अध्यक्षता समिति संरक्षक श्री बब्बनजी पाण्डेय ने की । आयोजन के प्रारंभ में श्री रंजीत सारथी द्वारा सरस्वती वंदना तथा श्रीमती अर्चना पाठक , आशा पाण्डेय, माधुरी जायसवाल, राजलक्ष्मी पाण्डेय एवं पूनम दुबे द्वारा राज्यगीत की प्रस्तुति दी गई।

बलरामपुर से पधारे पवन पाण्डेय ने भोजपुरी , जशपुर के अमरदीप कुजूर ने नागपुरी गीत तथा स्थानीय रचनाकार राजेन्द्र विश्वकर्मा , श्रीमती गीता द्विवेदी ने सरगुजिहा गीतों की प्रस्तुति दी। हिन्दी में काव्य पाठ की शुरूआत करते हुए वरिष्ट कवि भगत सिंह विहंस ने पक्षियों की उन्मुक्तता को रेखांकित करते हुए सुमधुर गीत - उड़ते उड़ते चिडिय़ा चहकी यह गगन तो मेरा है , सुनाया । गजलकार मुनउव्वर ने कत्आ पेश की - चंद रोज की चुप्पियों पर एतबार मत करना , गम मिले कभी तो इंकार मत करना , पी लेना जहर भी अमृत समझ कर माँ - बाप से कभी तकरार मत करना । मनेन्द्रगढ़ के कवि डॉ . सपन सिन्हा ने  कबूतर उड़ा के देखो  तथा अंजनी सिन्हा ने  तन चंदन जैसा था उसका , मन तो एक शिवाला था  गीतो से वाहवाही बटोरी । कार्यक्रम के संचालक प्रकाश कश्यप ने मार्मिक गीत -  तुझ बिन यार मेरे कुछ तो कमी सी है , दिल में कसक उठती आँखों में नमी से है सुनाया। इस अवसर पर अन्य स्थानीय कवियों द्वारा भी बेहतरीन कविताओं का पाठ किया गया ।

आयोजन में एम . एम . मेहता, द्वारिका प्रसाद यादव, वेदप्रकाश अग्रवाल, आर. डी. मिश्र, रमेश सिन्हा, रणविजय सिंह तोमर, मुकुन्दलाल साहू, अम्बरीष कश्यप, दिग्विजय सिंह तोमर, मंजू पाठक, गीता दुबे, मोहिनी पटनायक, गुर्जर मिंज सहित बड़ी संख्या में काव्य प्रेमी उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन हरिकिशन शर्मा ने किया ।


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