सरगुजा

श्रीराम कथा का विश्व संदर्भ महाकोश का विमोचन
27-Dec-2021 9:02 PM
श्रीराम कथा का विश्व संदर्भ महाकोश का विमोचन

महाकोश में सरगुजा अंचल की राम कथा भी शामिल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 27 दिसंबर।
विज्ञान भवन नई दिल्ली में देश-विदेश के राम भक्तों की उपस्थिति में श्रीराम कथा का विश्व संदर्भ महाकोश के प्रथम खंड का विमोचन मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति पर्यटन और डोनर मंत्री किशन रेड्डी, विशिष्ट अतिथि पर्यावरण एवं खाद्य उपभोक्ता केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे और वरिष्ठ साहित्यकार व चाणक्य वार्ता के संरक्षक लक्ष्मीनारायण माला की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्थान मुंबई द्वारा प्रकाशित इस महाकोश के प्रधान संपादक प्रोफेसर प्रदीप कुमार सिंह मुंबई, सह संपादक प्रोफेसर नीलू गुप्ता विद्यालंकार कैलिफोर्निया अमेरिका और प्रोफेसर विनय कुमार बोधगया हैं। श्रीराम कथा का विश्व संदर्भ महाकोश के प्रथम खंड में भारत के विभिन्न प्रांतों के लोकगीतों तथा लोक कथाओं में श्रीराम का संदर्भ को समाहित किया गया है। इस कोश के छत्तीसगढ़ अंक में सरगुजा अंचल के विभिन्न स्थल जहां-जहां भगवान श्री राम के पावन चरण पड़े और सरगुजिहा लोकगीतों को समाहित किया गया है।
 
इस अध्याय के लेखक राजपाल पुरस्कृत व्याख्याता और साहित्यकार अजय कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि इस महाकोश में सरगुजा संभाग के पवित्र 37 स्थलों का वर्णन किया गया है, जहां-जहां प्रभु श्रीराम के पावन चरण पड़े थे। इसमे बलरामपुर जिले के 2,जशपुर जिले के 4, सरगुजा जिले के 09,सूरजपुर जिले के 10 और कोरिया जिले के 10 स्थल शामिल हैं। सरगुजा अंचल के अनेक जगह पर प्राचीन मूर्त धरोहरों में रामकथा का विभिन्न प्रसंगों का शिल्यांकन देखने को मिलते हैं। भगवान श्रीराम के वनवास काल का छत्तीसगढ़ में पहला पड़ाव उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के कोरिया जिले के भरतपुर तहसील के सीतामढ़ी हरचौका को माना जाता है।

कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका, सीतामढ़ी घाघरा, महादेवन, खमरौध, कोटाडोल, सीतामढ़ी छतौड़ा आश्रम, सिद्ध बाबा का आश्रम, देवसील,सीतामढ़ी(गांगी रानी)रामगढ़, जटाशंकरी गुफा और अमृतधारा भगवान श्रीराम, माता सीता और रामायण से संबंधित प्रमुख प्राचीन स्थल हैं। सूरजपुर जिले का जोगी माड़ा चपदा(पत्थर गुफा), कुदरगढ़ वन देवी पूजा, सीता लेखनी पहाड और लक्ष्मण पंजा, रक्सगंडा, रामेश्वरनगर का तीर-धनुश, सारासोर, श्री राम लक्ष्मण पायन मरह_ा, साल्हो और बेसाही पहाड़ पोड़ी, अर्द्धनारीश्वर जलेश्वरनाथ शिवपुर, बिलद्वार गुफा ,विश्रवाऋषि का आश्रम एवं लक्ष्मण पंजा पिलखा पहाड़ और सरगुजा जिले का अंबिकापुर (विश्रामपुर), देवगढ़, महेशपुर, रामगढ़, लक्ष्मणगढ़, मिरगा डाड़, चंदन मिट्टी गुफा, नान दमाली एवं बड़े दमाली के समीप बंदरकोट, अंजनी टीला, मैनपा शरभंजा, देउरपुर (महारानीपुर), सीतापुर में मंगरेलगढ़, एवं जशपुर जिले के पत्थगांव तहसील का किलकिला आश्रम, बगिचा तहसील का शिव मंदिर रजपुरी(बगिचा), लेखा पत्थर रेंगले कनकुरी तहसील लक्षमण पंजा रिंगारघाट और बलरसमपुर जिले के सीता चूंआं, सीता चौक दुप्पी आदि भगवान श्रीराम, माता सीता और रामायण से संबंधित प्रमुख प्राचीन स्थल हैं। साथ ही ऐसे सरगुजिहा लोक गीत संकलित हैं, जो रामायण के प्रसंगों पर आधारित हैं।

सरगुजा अंचल में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के वन गमन की कहानी यहां के पर्वतों, गुफाओं, नदियों और पत्थरों में देखने और सुनने को जितना मिलता है, कहीं उससे ज्यादा सरगुजा अंचल के पारंपरिक सरगुजिहा लोकगीतों में भी उल्लेख हुआ है। वनवास काल के समय यहां की जनजातियां ही भगवान श्रीराम - लक्ष्मण और माता सीता के साथ रहे। इनकी जातीय बोली कुडूख, कोरवाई, पंडो, और कोडाकू में भी रामकथा के विभिन्न प्रसंग सुनने को मिलते हैं। सरगुजा अंचल में सैला, करमा, डोमकच, सोंदो, लोकड़ी, बानबहुली, रोपा (खेती लोकगीत) सुआ, ददरिया, गाना लोक गीतों में राम जन्म से लेकर धनुष यज्ञ, विवाह, वन गमन, सीता हरण, सीता की खोज, राम - रावण युध, वन वापसी और राज्याभिषेक तक के सभी प्रसंग सुनने को मिलते हैं।

माता सीता की खोज के समय का सरगुजिहा पारंपरिक लोकगीत राम धरे धनुस, लखन धरे बान, सीता माई कर खोज मां निकले हनुमान,निकले हनुमान हो निकले हनुमान।सीता माई कर खोज मां निकले हनुमान अजय चतुर्वेदी के द्वारा सरगुजा अंचल के विखरे धरोहरों,लोक साहित्यलोक कला,लोक परंपराओं को सहेजने का सराहनीय पहल किया जा रहा है। इनके द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में सरगुजा अंचल की प्रस्तुति दिया जा चुका है।श्रीराम कथा का विश्व संदर्भ महाकोश सरगुजा अंचल के राम भक्तों के लिए महत्वपूर्ण ग्रंथ होगा।


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