सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजपुर, 7 सितंबर। जनजाति गौरव समाज बलरामपुर जिला के द्वारा 5 सितम्बर को शिक्षक गौरव सम्मान के रूप में कार्यक्रम आयोजित कर शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में अतिथि के रूप में संत वबरूवाहन महराज, अध्यक्ष सनातन संत समाज एवं डॉ.पो.आशुतोष मण्डावी , कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर एवं डॉ . प्रो . मुकेश सिंह गुरू घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं सविता पण्डो, गांझा राम पहाड़ी कोरवा के आतिथ्य में एवं जनजाति गौरव समाज के संभागीय अध्यक्ष परमेश्वर सिंह की अध्यक्षता में सरस्वती शिशु मंदिर डिपाडीहकला में सम्पन्न हुई।
सर्वप्रथम अतिथियों के द्वारा भारतमाता , सरस्वती माता, महामाया, छत्तीसगढ़ महतारी, बाबा सावत सरना, डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के छायाचित्र पर धूप - दीप प्रज्ज्जवलित कर कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। अतिथियों का आयोजन समिति के पदाधिकारी द्वारा तिलक लगाकर शाल-श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि के द्वारा शिक्षकों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का संस्कार जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में शिक्षा की दृष्टि से गुरू महाराज ने सनातन संत समाज की स्थापना की एवं डॉ . सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर भी प्रकाश डालते हुये एक आदर्श शिक्षक की भूमिका स्वस्थ समाज निर्माण में किस प्रकार का होना चाहि, इस विषय पर भी प्रकाश डाला ।
डॉ.प्रो.मुकेश सिंह कहा कि कितने संघर्ष के बाद शिक्षा मिलती है। शिक्षा पाने के लिए गुरू और शिष्य में अपनापन का भाव होना चाहिए।
शिक्षा प्राप्ति के बाद अपनों को छोडऩा नहीं चाहिए , यह समाज , यह देश मेरा है, इस प्रकार के भाव में शिक्षक को रहना चाहिए। डॉ . आशुतोष मण्डावी ने प्राचीन गुरू परंपरा का उदाहरण देते हुये ऋषि - मुनियों का गुरू और शिष्य परंपरा आदर्श उदाहरण एवं वन्य औषधि विषय पर भी प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर सविता पण्डो के द्वारा अपने बारे में बताते हुये शिक्षा में संघर्ष का वृतांत बताया।
परमेश्वर सिंह के द्वारा प्राचीन काल से गुरू शिष्य की परंपरा ‘गुरू ही ब्रम्हा गुरू , गुरू ही विष्णु , गुरू ही महेश्वर’ इस विषय पर प्रकाश डाला। जनजाति गौरव समाज की स्थापना का मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए सनातन जनजाति धर्म संस्कृति रितिरिवाज परंपरा को बनाये रखने की दृष्टि से विदेशी सभ्यता , संस्कृति , से सावधान रहने को कहा । ॉ
अतिथियों के द्वारा विशेष उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों एवं सेवानिवृत शिक्षकों का साल , श्रीफल , अंगोछा , औषधिय पौधा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया । जिसमें कुवंर साय,सिद्धनाथ पैंकरा,यदुनाथ सिंह,डोमनसाय भगत, टयाँ राम नागे , महेन्द्र यादव , गणेश राम माँझी , लल्लू राम , गायत्री भगत , श्रीमती गाँझा राम आदि । कार्यक्रम का संचालन जनजाति गौरव समाज के बलरामपुर जिला के संरक्षक उमाशंकर भगत के द्वारा किया गया ।


