सरगुजा
अंबिकापुर में समर्थकों ने स्वास्थ्य मंत्री का गर्मजोशी के साथ किया स्वागत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,4 सितंबर। दिल्ली और रायपुर में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद शनिवार को हेलीकॉप्टर से अंबिकापुर पहुंचे स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंह देव का कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। पीजी कॉलेज मैदान में पत्रकारों के प्रश्न कि छत्तीसगढ़ डोल रहा है, छत्तीसगढ़ अड़ा है को लेकर प्रदेश में कोहराम मचा है, के सवाल पर कहा कि कहीं ऐसा कुछ नहीं है, न कहीं डोल रहा है न अड़ा है और न ही बोल रहा है। सिंहदेव ने कहा कि जो हाईकमान का निर्णय व आदेश होता है हम कांग्रेस के अनुशासित सदस्य उसका पालन करते हैं।
पत्रकारों ने सिंहदेव से पूछा कि गांव-गांव में चर्चा है कि बाबा आने वाले हैं, उनके लिए क्या संदेश है। प्रश्न के संदर्भ में टीएस सिंह देव ने कहा कि वह पारिवारिक गमी के कार्यक्रम में आए हैं। जैसे जैसे संकेत मिले कि यह संभावना है वह दिल्ली में रुके हुए थे। 13,14,16 अगस्त से 21 अगस्त उसके बाद 24 अगस्त को उनकी बैठक हुई, इस कारण वह दिल्ली में रुके हुए थे।
स्थायित्व परिवर्तन के प्रश्न पर श्री सिंहदेव ने कहा कि यह सब सारी बातें बहुत हो गई है, शुभचिंतकों ने कहा है कि इस विषय में कुछ न कहें, इसलिए मैं इस पर कोई चर्चा नहीं करूंगा।
प्रदेश में डेंगू को लेकर कहा कि ठहरे हुए पानी को जमीन में बहा दें, इसके कारण लार्वा मर जाता है, इसके लिए जागरूकता आवश्यक है, शासन भी पहल कर रही है। एलाइजा टेस्ट से पता चल जाता है कि डेंगू है या सामान्य मलेरिया, इसकी जांच करवा लेना चाहिए। इसके अलावा सिंहदेव ने और भी स्वास्थ्य विषयों पर भी चर्चा की।
स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव आज राजधानी रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा मरवाही विधायक केके ध्रुव के निवास पहुंचे और परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। यहां से वह अंबिकापुर दोपहर एक बजे पीजी कालेज मैदान पहुंचे और अपने निज सहायक आनंद सागर सिंह की माता के निधन पर उनके घर पहुंच परिवार के शोक कार्यक्रम में शामिल हुए।
यहां से वे उदयपुर हेलीकॉप्टर से रवाना हुए, जहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता व सरगुजा राजपरिवार से जुड़े सिद्धार्थ सिंहदेव जिनकी माता का कुछ दिन पहले ही निधन हुआ था, शोक कार्यक्रम में शामिल हुए। शाम पांच बजे स्वास्थ्य मंत्री उदयपुर से ही राजधानी के लिए हेलीकॉप्टर से रवाना हो गए।


