सरगुजा
शिकायत के बाद अजजा आयोग ने लिया संज्ञान, अध्यक्ष ने कहा-होगी जांच
मृतक की मां ने आयोग में अपने पुत्र के अंतिम कथन जमीन नहीं दोगे तो क्रेशर में डाल दूंगा की धमकी को कराया दर्ज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 24 फरवरी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला के बरियों स्थित क्रशर में आदिवासी युवक की मौत मामले में गुरुवार को अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह एवं पीडि़त परिवार ने अंबिकापुर के सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता के दौरान आरोप लगाते कहा कि बरियों स्थित विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू के क्रेशर में संदिग्ध परिस्थितियों में शिवनारायण की मौत हुई थी। मृतक की पहचान डीएनए रिपोर्ट आने के बाद व उससे पहले भी पुलिस ने क्रशर संचालक के विरुद्ध न तो कोई जांच की और न ही एफआईआर दर्ज किया।
मृतक की मां लक्ष्मणीया बाई एवं बेटी सुनीता ने पत्रकारों को बताया कि 16 जून 2020 को बरियों स्थित विनोद अग्रवाल के क्रशर में एक क्षत-विक्षत लाश मिली थी। उन्हें शव मिलने की जानकारी नहीं थी, 2 दिन बाद गांव के सरपंच के माध्यम से उन्हें पता चला कि वहां कोई शव मिला है, तब तक पुलिस शव का क्रिया कर्म कर चुकी थी। चार-पांच दिन बाद पुलिस वाले उनके पास आए और बोले कि उक्त शव शिवनारायण का ही है, जिस पर परिवार वालों ने कहा कि यह शव उनके बेटे का नहीं है।
इधर, एक महीना तक शिवनारायण के वापस नहीं आने के बाद पुलिस वाले पुन: पीडि़त परिवार के पास आए और बोले कि वह शव उसी का है, मान लो और कहा कि क्रशर संचालक ने कहा है क्रियाकर्म के लिए कुछ पैसा दे देगा। पीडि़त परिवार ने कहा कि हम लोग कैसे मान ले कि वह शव उसके बेटे का है, पीडि़त परिवार द्वारा डीएनए की मांग पर बरियों पुलिस ने मृतक की मां एवं बेटी का सैंपल लेकर डीएनए कराई तो परिवार वालों को विश्वास हुआ कि जो शव क्रशर में मिला था, वह शिवनारायण का ही था।
लक्ष्मणीया बाई ने बताया कि क्रशर के बगल में उनकी 2 एकड़ खेती है, जिसमें क्रशर डस्ट जाने की वजह से उनकी फसल बर्बाद हो रही थी, इस पर उसका बेटा शिवनारायण जो कि हलवाई का काम करता था, वह संचालक विनोद अग्रवाल को जाकर बोला कि मेरी फसल खराब हो रही है, तब संचालक ने कहा कि तुम अपनी जमीन मुझे दे दो। शिवनारायण ने घरवालों से चर्चा उपरांत जमीन बेचने की बात कही।
घरवालों से राय मशवरा कर वह पुन: क्रशर संचालक विनोद अग्रवाल के पास गया और कहा कि मुझे अपनी जमीन नहीं बेचना है आप मेरे जमीन के तरफ अहाता उठा लें ताकि मेरी खेती बर्बाद होने से बच जाए। जिस पर क्रेशर संचालक ने उसे धमकी दिया था कि तुम्हें इसी क्रशर में डाल दूंगा।
धमकी के दूसरे दिन आधी रात तक परिवार वालों ने शिवनारायण को घर में देखा था। सुबह परिवार के लोग उठे तो देखें कि घर का दरवाजा खुला है तो उन्होंने सोचा कि वह मिठाई बनाने कहीं गया होगा। अकसर वह चार-पांच दिन बाहर रहकर मिठाई बनाने का काम करता था,परिवार वालों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। उसके गायब होने के दूसरे दिन क्रशर में एक युवक की क्षत-विक्षत लाश मिली थी, जिसकी पहचान कर पाना काफी मुश्किल था। पहचान न होने की स्थिति बताते हुए पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार करा दिया था।
पुलिस द्वारा शिवनारायण के अंतिम संस्कार और बार-बार परिवार वालों के पास आकर यह कहना कि वह शिवनारायण का ही शव है,जो हुआ सो हुआ संचालक उन्हें क्रिया कर्म के लिए पैसा दे देगा बात हुई है। पीडि़त परिवार वालों ने जब क्रशर में मिले युवक के डीएनए टेस्ट की मांग पुलिस से की और दबाव डाला तो पुलिस ने मृतक युवक के मां व उसकी बेटी का सैंपल लेकर जांच किया तो डीएनए में साबित हो गया कि क्रशर में मिले शव शिवनारायण का ही है।
पीडि़त परिवार व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि पुलिस ने क्रशर में लाश मिलने के बाद भी संचालक के विरुद्ध कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया और न ही डीएनए रिपोर्ट आने के बाद।
मृतक की मां ने आयोग में विनोद अग्रवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसका बेटा शिवनारायण ने अपनी मां से कहा था जमीन नहीं दोगे तो क्रेशर में डाल दूंगा की विनोद अग्रवाल की धमकी को अंतिम कथन दर्ज कराया है।
आयोग की निगरानी में होगी जांच, पुलिस पर भरोसा नहीं- भानु प्रताप
वार्ता के दौरान अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि 2 दिन पहले ही रायपुर पहुंचकर पीडि़त परिवार ने उक्त कथन दर्ज कराया है। आयोग ने इसे संज्ञान में लिया है, क्रशर में लाश मिला था तो पुलिस को प्रकरण दर्ज करना था, जो दर्ज नहीं किया गया। गांव में चर्चा है कि क्रशर के बगल खेत में सीसीटीवी लगा हुआ था जिसमें क्रशर बंकर में 3 लोग जाते दिखे थे, लेकिन वापसी में 2 लोग ही नजर आए, इसके बाद वहां से सीसीटीवी हटा दिया गया है। पीडि़त परिवार कई बार रिपोर्ट लिखाने पुलिस के पास गई पर रिपोर्ट नहीं लिखा गया है।
अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले में प्रारंभ से ही पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में हैं, उक्त मामले की जांच आयोग की निगरानी में होगी। मुख्यमंत्री से भी बात हुई है सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मैं चीफ सेक्रेटरी से मिला था। बरियों मामला सहित 25 मामले को संज्ञान में लिया गया है, त्वरित रूप से कार्रवाई होगी।


