सरगुजा
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक, अफसरों को कई निर्देश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 21 नवम्बर। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टी एस सिंह देव ने सरगुजा जिला पंचायत सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली, जिसमें सरगुजा संभाग के सभी सीएमएचओ, आयुष्मान प्रभारी, बीएमओ, जिला हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक, चिकित्सकों, डीपीएम उपस्थित रहे। इस बैठक में बिलासपुर की स्वास्थ्य संस्था संगवारी विशेष रूप से उपस्थित रही, वहीं रायपुर से ऑनलाईन इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं सचिव उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य संस्था संगवारी, जिसने स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव के निर्देश में संभाग में विभिन्न बीमारियों एवं विशेष पिछड़ी जनजातियों की मृत्यु एवं बीमारी पर सर्वे कर उसमें विभिन्न प्रकार की जानकारी समीक्षा बैठक में साझा की। सर्वप्रथम समीक्षा बैठक में एजेंडा-1 के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति खासकर पहाड़ी कोरवा एवं कोरवाओं पर किये गए सर्वे कार्य की विस्तृत जानकारी दी। संगवारी की टीम ने एसएचसी, पीएचसी, सीएचसी, डिस्ट्रिक हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज में विजिट कर वहां पर आने वाले पिछड़ी जनजातियों के कुल केस का अध्ययन किया एवं किन क्षेत्रों से लोग आ रहे हैं, जिन पहाड़ी कोरवा परिवारों में मृत्यु हुई उनसे मुलाकात कर उनके परिवार का रहन-सहन, खाना-पीना, पेयजल, स्वच्छता, सरकार से मिलने वाली योजना की जानकारी सहित उनका स्वास्थ्य जांच, ब्लड सैम्पल लेकर जबलपुर से कई तरह की जांच कराई गई है, जिसमें संगवारी की टीम ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार उनमें मृत्यु अच्छा बीमारी का एक मात्र कारण एनीमिया, कम हीमोग्लोबिन, अच्छा न्यूट्रिशन ही नहीं है बल्कि कई वजह है, जिसके कारण असमय जान गई है। केवल एनीमिया और हीमोग्लोबिन में कमी, पोषण युक्त भोजन न मिलना बता कर हम अपना हाथ नहीं खींच सकते।
संगवारी से डॉ योगेश जैन ने बताया कि जब हमने इन क्षेत्रों में कम्यूनिटी बैठक की तो पता चला कि पेयजल, स्वच्छता, जाति प्रमाण पत्र, आवागमन हेतु सडक़ की अच्छी व्यवस्था, लैंड सेटलमेंट, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों सहित सरकार के अन्य योजनाओं का सही रूप में न पहुचना भी बड़ा कारण है, जिसके कारण ये लोग मुख्यधारा से दूर हैं और वहां क्या हो रहा है इसकी पूरी जानकारी नहीं पहुंच पाती।
संगवारी ने जानकारी देते हुए कहा कि सबसे पहले हमें स्वास्थ्य विभाग में उन समुदायों के लोगों को जिस स्तर पर भी भर्ती कर सकते हैं करना चाहिए, ताकि वे हॉस्पिटल तक आयें और उन्हें ऐसा लगे कि यहां हमारे बीच का कोई है, उनकी चीजों को समझने वाला एक ऐसा व्यक्ति हो जो उन्हें अच्छे से जानता हो, समझता हो। मितानिन से लेकर एसएचसी, पीएचसी, सीएचसी, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल तक किस स्तर पर कहाँ उन्हें नौकरी पर रख सकते हैं, इस पर काम करने की जरूरत है ताकि वे हॉस्पिटल में आने से डरे नहीं। सहित कई विषयों पर संगावरी की टीम ने डेटाबेस तरीके से संभाग के अलग-अलग क्षेत्रों के विशेष पिछड़ी जनजातियों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।
स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव ने कहा कि पिछड़ी जनजातियों के कितने लोगों की हम हर माह, हर सप्ताह, स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं, इस पर ध्यान देना है, इसकी प्रत्येक महीने रिपोर्टिंग हो। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमें इसकी रिपोर्टिंग नहीं चाहिए कि आपने कितने शिविर लगाये, हमें हर पिछड़ी जनजातियों के प्रत्येक परिवारों का डाटा और नियमित स्वास्थ्य जांच चाहिए। जब तक आप इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए टारगेट बेस पर काम नहीं करेंगे तब तक हमें उस क्षेत्र विशेष, समुदाय विशेष के बीमारी समस्या का पता नहीं चल सकेगा।

इसके साथ-साथ प्रत्येक एसएचसी, पीएचसी, सीएचसी, डीएच एवं मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक मरीज का पूरा डेटा बेस तैयार करना शुरू कीजिए, जिससे जब भी वह पेसेंट आप तक पहुंचे उसके पहले के ईलाज एवं बीमारी की पूरी डिटेल आप के पास हो। संभाग में लगभग 1 लाख पहाड़ी कोरवा/कोरवा की जानकारी आपके पास है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत अकेले बलरामपुर जिले के हैं, इसका टारगेट बनाइये और सबसे पहले पहाड़ी कोरवा-कोरवा, मांझी की स्वास्थ्य डेटा तैयार कीजिये। उनको क्या स्वास्थ्य समस्या है, क्या पूरे समुदाय में है, उसे कैसे दूर किया जा सकता है, कैम्प लगाना है, नियमित जांच चाहिए, जो भी जरूरी हो करें ताकि जो समस्या सालों से, दशकों से हैं उसे हम दूर करें। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव ने कहा कि 15 दिनों के अंदर सरगुजा संभाग के समस्त पहाड़ी कोरवा परिवारों के आयुष्मान कार्ड उनके निवास स्थलों में जाकर बनायें। स्वास्थ्य विभाग का अमला वहीं निवास करें, रेफरल व्यवस्था को मजबूत करें और कभी भी एम्बुलेंस की कोई दिक्कत हो तो स्वयं से वाहन बुक करके भेजिये, विभाग पैसा देगा, ताकि कोई अप्रिय स्थिति को घटने से रोका जा सके। साथ ही समस्त मरीजों का डॉक्यूमेंटेशन करने की शुरुआत करें।
इसके साथ ही पांचों जिलों में पीएचसी, सीएचसी, डीएच, मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान कार्ड से क्लेम की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव ने संतोष जताया और सरकारी हॉस्पिटलों के लिए आयुष्मान कार्ड क्यों जरूरी है, इस पर बात की। इस दौरान यूपीएचसी नवापारा को मॉडल पीएचएसी के रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि कैसे यह पीएचसी अपनी साधन और सुविधाओं से आगे बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि इनके यहां से प्रत्येक दिन औसत 3 से 4 केस आयुष्मान योजना में दिए जा रहे हैं, जिससे इन्हें साल में आयुषमान कार्ड से ईलाज करने पर एक करोड़ से ऊपर की राशि मिल रही है, जिसमें 15 प्रतिशत जीवनदीप समिति को मिल रही है, जिससे ये अपने यहां निर्माणकार्य सहित साधन सुविधाओं का विकास कर रहे हैं, साथ ही इसमें डॉक्टरों एवं अन्य स्टाफ को आयुष्मान योजना से वेतन के साथ-साथ इंसेंटिव भी मिल रहा है, जिससे ये सरकारी सहयोग के साथ-साथ आयुषमान के लाभ से अपने हॉस्पिटल में सुविधाओं का इजाफा कर रहे हैं। इस मॉडल को अपना कर हमें हर पीएचसी, सीएचसी एवं डीएच में आयुषमान का ज्यादा से ज्यादा केस लेना है, हमारे हॉस्पिटलों में आये हर मरीज को हमें आयुष्मान से ईलाज करना इसका लक्ष्य बनाइये, हॉस्पिटल को भी पैसा मिलेगा और आप सब को भी इंसेंटिव मिलेगा। हमें नवापारा मॉडल पर पूरे प्रदेश में एक वर्ष में 200 पीएचसी बनाना है, वहीं सरगुजा संभाग में कोरिया में 8, जशपुर में 8, अम्बिकापुर में 10, सूरजपुर में 9 और बलरामपुर में 8 मॉडल पीएचसी बनाना है, जहां ईलाज में बढ़ोतरी के साथ-साथ स्वच्छता एवं अन्य रोगों की ईलाज सुविधा हेतु बड़े हॉस्पिटलों एवं प्राइवेट हॉस्पिटलों से डॉक्टरों को बुलाकर ईलाज करायें। हमें ऐसा सिस्टम बनाना है जहां पर जनता का पैसा कम से कम खर्च हो और एक ही सेंटर पर अधिक से अधिक सुविधाओं का लाभ दे सकें। वहीं सिकल सेल के मरीजों को हर ब्लॉक में जांच कर चिन्हांकित कर उन्हें हर महीने मुफ्त दवाई एवं ईलाज की सुविधाएं देनी है। उनका कार्ड बनायें ताकि उन्हें बार-बार जांच न करानी पड़े। 1 दिसम्बर से प्रत्येक ब्लॉकों में इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर सिकल सेल मरीजों को चिन्हांकित कर जांच कर ईलाज की सुविधा उपलब्ध करायें। साथ ही संभाग में रिक्त पदों की जानकारी, टीकाकरण की स्थिति सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी ली एवं आवश्यक निर्देश दी।
वहीं नवजात बच्चों के मौत के बढ़ते मामलों पर भी संभाग के अलग-अलग जिलों से पहुंचे सीएमएचओ, बीएमओ एवं जिला हॉस्पिटल के चिकित्सकों से विस्तृत जानकारी ले, गर्भवती माताओं को आंगनबाड़ी स्तर से चिन्हांकित कर, मितानिनों को साथ लेकर ऐसे क्रिटिकल केस जिसमें 7वें, 8वें एवं 9वें महीने में डिलीवरी की स्थिति अथवा उस दौरान होने वाली स्थिति से निपटने के लिए उन पर पहले महीने से ही स्वास्थ्यगत आंकड़ा एवं जानकारी लेना शुरू कर दें, ताकि ऐसे क्रिटीकल स्थिति वाले केसों को पहले ही सीएचसी एवं डीएच में शिफ्ट कर आवश्यक ईलाज की सुविधा पहले ही मिल सके अथवा जरूरत पडऩे पर मिल सके। हमारा कार्य है जान बचाना, इसलिए प्रत्येक आने वाले केस का सही देखभाल हमारी जवाबदेही है।
संभाग स्तरीय बैठक सुबह 11 बजे से शाम 6:30 तक चली, जिसमें मुख्यत: पिछड़ी जनजातियों के मौत का मामला, नवजात बच्चों के मौत का मामला तथा सिकल सेल केस को लेकर स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव काफी गंभीर दिखे, उन्होंने समस्त मामलों में साप्ताहिक एवं महीने में रिपोर्टिंग करने एवं डेटा तैयार करने के निर्देश दिए, उन्होंने कहा कि सीधे मुझे जानकारी दें।
एसएचसी, पीएचसी, सीएचसी, डिस्ट्रिक हॉस्पिटल अथवा मेडिकल कॉलेज की गलती बताकर आप समस्या से नहीं भाग सकते। सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, सबको आपस में समन्वय बना कर कार्य करना है और आम लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है, अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदारी से कार्य करना है। इस दौरान रेड क्रॉस सोसाइटी के चेयरपर्सन आदित्येश्वर शरण सिंह देव, जेडी पी एस सिसोदिया, डॉ अमीन फिऱदौसी, डॉ रेलवानी, डॉ अनिल प्रसाद सहित संभाग के पांचों जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


