सरगुजा
सिंह देव-भगत ने जताया शोक
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 28 दिसंबर। छत्तीसगढ़ में सामाजिक वानिकी के जनक वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल का सोमवार की देर रात राजधानी रायपुर के एमएमआई अस्पताल में निधन हो गया। पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन, उन्नत कृषि के अलावा खेती को लाभकारी बनाने नया प्रयोग करने के साथ सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल के असामयिक निधन पर समाज के सभी वर्ग के लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनके निधन पर कैबिनेट मंत्री द्वय टीएस सिंह देव एवं अमरजीत भगत ने दुख व्यक्त करते हुए शोक जताया है।

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर के कार्य परिषद के सदस्य वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल युवक कांग्रेस सरगुजा के प्रथम अध्यक्ष, लंबे समय तक कांग्रेस के जिला महामंत्री, वरिष्ठ उपाध्यक्ष का दायित्व निभा चुके हैं। ग्रामीण बैंक निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में भी उनका कार्यकाल उत्कृष्ट रहा है। भारत कृषक समाज के माध्यम से उन्होंने कृषकों को आगे बढ़ाने योगदान दिया। पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से पूरी तरह से पृथक हो चुके वृक्षमित्र की पहचान उत्तर छत्तीसगढ़ में सामाजिक व कृषि वानिकी को स्थापित करने वाले व्यक्तित्व के रूप में होती है।
आदिवासी बाहुल्य सरगुजा अंचल में वन, पर्यावरण, कृषि एवं सहकारिता के माध्यम से निरंतर क्रियाशील रहने वाले शख्सियत के रूप में वृक्ष मित्र ओपी अग्रवाल की ने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। इन्होंने लगभग 10 हजार एकड़ की सामुदायिक राजस्व एवं वन विभाग की भूमि में लगभग एक करोड़ वृक्ष लगवा कर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया। साथ ही अपनी पैतृक बंजर भूमि को विगत 40 वर्षों के परिश्रम हुआ साधना से सिंचित व पल्लवित कर उसे ना केवल उर्वर भूमि के रूप में परिवर्तित किया बल्कि विविध अनुप्रयोग कर जनसाधारण के समक्ष एक आदर्श उपस्थित करते हुए जैविक खेती का एक मॉडल विकसित किया। उनके उत्कृष्ट कार्यों की अनेक स्तर पर सराहना हुई। भारत सरकार के द्वारा इन्हें इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्षामित्र पुरस्कार से नवाजा गया था। इसके अतिरिक्त विभिन्न संस्थाओं द्वारा इन्हें समय-समय पर पृथ्वी मित्र, पर्यावरण मित्र, सहकारिता बंधु, ग्रीन एंबेस्डर ग्रीन लीडर जैसे पुरस्कार प्रदान किए गए।
पिछले चार दशक से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे ओपी अग्रवाल ने जैव विविधता के लिए भी कार्य किया। उनके जैवविविधता केंद्र में आज भी युवा पीढ़ी अध्ययन कर रही है। बचपन से ही हरियाली के प्रति प्रेम और समर्पण ने युवा अवस्था में ही इन्हें पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के कार्य में मोड़ दिया था।


