सरगुजा

एलुमिना फैक्ट्री के विरोध व 3 ग्रामीणों की रिहाई के लिए सडक़ पर उतरे ग्रामीण, 6 घंटे रहा जाम, गाडिय़ों की कतारें
02-Nov-2021 8:51 PM
एलुमिना फैक्ट्री के विरोध व 3 ग्रामीणों की रिहाई के लिए सडक़ पर उतरे ग्रामीण, 6 घंटे रहा जाम, गाडिय़ों की कतारें

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 2 नवंबर।
सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के चिरंगा में प्रस्तावित एलुमिना फैक्ट्री के विरोध व तीन ग्रामीणों की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार की दोपहर अंबिकापुर-रायगढ़ एनएच पर बतौली चौक के पास ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम के कारण मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग गई।

ग्रामीण महिलाओं व पुरुषों को उग्र देख जिला प्रशासन अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। भारी संख्या में पुलिस बल को देखकर एक समय तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। तनाव के बीच 6 घंटे बाद प्रशासन व पुलिस की टीम  जाम हटवा पाई। इस दौरान प्रशासन व पुलिस की ग्रामीणों के साथ जमकर बहस हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति ऐसी निर्मित हो गई थी कि पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ सकता था, लेकिन प्रशासन के भारी मशक्कत व समझाइश के बाद मामला शांत हो सका।

जानकारी के अनुसार बतौली में ग्राम चिरंगा, माँजा, लैगू, करदना, कालीपुर, पोंडी के दो हजार से अधिक महिला पुरुषों ने दोपहर दो बजे से चक्काजाम बगीचा चौक में कर दिया। ग्रामवासी अपने तीन साथियों महेश राम, नंदलाल, सियम्बर की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन कर रहे थे। इस चक्काजाम से बतौली से लमगांव तक, बतौली से मंगारी तक और बतौली से बिलासपुर तक सैकड़ों बड़ी गाडिय़ों की लाइन लग गई। पचास से अधिक सवारी बस चक्काजाम में फंस गई।

चिरंगा में लगने वाले एल्युमिनियम फैक्ट्री के विरोध में 7 गांव के लोग एकजुट हैं। आये दिन आंदोलन करके शासन-प्रशासन से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। शासन ने 1100 एकड़ जमीन इसके लिए आरक्षित किया है, जिसमें से अधिकांश का नामांतरण भी हो गया है। लगभग 1200 करोड़ से लगने वाली इस फैक्ट्री में कई रसूखदार संलग्न हैं। इसी से जुड़ा हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत 2400 करोड़ है। गत 30 अक्टूबर को ग्राम चिरंगा में परस राम भगत जो पूर्व आरआई थे, जेसीबी लगाकर समतलीकरण कर रहे थे। ग्रामीण कुदरगढ़ी का कार्य जानकर आंदोलित हो गए और परसराम भगत, साथी के साथ मारपीट किये। मामला दर्ज होने पर गिरफ्तार कर जेल दिया गया था।

आंदोलन को देखते हुए जिला पुलिस उप अधीक्षक विवेक शुक्ला, एसडीओपी सीतापुर, एसडीएम अनमोल टोप्पो, तहसीलदार बतौली के साथ लुंड्रा सीतापुर अंबिकापुर रक्षित केंद्र से भारी मात्रा में महिला एवं पुरुष पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचे। दोपहर बाद 2 बजे से हो रहे चक्काजाम 8.15 बजे खुल पाई। अतिरिक्त पुलिस उपाधीक्षक विवेक शुक्ला ने काफी मान मनौव्वल से महिलाओं को मना पाए। काफी अधिक संख्या में महिलाएं इस आंदोलन में सक्रिय रहीं।

पुलिस व प्रशासन के विरुद्ध नारे लगाकर आंदोलन कर रहे महिलाओं ने कहा कि फैक्ट्री लगाने वाले काफी रसूखदार हैं। जन सुनवाई के समय एक टीआई ने हमारा पक्ष लेकर बात की तो उसका ट्रांसफर कर दिया गया। जो भी हमारे पक्ष में बात करेगा उसकी ट्रांसफर हो जाएगी, क्योंकि फैक्ट्री लगाने वाले रसूखदार के साथ-साथ राजनीतिक संरक्षण प्राप्त भी है।
 
ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि कुदरगढ़ी एल्युमिनियम फैक्ट्री के प्रबंधन में षड्यंत्र करके महेश राम, नंदलाल और सियम्बर को फंसाया है, जिससे आंदोलन को दबाया जा सके और फैक्ट्री लग सके।


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