सरगुजा
लाठीचार्ज की निंदा एवं हरियाणा की खट्टर सरकार को बर्खास्त करने की मांग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 6 सितंबर। अंबिकापुर में पूर्व घोषणा के अनुसार किसान आंदोलन के संयुक्त मंच के राष्ट्रीय आव्हान पर छत्तीसगढ़ किसान सभा सरगुजा जिला समिति के तत्वावधान में मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस आंदोलन में सरगुजा संभाग के दूरदराज क्षेत्रों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। मोटरसाइकिल रैली अंबिकापुर के प्रमुख मार्गों से होते हुए घड़ी चौक पर आकर आम सभा में तब्दील हो गई। आम सभा की अध्यक्षता संयुक्त सरगुजा के प्रसिद्ध किसान नेता साथी पियर सिंह ने की।
आम सभा को छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य सचिव साथी ऋषि कुमार गुप्ता, आदिवासी एकता महासभा के राज्य सचिव साथी बाल सिंह ,आदिवासी एकता महासभा के सरगुजा जिला सचिव साथी रामलाल हंसदा, आदिवासी एकता महासभा जिला सूरजपुर के सचिव साथी सुरेंद्र लाल सिंह, आदिवासी एकता महासभा के साथी कृष्ण कुमार, इप्टा के साथी महिला नेत्री श्रीमती मीना सिंह ,शहीद भगत सिंह अकैडमी के गोल्डी अरोड़ा आदि ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एकमत से किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की एवं खट्टर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। सभी वक्ताओं ने तीनों कृषि कानून एवं बिजली कानून को वापस लेने की मांग की ।वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार को किसानों का विरोध बहुत महंगा पड़ेगा ।
आम सभा में खेद व्यक्त करते हुए कहा गया कि मोदी सरकार देश के सारे उद्योग धंधों को बेचने के पश्चात अब किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने हेतु तुली हुई है। वक्ताओं ने कहा कि मोदी ने सत्ता में आने के पहले वादा किया था की किसानों के हित के लिए स्वामीनाथन आयोग लागू किया जाएगा और अब वही मोदी किसानों को गुलाम बनाने मैं कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं ।वक्ताओं ने कहा कि आज मुजफ्फरपुर में लाखों किसान देश के कोने कोने से पहुंच कर महापंचायत कर तीनों कृषि कानून एवं नए बिजली कानून का विरोध कर रहे हैं और मोदी सरकार को आगाह कर रहे हैं।
वक्ताओं ने खट्टर सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि खट्टर सरकार किसानों से वोट प्राप्त कर किसानों के ऊपर ही लाठी बरसा रही है, उन्हें ही मौत दे रही है, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने 25 सितंबर को भारत बंद कार्यक्रम को सफल बनाने का आम जनता से आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रगतिशील लेखक संघ अंबिकापुर, भारतीय जन नाट्य संघ अंबिकापुर आदि संगठनों का भरपूर सहयोग रहा।


