सरगुजा
पार्वती इंस्टिट्यूट में चार दिनी आध्यात्मिक कार्यशाला
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 26 फरवरी। चार दिवसीय आध्यात्मिक कार्यशाला कार्यक्रम पार्वती इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रेनिंग रिसर्च एंड मैनेजमेंट शिक्षा महाविद्यालय, मदनपुर, जिला- सूरजपुर में बीएड विभाग में प्रिंसिपल संध्या चंद्राकर के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम में सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी, प्रभारी प्रीति सोनी, सहायक प्राध्यापक उर्वशी सोनी, संतोष कुमार रानाड़े, उपेन्द्र कुमार रवि, अरूण कुमार दुबे, कंचन सिंह और निधि द्विवेदी मौजूद थे।
मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण में आध्यात्मिकता की बहुत बड़ी भूमिका हैं। क्योंकि आध्यात्मिक ज्ञान से सतोगुण जागृत होता है, जिससे हमारा मन विपरीत परिस्थिति में भी स्थिर रहता है और निर्णय करने की शक्ति आती है। उक्त विचार को प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने कही।
उन्होंने कहा कि राजयोग के द्वारा जब हम आत्म चिंतन करते हैं, तो आत्मा के सातों गुण शांति, प्रेम, सुख, आनंद, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति जागृत हो जाती है, जिससे हम शारीरिक बीमारियों से भी मुक्ति पाते हैं, क्योंकि डॉक्टर भी कहते हैं-आज 85 प्रतिशत बीमारी का कारण मानसिक तनाव हैं। इन सातों गुणों का हमारे शरीर के साथ गहरा संबंध है। जैसे ज्ञान का संबंध नर्वस सिस्टम से, शांति का संबंध-श्वसन तंत्र से, सुख का संबंध- पाचन तंत्र से, प्रेम का संबंध- हृदय से, शक्ति का संबंध मसल्स एवं हड्डियों से एवं आनंद का संबंध हमारे हार्मोनल सिस्टम से हैं। इन गुणों की कमी के कारण ही इनसे संबंधित रोग होते हंै, साथ ही राजयोग के द्वारा हमारे कार्यों में कुशलता आती हैं। नकारात्मकता समाप्त होती हैं और सहनशक्ति, सामना शक्ति, परखने की शक्ति, निर्णय शक्ति, समाने की शक्ति, सहयोग की शक्ति, विस्तार को संकीर्ण शक्ति और समेटने की शक्ति अष्ट शक्तियों की प्राप्ति होती हैं, इसे कहानी के माध्यम बताया।
आगे उन्होंने बताया कि अपने मंजिल तक पहुँचना है तो बहरा बनना पड़ेगा, क्योंकि हमें बहुत सारे लोग कुछ न कुछ बोलेंगे। हमें केवल अपने लक्ष्य को स्पष्ट देखकर आगे बढ़ते रहना हैं तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी। इन्हीं राजयोग के माध्यम से ही ये गुण और षक्तियाँ हमारे जीवन में आयेंगे। जिससे हमारा जीवन सुखद और तनाव मुक्त रखेगा।
प्रभारी प्रीति सोनी ने कहा, मैं इस आध्यात्मिक ज्ञान से 7 वर्षों से जुड़ी हुई हूँ, जब से जुड़ी, तब मैं ये अनुभव करती हूँ कि भगवान मेरे साथ हैं और वो मेरा हर काम करते हैं।
मैं भगवान से पहले भी बात करती थी, परन्तु अब उनसे बात करना बहुत सहज हो गया है और मुझे सम्पूर्ण विश्वास है कि वो हमेशा मेरी मदद करते हैं, मेरा कभी बुरा नहीं हो सकता और सदा इस आध्यात्म ज्ञान को अपने जीवन में महत्व दूँगी और जीवन में उपयोग करूँगी।
सहायक प्रोफेसर उर्वषी सोनी ने कहा कि इस आध्यात्म ज्ञान से जुडऩे से और भगवान को याद करने से अन्दर मजबूती आती है। विपरीत परिस्थितियों को सामना करने की शक्ति आती है और वो हमेशा सत्मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित करते हैं।
अन्य सहायक प्रोफेसर ने भी आध्यात्मिक ज्ञान और मेडिटेशन से हुये लाभ को शेयर किया। आध्यात्मिक कार्यशाला के सम्पन्न होने पर प्रशिक्षणार्थियों ने उससे हुये लाभ को अपने अनुभव के माध्यम से शेयर करते हुए कहा कि इस राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक का हम लोगों के जीवन में बहुत आवश्यकता है, इसलिये हम ये संकल्प करते हैं कि राजयोग मेडिटेशन को हम अपने दिनचर्या में लाएंगे और तनावमुक्त रहने के लिए हर कार्य में परमात्मा को साथी बनाएंगे।


