सुकमा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सुकमा, 15 जून। सुकमा जिले में पिछले महीने आए आंधी-तूफान से प्रभावित हुए परिवारों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिलने का मामला सामने आया है। इस समस्या को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला मुख्यालय के समस्त सरपंच, वार्ड पंच, जिला एवं नगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि पिछले दिनों आए चक्रवात के कारण जिले के विभिन्न गांवों में मकानों को क्षति पहुंची थी। शिकायत के अनुसार, पटवारियों द्वारा मौके पर जाकर पंचनामा तैयार किए जाने के बाद भी, राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत मिलने वाली प्राकृतिक आपदा राहत राशि एक माह बीत जाने के बाद भी पीडि़तों के खातों में नहीं पहुंची है।
मानसून की मार, लोग परेशान
कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर को बताया कि मानसून की शुरुआत हो चुकी है और प्रभावित परिवार क्षतिग्रस्त मकानों या तिरपाल के सहारे रहने को मजबूर हैं। पीडि़त परिवार राहत राशि के लिए तहसील और जनपद कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा ने कहा कि प्रभावित परिवारों को राहत राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अधिकारियों द्वारा बजट न होने या फाइल लंबित होने की बात कही जा रही है। यदि समय पर राहत नहीं मिली तो प्रभावितों की परेशानी और बढ़ सकती है।
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने कलेक्टर से मांग की है कि आरबीसी 6-4 के तहत स्वीकृत मुआवजा राशि तत्काल सभी पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में जमा की जाए। जिन गांवों का मुआयना शेष है, वहां 3 दिन के भीतर टीम भेजकर पंचनामा बनाकर भुगतान प्रक्रिया पूरी की जाए। काम में लापरवाही बरतने वाले पटवारी और राजस्व निरीक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। बारिश से बचाव के लिए प्रभावित परिवारों को तत्काल तिरपाल और अस्थायी शेड उपलब्ध कराए जाएं।
कलेक्टर ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन को स्वीकार करते हुए मामले की गंभीरता पर संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का आश्वासन देते हुए कहा कि आगामी सात दिनों के भीतर प्रभावितों तक राहत पहुंचाई जाएगी।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर पीडि़तों को राहत नहीं मिली, तो वे आगामी कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।


