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छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : लॉकडाऊन, और संभावनाएं...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : लॉकडाऊन, और संभावनाएं...
19-Jun-2020 7:09 PM

लॉकडाऊन, और संभावनाएं...

देश के अधिकतर संपन्न लोग, उच्च-मध्य वर्ग के लोग, और आपात सेवाओं को छोडक़र बाकी काम करने वाले लोग लॉकडाऊन के दो महीने घर में ही कैद सरीखे रहे। बाहर निकलना भी हुआ, तो भी मजबूरी में। बहुत से लोगों ने इस दौरान चर्बी चढ़ जाने की तकलीफ बताई, अधिकतर संपन्न लोगों ने बोरियत, और खाली बैठे लोगों ने लॉकडाऊन हालत में परिवार के भीतर के गढ़े गए लतीफे आगे बढ़ाए, सोशल मीडिया पर कार्टून पोस्ट किए।

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी निकले जिन्होंने इस वक्त का इस्तेमाल किया। गुजरात के एक-एक परिवार की कहानी छपी, जिसने अपने घर की तमाम दीवारों को टेराकोटा रंग में रंगकर उस पर महाराष्ट्र के मछुआरा लोक कलाकारों की वारली शैली के भित्ती चित्र बनाए, और घर बाहर-बाहर से एक कला संग्रहालय जैसा हो गया। बहुत से लोगों ने इंटरनेट पर कई नए हुनर सीखे, भाषाएं सीखीं, कम्प्यूटर पर काम करना सीखा, कम्प्यूटर पर नई तरकीबें सीखीं। सबके सामने यह मौका था कि कभी न देखा हुआ, न कभी सुना हुआ एक ऐसा दौर आया जिसमें घरों में कैद रहना मजबूरी था, और लोगों ने उसे अपने-अपने हिसाब से या तो पूरे का पूरा बर्बाद कर दिया, या लोगों ने उसे जिंदगी का सबसे उत्पादक दौर भी बना लिया। वक्त वही था, दौर भी उतना ही था, लेकिन कुछ ने उसे आबाद किया, कुछ ने बर्बाद किया।

इस अखबार के पाठकों को याद होगा कि इसके संपादकीय में लोगों को बार-बार यह मशविरा दिया गया था कि वक्त खराब न करें, और अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है, अभी घर के बाहर की जिंदगी सीमित रहने वाली है, और लोगों के पास रोजाना कई घंटे सिर्फ घर में रहना ही हिफाजत की बात रहने वाली है। ऐसे में अभी भी कुछ सीखें, अभी भी कुछ नया करें, वरना आगे जाकर अगली पीढिय़ों को क्या मुंह दिखाएंगे कि कोरोना-लॉकडाऊन में क्या किया था?

मौत के लिए भी वीआईपी?

राजधानी की कई पॉश कॉलोनियां कोरोना मरीज मिलने के बाद  कंटेंटमेंट जोन में तब्दील हो चुकी हैं। इन्हीं में से एक सिविल लाइन का इलाका भी है। यहां बड़े कारोबारियों के साथ-साथ कांग्रेस और भाजपा के कुछ नेता भी रहते हैं। चूंकि कंटेंटमेंट जोन बन चुका है, ऐसे में यहां के लोगों की बाहर आवाजाही प्रतिबंधित है। मगर कुछ लोगों को बेरोकटोक आने-जाने की अनुमति देने के लिए वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों पर दबाव है।

सुनते हैं कि दो दिन पहले सिविल लाइन कंटेंटमेंट जोन में सफाई व्यवस्था का जायजा लेने एक विधायक वहां पहुंचे। जाते-जाते उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों को दो कारोबारियों का नाम देकर कहा कि उन्हें बेरोकटोक आने-जाने दिया जाए। विधायक द्वारा पुलिस कर्मियों पर दबाव बनाने की सूचना मिलते ही कुछ भाजपा नेता वहां पहुंच गए। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि यदि कुछ विशेष लोगों को ही आने-जाने की अनुमति दी जाती है, तो बाकी लोग कंटेंटमेंट जोन के नियमों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं रहेंगे। माहौल बिगड़ता देख पुलिस कर्मियों ने भरोसा दिलाया कि कंटेंटमेंट जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।

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