राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : लक्ष्मी का भाग्य और बंगला
12-Jun-2026 6:36 PM
राजपथ-जनपथ : लक्ष्मी का भाग्य और बंगला

लक्ष्मी का भाग्य और बंगला

नवनिर्वाचित सांसदों और विधायकों को राजधानी में मनचाहा सरकारी बंगला जल्दी मिल जाए, ऐसा कम ही होता है। मगर राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा इस मामले में भाग्यशाली साबित हुई हैं। उन्हें महज तीन महीने के भीतर ही सरकारी बंगला आवंटित हो गया। खास बात यह है कि यह वही बंगला है, जिसमें पहले डिप्टी सीएम अरुण साव निवास करते थे। अरुण साव के नवा रायपुर शिफ्ट होने के बाद यह आवास खाली हुआ था।

न्यू सर्किट हाउस के पास स्थित इस बंगले की अपनी अलग कहानी है। जानकार बताते हैं कि पिछले दो दशकों में इसके रखरखाव, मरम्मत और विस्तार पर इतना खर्च हो चुका है कि उतनी राशि में कई नए आलीशान बंगले तैयार हो सकते थे। जोगी सरकार के समय यह बंगला पूर्व मंत्री विधान मिश्रा को आवंटित हुआ था। बाद में रमन सरकार में मंत्री राजेश मूणत यहां रहे। पीडब्ल्यूडी विभाग उनके पास होने के कारण बंगले की साज-सज्जा और मरम्मत पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके बाद यह बंगला तत्कालीन डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को मिला, जिन्होंने अपने निजी खर्च से एक अतिरिक्त ब्लॉक का निर्माण भी कराया। सिंहदेव के बाद अरुण साव यहां रहने आए और उनके कार्यकाल में भी कुछ मरम्मत कार्य हुए।

अरुण साव के नवा रायपुर जाने के बाद इस बंगले पर कई वरिष्ठ विधायकों की नजर थी, लेकिन अंतत: यह आवंटन लक्ष्मी वर्मा के नाम हुआ। लक्ष्मी वर्मा ने 'छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि वो इस महीने के आखिरी अथवा जुलाई के पहले हफ्ते में बंगले में शिफ्ट हो जाएंगी।

गौर करने लायक बात ये है कि लक्ष्मी वर्मा की राज्यसभा सदस्य बनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हो चुकी है। चर्चा है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में कुर्मी मतदाताओं की अच्छी संख्या को देखते हुए उनकी भूमिका पर सबकी नजर बनी हुई है।  देखना है कि आने वाले समय में पार्टी उनका किस तरह उपयोग करती है।

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निकायों में मान-सम्मान की खींचतान

छत्तीसगढ़ के नगर-निगमों में इस समय कौन सी ऐसी समस्या है, जिसे ज्यादा गंभीर माना जा सकता है। क्या, पेयजल की आपूर्ति नहीं होना, नालियों की सफाई नहीं होना, कचरा नहीं उठ पाना, स्ट्रीट लाइट और सडक़ों का खराब होना इनमें शामिल हैं? यदि ऐसा है भी तो यह आम नागरिकों की समस्या है। जनप्रतिनिधियों की तकलीफ अलग तरह की है। मान-सम्मान और और ओहदे के मुताबिक कुर्सी से बढक़र कोई बात नहीं होती और अफसर नगर निगमों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को इसकी कमी महसूस हो रही है।

चिरमिरी नगर निगम में स्वास्थ्य मंत्री के साथ नगर निगम के पार्षदों की कोई बैठक होने वाली थी। विपक्षी कांग्रेस का कहना था कि सूचना मिली थी- समीक्षा बैठक होगी, बाद में मंत्री की तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया कि बैठक में उनके आने का कोई कार्यक्रम नहीं था। महापौर और पार्षदों से कहा था कि आपस में ही आप लोग बैठकर अधिकारियों के साथ समीक्षा कर लें। मगर, कांग्रेस ने समझा समीक्षा बैठक होगी। वे सुबह 11 बजे से पहुंच गए, दोपहर 2 बजे तक कोई नहीं पहुंचा। पर वे और इंतजार करने के लिए तैयार थे। नगर निगम के अफसरों से उन्होंने अपने लिए बैठने की जगह पूछी। जवाब मिला- कहीं भी बैठ जाइये। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष सहित विपक्ष के सभी 11 पार्षद जमीन पर बैठ गए और घंटों बैठे रहे।

यह तो प्रतिपक्ष की बात हुई। पर, प्रदेश में अपनी सरकार होने के बावजूद भाजपा के निर्वाचित प्रतिनिधि भी अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कोरबा नगर निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर इस बात को लेकर अफसरों से नाराज चल रहे हैं कि उन्हें और वार्ड के पार्षदों को लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रमों की सूचना नहीं दी जाती। बीते दिनों लोकार्पण का कोई कार्यक्रम था, जिसकी सूचना सभापति को नहीं दी गई। शिकायत पर ठोस कार्रवाई के लिए उन्होंने अफसरों को सोमवार तक का समय दिया था, पर उनकी बात अनसुनी कर दी गई। सभापति ने जो चेतावनी दी, उस पर अमल किया। मंगलवार को उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ दी और जमीन पर बैठकर काम करना शुरू कर दिया।

इधर, बीते सोमवार को बिलासपुर में नगर निगम के मेयर इन कौंसिल की मीटिंग हुई। एक मेंबर ने कहा कि एमआईसी सदस्यों के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था नहीं है। पहले भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नगर निगम दफ्तर में आकर हम भटकते रहते हैं। हमसे मिलने के लिए आने वालों से भी बैठकर बात नहीं कर सकते। जो कमरे खाली हैं, उनमें बदबू और सीलन है, बैठना मुश्किल है। सदस्य की बातों से महापौर पूजा विधानी नाराज हो गईं। उन्होंने कहा- जब अधिकांश सदस्य निष्क्रिय हैं और नियमित रूप से आते ही नहीं तो उनके लिए अलग कक्ष की क्या आवश्यकता है? यह सुनकर एक दूसरे एमआईसी मेंबर नाराज हो गए। उन्होंने कहा- हम निष्क्रिय होते तो बार-बार चुनाव जीत नहीं रहे होते। आगे यह भी कह दिया कि- आप जो आज यहां महापौर हैं, तो उसमें भी हमारा योगदान है। अपने वार्ड से हमने आपको अच्छी लीड दिलाई है। बात बिगड़ते देख मेयर नरम पड़ीं और कहा- जब तक आप लोगों को कक्ष आवंटित नहीं हो जाता, मेरे कमरे में बैठकर लोगों से मिल सकते हैं। हालांकि पार्षद इससे संतुष्ट नहीं हुए।


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