सरगुजा

आदित्येश्वर ने कलेक्टर को लिखा पत्र, कहा- ग्रामीणों की सहमति जरूरी
05-Jun-2022 8:35 PM
आदित्येश्वर ने कलेक्टर को लिखा पत्र, कहा- ग्रामीणों की सहमति जरूरी

ग्रामसभा बुलाकर सबका स्पष्ट एवं पारदर्शी अभिमत जाना जाए

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 5 जून।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने सरगुजा कलेक्टर को पत्र लिख कर कहा है कि मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी मिली कि आपने उदयपुर क्षेत्र के प्रस्तावित खनन को लेकर मेरे द्वारा 30 मई को लिखे गए पत्र का जवाब दिया है, जबकि अब तक मुझे यह पत्र नहीं मिला है। इसमें आपने कोल बेरिंग एक्ट की बात कही है, जिसका उल्लेख मैंने भी किया था। मैंने केवल आमजनों के द्वारा ग्रामसभा की वैधता पर जो सवाल खड़ा किया गया था, उसका उल्लेख करते हुए पुन: पारदर्शी तरीके से ग्रामसभा बुलाने की बात कही थी।

मेरा मानना है कि जब उन ग्रामों के ग्रामीण स्वयं ही उस क्षेत्र में प्रस्तावित उत्खनन को लेकर जंगल में बैठ कर अपना असंतोष एवं आक्रोश जाहिर कर रहे हों और लगभग तीन महिने से अनिश्चितकालिन हड़ताल पर बैठ कर फतेहपुर में 28 अगस्त 2017, हरिहरपुर में 24 जनवरी 2018 एवं साल्ही में 27 जनवरी 2018 को हुई ग्राम सभा की वैधता पर स्वयं सवाल खड़ा कर रहे हों, ऐसी स्थिति में हम सब का यह नैतिक दायित्व है कि ग्रामों एवं ग्रामवासियों को ग्रामसभा से मिले संवैधानिक अधिकारों पर कोई सवाल खड़ा न हो, इसलिये पूरे कोरम की ग्रामसभा बुलाकर सबका स्पष्ट एवं पारदर्शी अभिमत जाना जाये।  

ग्रामीणों से यह भी जानकारी मिली कि इस मसले पर राज्यपाल से जब इनकी मुलाकात हुई थी तो उन्होंने इस पूरे मामले पर जांच कराने की बात कही थी और जब जांच हुई तो जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उनका पक्ष ही नहीं लिया गया। साथ ही सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में रात्रि में हुई वनों में पेड़ों की कटाई को लेकर भी लोगों में असंतोष एवं आक्रोश है। मुख्यमंत्री जी की मंशा अनुसार कटाई के पूर्व वृक्षारोपण भी नहीं किया गया, साथ ही पेड़ के बदले पेड़ लगाने की जो व्यवस्था है, प्रत्येक एक एकड़ पेड़ के एवज् में दो एकड़ पेड़ लगाने का जो नियम है, जो कि यहां के बदले वृक्षारोपण कोरिया जिले में प्रस्तावित है, इसे लेकर भी लोगों में आक्रोश एवं असंतोष का माहौल है।

कलेक्टर सरगुजा को लिखे पत्र में आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने यह भी कहा है कि इस स्थिति में शासन एवं प्रशासन की छवि एवं संविधान से मिले अधिकार अनुसार ग्रामसभा के महत्व पर सवाल उठ रहे हैं, उपरोक्त क्षेत्र में कई ग्रामों का विस्थापन भी होना है, ऐसे संवेदनशील मसले को संवैधानिक तरीके से लोगों की मंशा जानकर हल किया जाना ही उचित होगा। इसलिये जरूरी है कि इन प्रभावित ग्रामों में पूरे कोरम की ग्रामसभा बुलायी जाये। ग्रामीणों का स्पष्ट एवं पारदर्शी अभिमत लिया जाये। इससे शासन-प्रशासन पर उठ रहे सवालों पर भी विराम लगा, साथ ही ग्रामीणों का स्पष्ट मत भी प्राप्त हो सकेगा।

साथ ही गांव का जो भी फैसला होगा उस पर फिर किसी भी तरह का सवाल नहीं उठाया जाएगा और आगे की प्रक्रिया गांव के मंशा अनुसार किये जाने से असंतोष भी समाप्त हो जाएगा।

अत: मेरा आपसे पुन: आग्रह है कि जब तक इस संवेदनशील विषय पर ग्रामवासियों का स्पष्ट सहमति पारदर्शी तरीके से सामने नहीं आती तब तक व्यपवर्तन की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए, ग्रामवासियों के पूरे कोरम के साथ विशेष ग्रामसभा बुलाकर उनका स्पष्ट मत जानना जनहित में सहीं है। इस संवेदनशील विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए मेरे उक्त प्रस्ताव पर त्वरित निर्णय हेतु सादर प्रेषित है।


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