सरगुजा
भाजपा पार्षद पर नियम विरुद्ध तरीके से संरक्षित वन भूमि पर कब्जा व बिक्री का लगाया आरोप
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,16 मार्च। गरीब एवं अजा/अजजा एवं पिछड़े वर्ग के वन भूमि कब्जाधारियों को नियमानुसार वन भूमि पट्टा देने की मांग एवं भाजपा पार्षद द्वारा 117 एकड़ संरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर नियम विरुद्ध तरीके से बिक्री करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को मां महामाया मंदिर के समीप से भूमि व्यवस्थापन संघर्ष समिति ने आक्रोश रैली निकाली। समिति ने उक्त मामले की जांच एवं कार्रवाई की मांग को लेकर एसडीएम को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। रैली में जमकर नारेबाजी भी की गई।
भूमि व्यवस्थापन संघर्ष समिति के बैनर तले रैली में शामिल सैकड़ों लोगों ने कहा कि हम सभी खैरबार, बंधियाचुंआ, घुटरापारा एवं आस-पास के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के निम्न आय वर्ग के नागरिक हैं। हमारे क्षेत्र में ज्यादातर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लोग निवासरत हैं, जो छोटी-छोटी झोपडिय़ां बनाकर किसी तरह गुजारा करते हैं। हमारे क्षेत्र के कई लोगों को वन भूमि का पट्टा प्रदान किया गया है।
आगे कहा कि कई अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लोगों का सर्वे करने के उपरांत वन भूमि का पट्टा वर्ष 2012 में बना दिया गया है, लेकिन कई बार सक्षम अधिकारियों को निवेदन करने के उपरांत भी हमारे क्षेत्र के लोगों का, जिनका पट्टा बनाया गया है, उन्हें प्रदान नहीं किया गया है, जबकि, उक्त व्यक्ति अपने पूर्वजों के समय से उक्त वन भूमि पर काबिज होकर मकान बनाकर निवास करते चले आ रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से कतिपय व्यक्तियों/संगठनों द्वारा नित नये षड्यंत्र रचकर हमें अपने प्राकृतिक बसाहट से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा पार्षद आलोक दुबे अपने सहयोगियों के साथ पीढिय़ों से यहां निवासरत लोगों को अवैध कब्जाधारी बताकर समाज में विभेद पैदा करते रहे हैं।
समिति ने यह भी कहा कि समाचार पत्रों के माध्यमों से ज्ञात हुआ है कि क्षेत्र विशेष के सैकड़ों लोगों को अवैध कब्जाधारी बताकर उन्हें बेदखली करने की मांग करने वाले भाजपा पार्षद आलोक दुबे और उसके परिजन फन्दुरहिहारी गोधनपुर क्षेत्र में लगभग 117 एकड़ संरक्षित वन भूमि को अवैध रूप से अपने नाम करा लिया था।
उक्त संबंध में राजस्व प्रकरण चला था, जिस पर राजस्व मण्डल बिलासपुर द्वारा रा.प्र. के. आरएन/16/आर/अ-12/417/2007 के फैसले में उक्त समस्त भूमि को संरक्षित वन भूमि घोषित किया गया है। 26 मई 2014 को तत्कालीन कलेक्टर ने उक्त भूमि के खरीदी बिक्री पर रोक लगा दिया है।

न्यायालय की रोक के बावजूद भाजपा पार्षद व उनके परिजन अनुबंध कर दर्जनों लोगों को अवैध रूप से जमीन बेच रहे हैं। वर्ष 2014 के बाद से वन भूमि पर सैकड़ों घर बने हैं, इसकी पुष्टि गूगल मैप के माध्यम से जांच कर की जा सकती है। इसी जमीन पर उक्त भाजपा पार्षद द्वारा एक होटल का निर्माण किया गया है। होटल निर्माण के दौरान हुये हादसे में एक श्रमिक की मृत्यु हो गयी थी। उक्त मामले में गांधीनगर थाने में धारा 304 ए का प्रकरण भी दर्ज किया गया था, जिससे साफ है कि, न्यायालय के स्थगन के दौरान भी उक्त भूमि पर निर्माण कार्य किया गया।
भाजपा पार्षद अपने प्रभाव और प्रशासन से सांठगांठ कर अपने अवैध कॉलोनी नगर निगम से बिजली पानी सडक़ अमृत मिशन जैसी सुविधायें उपलब्ध करा रहे हैं।
संघर्ष समिति का कहना था कि संविधान में सभी को समानता का अधिकार हासिल है, हमें अबिलंव शासन के नियमों के तहत काबिज भूमि का पट्टा दिलाया जाये, जो पट्टा के दायरे में नहीं आते हैं, उन्हें व्यवस्थापित कर पुनर्वास की व्यवस्था की जाये, व्यवस्थापन के लिये शासन को अलग से भूमि खोजने की आवश्यकता नहीं है।
उक्त भाजपा पार्षद के कब्जे वाली जमीन पर सैकड़ों परिवार का व्यवस्थापन किया जा सकता है, 117 एकड़ सरकारी जमीन (संरक्षित वन भूमि) को गलत तरीके से हथियाने और स्थगन के बाद भी अवैध रूप से जमीन बेच अवैध कॉलोनी बसाने का आरोप लगाते हुए संघर्ष समिति ने मामले की जांच कर भाजपा पार्षद पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


