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बैंक ने किया चेक बाउंस, अदालत ने लगाया 10 हजार का जुर्माना
26-Feb-2022 8:24 PM
बैंक ने किया चेक बाउंस, अदालत ने लगाया 10 हजार का जुर्माना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 26 फरवरी।
नियम और कानून सबके लिए बराबर होते हैं, ऐसा ही एक मामला स्थाई लोक अदालत जन उपयोगी सेवा अंबिकापुर में देखने को मिला, जहां स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष ए आर ढीडही, राजेश कुमार सिंह सदस्य स्थाई लोक अदालत और संतोष कुमार शर्मा सदस्य स्थाई लोक अदालत के द्वारा एक बैंक के ऊपर कस्टमर को मानसिक कष्ट क्षतिपूर्ति के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना देने का आदेश किया गया है।

दरअसल, पूरा मामला चेक बाउंस का है, जहां रमेश चंद्र शुक्ला (70)अंबिकापुर द्वारा स्थाई लोक अदालत (जनउपयोगी सेवा) अंबिकापुर में 8 सितंबर 2021 को भारतीय स्टेट बैंक कलेक्ट्रेट ब्रांच शाखा प्रबंधक के ऊपर लापरवाही पूर्वक चेक डिसऑनर करने के संबंध में आवेदन पेश किया गया।

आवेदक रमेश चंद्र शुक्ला ने बैंक पर आरोप लगाया कि उनका और उनकी पत्नी का ज्वॉइंट अकाउंट स्टेट बैंक की कलेक्ट्रेट शाखा में है, जिसका चेक बुक रमाकांत शुक्ला के नाम से जारी है। दिनांक 18 जनवरी 2021 को 35000 रुपए का चेक श्री राम ट्रेडर्स को प्रदान किया गया, जिससे उसने केनरा बैंक कलेक्शन के लिए 21 जनवरी 2021 को जमा किया था।

 स्टेट बैंक द्वारा जमाकर्ता के हस्ताक्षर में अंतर होना कहकर डिसऑनर कर दिया गया, जिसके बाद आवेदक बैंक मैनेजर के पास गया, तब उसने कंप्यूटर में देखकर बताया कि हमारे सिस्टम में रमाकांत शुक्ला का हस्ताक्षर नहीं है, जबकि चेक बुक उनके नाम पर ही जारी किया गया है और उनकी पत्नी के भी हस्ताक्षर से भुगतान करना संभव था किंतु हस्ताक्षर का मिलान नहीं हो पा रहा है, यह कहकर बैंक द्वारा उस चेक को डिशऑनर कर दिया गया था, जबकि उस चेक पर ज्वाइंट अकाउंट के दोनों लोगों का यानी उनका और उनकी पत्नी का हस्ताक्षर मौजूद था और ज्वाइंट अकाउंट में कोई भी एक हस्ताक्षर से रकम निकाली जा सकती है, जिनके नाम से जॉइंट अकाउंट हो।

साथ ही बैंक के द्वारा आवेदक के मोबाइल पर 35 हजार रुपए उनके खाते से डेबिट होने की सूचना भी दी गई थी जो तथ्य को प्रमाणित करती है कि प्रथम दृष्टि में चेक के हस्ताक्षर मिलते हैं, जिससे बाद में पुन: आवेदक के खाते में क्रेडिट करने में और उनके खाते से 177 रुपए डिडक्ट करने का मैसेज दिया गया तथा उक्त चेक के डिसऑनर होने से आवेदक के खाते से 177 रुपए एवं श्री राम ट्रेडर्स के खाते से 590 रुपए काट लिए गए।

 मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थाई लोक अदालत ने आज फैसला सुनाते हुए बैंक को मानसिक कष्ट क्षतिपूर्ति 10 हजार रुपये 30 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया है, साथ ही बैंक को त्रुटि सुधार कर संबंधित दोनों खातेदारों से खाते काटी गई रकम 177 एवं 590 रुपये वापस उनके खाते में जमा करने का भी आदेश दिया है, साथ ही बैंक को आवेदक का वाद व वाहन करने का भी आदेश स्थाई लोक अदालत द्वारा जारी किया गया है।


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